सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी से सजी फिल्म 'बॉर्डर 2' गणतंत्र दिवस के ठीक पहले 23 जनवरी को रिलीज होगी। इसमें वरुण धवन को लेकर इंटरनेट पर कुछ ज्यादा ही बातें हो गईं। पहले तो उन्हें बहुत भला-बुरा कहा गया, लेकिन फैंस उनकी एक्टिंग की तारीफ भी कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वरुण जिस दिग्गज सैनिक होशियार सिंह का रोल प्ले कर...
सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी की आगामी फिल्म 'बॉर्डर 2' कुछ ही दिनों में 23 जनवरी को रिलीज होने वाली है। यह फिल्म 1997 में आई फिल्म 'बॉर्डर' का सीक्वल है, जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हुए लोंगेवाला वॉर पर आधारित थी। अब नए पार्ट यानी 'बॉर्डर 2' को लेकर चर्चा है कि इस फिल्म में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर ध्यान दिया जाएगा। युद्ध के दौरान देश की रक्षा के लिए दुश्मन पर हमला करते हुए सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों को दिखाया जाएगा। इसमें वरुण धवन मेजर होशियार सिंह का किरदार निभा रहे हैं, जिनकी बहादुरी के किस्से हर किसी को जानना चाहिए। उनकी वीरता की कहानी आपको भी भावनाओं से भर देगी।वरुण धवन ने 3 ग्रेनेडियर्स के मेजर होशियार सिंह दहिया का रोल प्ले किया है, जिन्हें युद्ध के दौरान उनकी वीरता के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। होशियार सिंह ने एक पुराने इंटरव्यू में बसंतर के युद्ध के दौरान घटी घटनाओं को याद किया था, जिसमें उन्होंने घायल होने के बावजूद लड़ाई लड़ी और सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया। इसी युद्ध में द्वितीय लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल शहीद हो गए थे। अरुण के जीवन पर बेस्ड फिल्म 'इक्कीस' इसी महीने सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।वरुण धवन कर रहे जिस होशियार सिंह का किरदार, वो कौन!1997 में रिकॉर्ड किए गए एक इंटरव्यू में होशियार सिंह ने बसंतर की लड़ाई की कहानी सुनाई, जिसमें कई पाकिस्तानी टैंक नष्ट हो गए और उनके कई सैनिक शहीद हो गए। उन्होंने बताया कि उन्हें पाकिस्तान की सीमा में आने और बसंतर नदी पर एक पुल बनाने का काम सौंपा गया था। यह पुल सीमा से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित था। मेजर होशियार बाईं ओर की कमान संभाल रहे थे और उन्हें जरपाल गांव पर कब्जा करने का आदेश दिया गया था, जिस पर पाकिस्तानी सेना का कब्जा था। उन्होंने इस क्षेत्र के आसपास बारूदी सुरंगें बिछाई थीं और यहां टैंक और गोला-बारूद तैनात किए थे।दुश्मन सेना कब्जा नहीं करने दे रही थी, फिर कैसे पूरा हुआ मिशन!15 दिसंबर को रात 10 बजे उन्हें नदी पार करके गांव पर कब्जा करने का आदेश मिला। तमाम मुश्किलों के बावजूद, उन्होंने नदी पार की और रात 12 बजे तक उस इलाके पर कब्जा कर लिया। यह बहुत कठिन था क्योंकि दुश्मन सेना भारतीय सेना को इस जगह पर कब्जा नहीं करने दे रही थी और अगर पाकिस्तानी इस जगह को खो देते, तो भारतीय सेना जानती थी कि वे इस पर दोबारा कब्जा करने के लिए जी-जान से लड़ेंगे।केवल 2 घंटे में गांव पर किया कब्जाहोशियार सिंह ने याद करते हुए बताया कि यह इलाका इतने कम समय में अपने कंट्रोल में लेना उनके लिए बहुत दबाव भरा था। उन्हें बताया गया था कि उन्हें 12 बजे तक गांव पर कब्जा करना है, और नदी पर पुल बनाने के लिए उनके पास भोर तक का ही समय था ताकि भारतीय टैंक इलाके में जा सकें। इसी वक्त में उन्हें सभी बारूदी सुरंगों को भी साफ करना था।पाकिस्तानी सेना ने घेर लिया, जवाबी हमले शुरू हुएजरपाल पर कब्जा करने के बाद, पाकिस्तानी सेना ने उन्हें घेर लिया और जवाबी हमले शुरू कर दिए। यहां पाकिस्तानी सेना का पहला हमला 16 दिसंबर को सुबह 8 बजे हुआ। इसके तुरंत बाद, उन्होंने अपने टैंकों से हमला किया। अगला हमला दोपहर 12 बजे और भी अधिक टैंकों के साथ हुआ। इसके बाद, शाम 4 बजे, पाकिस्तानी सेना ने फिर से अपने टैंकों से हमला किया। उन्होंने बताया, 'लगातार तीन टैंक हमले हुए और हम 40-45 दुश्मन टैंकों को खत्म करने में कामयाब रहे। इसी टैंक हमले के दौरान सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल शहीद हो गए।'पाकिस्तानी सेना के 300 से 350 सैनिक शहीद हुएमेजर होशियार ने याद किया कि 16-17 दिसंबर को पाकिस्तान ने और अधिक सेना भेजी और भारतीय सेना पर दो तरफ से हमला किया। एक तरफ से टैंकों से और दूसरी तरफ से पैदल सेना से हमला किया जा रहा था। उन्होंने याद करते हुए बताया, 'इसमें भी उन्होंने बड़ी मार खाई। पाकिस्तानी सेना के 300-350 सैनिक शहीद हो गए। इस लड़ाई में पाकिस्तानी सेना के कई टैंक भी नष्ट हो गए।' होशियार ने आगे बताया कि उन्होंने 97 पाकिस्तानी सैनिकों के शव इकट्ठा किए जो उन्हें सौंपे गए थे। इसी लड़ाई में वो भी घायल हुए थे।होशियार सिंह की रिटायरमेंट और निधनउन्होंने याद किया कि 18 दिसंबर को पाकिस्तान का एक ब्रिगेड कमांडर सफेद झंडा लहराते हुए आया। उसने पाकिस्तानी सैनिकों के शव मांगे और घोषणा की कि वे अब पीछे हट रहे हैं। इस समय तक दोनों सरकारों की तरफ से युद्धविराम की घोषणा हो चुकी थी। मेजर होशियार सिंह ने बताया कि युद्धविराम के बाद भारतीय ब्रिगेड कमांडर भी आए और उन्होंने मैदान का जायजा लिया, जबकि होशियार घायल पड़े थे। उन्हें बताया गया कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। होशियार सिंह 1988 में भारतीय सेना से रिटायर हुए। 1998 में 61 की उम्र में उनका निधन हो गया। View this post on Instagram A post shared by VarunDhawan होशियार सिंह की पत्नी और बेटे से मिले वरुण धवनबता दें कि 'बॉर्डर 2' अगले हफ्ते ही रिलीज होने वाली है। 23 जनवरी को फिल्म गणतंत्र दिवस के पहले सिनेमाघरों में आएगी। वरुण धवन जोर-शोर से इसके प्रमोशन में जुटे हैं। वो मेजर होशियार सिंह की पत्नी और बेटे से मिले थे। उनकी पत्नी धनो देवी के कदमों में बैठकर वरुण ने उन्हें प्रणाम किया और बेटे से भी बातचीत की। इसकी झलक उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर शेयर की थी।.
सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी की आगामी फिल्म 'बॉर्डर 2' कुछ ही दिनों में 23 जनवरी को रिलीज होने वाली है। यह फिल्म 1997 में आई फिल्म 'बॉर्डर' का सीक्वल है, जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान हुए लोंगेवाला वॉर पर आधारित थी। अब नए पार्ट यानी 'बॉर्डर 2' को लेकर चर्चा है कि इस फिल्म में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध पर ध्यान दिया जाएगा। युद्ध के दौरान देश की रक्षा के लिए दुश्मन पर हमला करते हुए सेना, नौसेना और वायु सेना तीनों को दिखाया जाएगा। इसमें वरुण धवन मेजर होशियार सिंह का किरदार निभा रहे हैं, जिनकी बहादुरी के किस्से हर किसी को जानना चाहिए। उनकी वीरता की कहानी आपको भी भावनाओं से भर देगी।वरुण धवन ने 3 ग्रेनेडियर्स के मेजर होशियार सिंह दहिया का रोल प्ले किया है, जिन्हें युद्ध के दौरान उनकी वीरता के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। होशियार सिंह ने एक पुराने इंटरव्यू में बसंतर के युद्ध के दौरान घटी घटनाओं को याद किया था, जिसमें उन्होंने घायल होने के बावजूद लड़ाई लड़ी और सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया। इसी युद्ध में द्वितीय लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल शहीद हो गए थे। अरुण के जीवन पर बेस्ड फिल्म 'इक्कीस' इसी महीने सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।वरुण धवन कर रहे जिस होशियार सिंह का किरदार, वो कौन!1997 में रिकॉर्ड किए गए एक इंटरव्यू में होशियार सिंह ने बसंतर की लड़ाई की कहानी सुनाई, जिसमें कई पाकिस्तानी टैंक नष्ट हो गए और उनके कई सैनिक शहीद हो गए। उन्होंने बताया कि उन्हें पाकिस्तान की सीमा में आने और बसंतर नदी पर एक पुल बनाने का काम सौंपा गया था। यह पुल सीमा से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित था। मेजर होशियार बाईं ओर की कमान संभाल रहे थे और उन्हें जरपाल गांव पर कब्जा करने का आदेश दिया गया था, जिस पर पाकिस्तानी सेना का कब्जा था। उन्होंने इस क्षेत्र के आसपास बारूदी सुरंगें बिछाई थीं और यहां टैंक और गोला-बारूद तैनात किए थे।दुश्मन सेना कब्जा नहीं करने दे रही थी, फिर कैसे पूरा हुआ मिशन!15 दिसंबर को रात 10 बजे उन्हें नदी पार करके गांव पर कब्जा करने का आदेश मिला। तमाम मुश्किलों के बावजूद, उन्होंने नदी पार की और रात 12 बजे तक उस इलाके पर कब्जा कर लिया। यह बहुत कठिन था क्योंकि दुश्मन सेना भारतीय सेना को इस जगह पर कब्जा नहीं करने दे रही थी और अगर पाकिस्तानी इस जगह को खो देते, तो भारतीय सेना जानती थी कि वे इस पर दोबारा कब्जा करने के लिए जी-जान से लड़ेंगे।केवल 2 घंटे में गांव पर किया कब्जाहोशियार सिंह ने याद करते हुए बताया कि यह इलाका इतने कम समय में अपने कंट्रोल में लेना उनके लिए बहुत दबाव भरा था। उन्हें बताया गया था कि उन्हें 12 बजे तक गांव पर कब्जा करना है, और नदी पर पुल बनाने के लिए उनके पास भोर तक का ही समय था ताकि भारतीय टैंक इलाके में जा सकें। इसी वक्त में उन्हें सभी बारूदी सुरंगों को भी साफ करना था।पाकिस्तानी सेना ने घेर लिया, जवाबी हमले शुरू हुएजरपाल पर कब्जा करने के बाद, पाकिस्तानी सेना ने उन्हें घेर लिया और जवाबी हमले शुरू कर दिए। यहां पाकिस्तानी सेना का पहला हमला 16 दिसंबर को सुबह 8 बजे हुआ। इसके तुरंत बाद, उन्होंने अपने टैंकों से हमला किया। अगला हमला दोपहर 12 बजे और भी अधिक टैंकों के साथ हुआ। इसके बाद, शाम 4 बजे, पाकिस्तानी सेना ने फिर से अपने टैंकों से हमला किया। उन्होंने बताया, 'लगातार तीन टैंक हमले हुए और हम 40-45 दुश्मन टैंकों को खत्म करने में कामयाब रहे। इसी टैंक हमले के दौरान सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल शहीद हो गए।'पाकिस्तानी सेना के 300 से 350 सैनिक शहीद हुएमेजर होशियार ने याद किया कि 16-17 दिसंबर को पाकिस्तान ने और अधिक सेना भेजी और भारतीय सेना पर दो तरफ से हमला किया। एक तरफ से टैंकों से और दूसरी तरफ से पैदल सेना से हमला किया जा रहा था। उन्होंने याद करते हुए बताया, 'इसमें भी उन्होंने बड़ी मार खाई। पाकिस्तानी सेना के 300-350 सैनिक शहीद हो गए। इस लड़ाई में पाकिस्तानी सेना के कई टैंक भी नष्ट हो गए।' होशियार ने आगे बताया कि उन्होंने 97 पाकिस्तानी सैनिकों के शव इकट्ठा किए जो उन्हें सौंपे गए थे। इसी लड़ाई में वो भी घायल हुए थे।होशियार सिंह की रिटायरमेंट और निधनउन्होंने याद किया कि 18 दिसंबर को पाकिस्तान का एक ब्रिगेड कमांडर सफेद झंडा लहराते हुए आया। उसने पाकिस्तानी सैनिकों के शव मांगे और घोषणा की कि वे अब पीछे हट रहे हैं। इस समय तक दोनों सरकारों की तरफ से युद्धविराम की घोषणा हो चुकी थी। मेजर होशियार सिंह ने बताया कि युद्धविराम के बाद भारतीय ब्रिगेड कमांडर भी आए और उन्होंने मैदान का जायजा लिया, जबकि होशियार घायल पड़े थे। उन्हें बताया गया कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। होशियार सिंह 1988 में भारतीय सेना से रिटायर हुए। 1998 में 61 की उम्र में उनका निधन हो गया। View this post on Instagram A post shared by VarunDhawan होशियार सिंह की पत्नी और बेटे से मिले वरुण धवनबता दें कि 'बॉर्डर 2' अगले हफ्ते ही रिलीज होने वाली है। 23 जनवरी को फिल्म गणतंत्र दिवस के पहले सिनेमाघरों में आएगी। वरुण धवन जोर-शोर से इसके प्रमोशन में जुटे हैं। वो मेजर होशियार सिंह की पत्नी और बेटे से मिले थे। उनकी पत्नी धनो देवी के कदमों में बैठकर वरुण ने उन्हें प्रणाम किया और बेटे से भी बातचीत की। इसकी झलक उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर शेयर की थी।
बॉर्डर 2 वरुण धवन बॉर्डर 2 में वरुण धवन किसका रोल कर रहे मेजर होशियार सिंह कौन हैं होशियार सिंह बॉर्डर 2 Who Is Major Hoshiar Singh Who Is Major Hoshiar Singh Played By Varun Dhawan Border 2 Border 2 Cast Border 2 Release
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