AI से बढ़ रहा डिप्रेशन का खतरा, अमेरिका में हुई ये स्टडी चौंका देगी

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जो लोग AI चैटबॉट्स का अधिक इस्तेमाल करते हैं, उनमें अवसाद (Depression) और एंग्जायटी (Anxiety) के लक्षण अधिक देखे गए हैं। यह रिसर्च ऑनलाइन सर्वे पर आधारित था, जो 2025 में अप्रैल से मई के बीच किया गया।

नई दिल्ली: आर्टिफिशल इंटेलिजेस टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अमेरिका में हुई बड़ी स्टडी में दावा किया गया है। कि जो लोग AI चैटबॉट्स का अधिक इस्तेमाल करते हैं, उनमें अवसाद और एंग्जायटी के लक्षण अधिक देखे गए हैं। यह स्टडी अमेरिका के प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल JAMA Network Open में 21 जनवरी को छपी है। इस रिसर्च को मेसाचूसिट्स जनरल हॉस्पिटल सहित अन्य अमेरिकी संस्थानों के सहयोग से किया गया है।कैसे हुई रिसर्चरिसर्च में 20,847 अमेरिकी वयस्कों को शामिल किया गया। यह रिसर्च ऑनलाइन सर्वे पर आधारित था, जो 2025 में अप्रैल से मई के बीच किया गया था। सर्वे में प्रतिभागियों से पूछा गया कि वे AI टूल्स का कितनी बार इस्तेमाल करते हैं। साथ ही उनकी मानसिक स्थिति को मापने के लिए PHQ-9 का इस्तेमाल किया गया।क्या सामने आया जो लोग AI का रोजाना या बार-बार उपयोग करते हैं, उनमें लो से मीडियम स्तर के डिप्रेशन के लक्षण ज्यादा देखे गए। ऐसे लोगों में एजायटी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण भी जुड़े हुए दिखे। शोधकर्ताओं ने साफ कहा कि यह स्टडी कारण और परिणाम साबित नहीं करती है।क्यों अहम है स्टडीबहुत बड़ी आबादी को शामिल किया गया। पहली बार AI उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के बीच रिश्ते को वैज्ञानिकतरीके से मापा गया।क्या हैं संकेतAI जिंदगी को आसान बना रहा है, लेकिन यह स्टडी संकेत देती है कि इसके इस्तेमाल को लेकर सजग और संतुलित रहने की जरूरत है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षणों को नजर अंदाज करना ठीक नही है, खासकर तब जब तकनीक रोजमर्रा की आदत बन चुकी है।.

नई दिल्ली: आर्टिफिशल इंटेलिजेस टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के बीच अमेरिका में हुई बड़ी स्टडी में दावा किया गया है। कि जो लोग AI चैटबॉट्स का अधिक इस्तेमाल करते हैं, उनमें अवसाद और एंग्जायटी के लक्षण अधिक देखे गए हैं। यह स्टडी अमेरिका के प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल JAMA Network Open में 21 जनवरी को छपी है। इस रिसर्च को मेसाचूसिट्स जनरल हॉस्पिटल सहित अन्य अमेरिकी संस्थानों के सहयोग से किया गया है।कैसे हुई रिसर्चरिसर्च में 20,847 अमेरिकी वयस्कों को शामिल किया गया। यह रिसर्च ऑनलाइन सर्वे पर आधारित था, जो 2025 में अप्रैल से मई के बीच किया गया था। सर्वे में प्रतिभागियों से पूछा गया कि वे AI टूल्स का कितनी बार इस्तेमाल करते हैं। साथ ही उनकी मानसिक स्थिति को मापने के लिए PHQ-9 का इस्तेमाल किया गया।क्या सामने आया जो लोग AI का रोजाना या बार-बार उपयोग करते हैं, उनमें लो से मीडियम स्तर के डिप्रेशन के लक्षण ज्यादा देखे गए। ऐसे लोगों में एजायटी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण भी जुड़े हुए दिखे। शोधकर्ताओं ने साफ कहा कि यह स्टडी कारण और परिणाम साबित नहीं करती है।क्यों अहम है स्टडीबहुत बड़ी आबादी को शामिल किया गया। पहली बार AI उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य के बीच रिश्ते को वैज्ञानिकतरीके से मापा गया।क्या हैं संकेतAI जिंदगी को आसान बना रहा है, लेकिन यह स्टडी संकेत देती है कि इसके इस्तेमाल को लेकर सजग और संतुलित रहने की जरूरत है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षणों को नजर अंदाज करना ठीक नही है, खासकर तब जब तकनीक रोजमर्रा की आदत बन चुकी है।

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