पूर्वी दिल्ली में इस बार दुर्गा पूजा पंडालों में तकनीक और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मयूर विहार फेज-3 में एक पंडाल को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई से डिजाइन किया गया है। 34 वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही संस्था इस बार एआई की मदद से पंडाल को नया रूप दे रही है। यमुनापार में 38 पंडाल सजेंगे जिनमें ग्रामीण परिवेश की झलक...
आशीष गुप्ता, पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली में दुर्गा पूजा सिर्फ आस्था और संस्कृति का संगम ही नहीं, बल्कि तकनीक की ताकत का चमकता हुआ उदाहरण बनने जा रही है। दुर्गा पूजा में पहली बार परंपरा और आधुनिकता का अनोखा मेल देखने को मिलेगा। अब तक जहां पूजा पंडालों की खूबसूरती शिल्पकारों की मेहनत और कल्पनाओं से निखरती थी। वहीं, अब इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग शुरू किया गया है। मयूर विहार फेज-तीन में बंगीय सांस्कृतिक परिसेबा संस्था ने अपने दुर्गा पूजा पंडाल का डिजाइन एआई से तैयार किया है। इस प्रयोग से भक्ति और संस्कृति के साथ तकनीक की शक्ति और रचनात्मकता का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। यह संस्था 34 वर्ष से दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही है। इनके पंडाल का थीम हर बार अलग होता है, जिससे भक्तों को भक्ति के साथ रचनात्मक देखने को मिलती है। अब जमाना एआई का है तो संस्था ने पंडाल का डिजाइन भी एआई से तैयार किया है। संस्था के अध्यक्ष एसएन पाल ने बताया कि एआई समय की मांग है। ऐसे में भक्ति इससे अछूती नहीं रह सकती। तकनीक और भक्ति, दोनों की शक्ति का प्रचंड रूप दिखाने के लिए पंडाल बनाने में नया प्रयोग कर रहे हैं। संस्था में कई युवा जुड़े हैं, जो एआई की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हीं से पंडाल का डिजिटल माडल बनवाया गया है। संस्था के अनुराग समाजपति ने बताया कि पंडाल में महिशासुर मर्दिनी दुर्गा मां, भगवान गणेश, मां सरस्वती व लक्ष्मी माता की मूर्ति होगी। पंडाल का बाहरी और अंदरूनी सज्जा का डिजाइन एआई से बनाया है। इसमें थ्रीडी का भी जादू रहेगा। लैपटाप में तैयार डिजिटल प्रिंट को धरातल पर उतारने के लिए बंगाल से कारीगरों को बुलाया गया है। यमुनापार में सजेंगे 38 पंडाल मां दुर्गा की आराधना के लिए यमुनापार में 38 पंडाल सजेंगे। इसमें इस बार ग्रामीण परिवेश दिखाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। आइपी एक्सटेंशन में बाल्को अपार्टमेंट के पास डीडीए के आराधना पार्क में इंद्रप्रस्थ मैत्रेयी मंदिर निर्माण समिति पंडाल लगाएगी। इस समिति के अध्यक्ष बिद्युत ठाकुर ने बताया कि पंडाल को ग्रामीण परिवेश का रूप दिया जाएगा। पूर्वांचल बंगीय समिति के अध्यक्ष दुर्गा दास दत्ता ने बताया कि सभी पंडाल ईको फ्रेंडली होंगे। हर पंडाल से पर्यावरण बचाने का संदेश दिया जाएगा। आगामी 26 सितंबर से तीन अक्टूबर तक इसका आयोजन होगा। खूंटी पूजा से शुरू होता है पंडाल बनाने का काम दुर्गा पूजा पंडाल बनाने का काम खूंटी पूजा के साथ शुरू होता है। इसमें बांस की बल्ली जमीन में गाढ़ कर वैदिक मंत्रोच्चरण के साथ पूजा की जाती है। इसी परंपरा के तहत मयूर विहार-तीन स्थित डीडीए ग्राउंड में रविवार को बंगीय ऐक्य संमिलनी की मयूर विहार पूजा समिति ने खूंटी पूजा का दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारी शुरू कर दीं। यह भी पढ़ें- दिल्ली में अनूठी पहल.
.. अब जरूरतमंदों की जिंदगी में होगा उजाला, एक क्लिक में पढ़ें पूरी डिटेल समिती के सचिव तमाल भद्र ने बताया कि इस बार पंडाल की थीम में बंगाल की ग्रामीण संस्कृति और वहां की लुप्त हो रही कला झलकेगी। बंगाल के छऊ नृत्य की छवी पंडाल की शोभा बढ़ाएगी। इसके लिए मीट्टी कला के शिल्पकारों को बंगाल के कृष्णा नगर से बुलाया गया है। एआई के प्रयोग से पंडाल डिजाइनिंग का समय और खर्च दोनों बचे हैं। लोगों को नया अनुभव कराने के लिए तकनीक का उपयोग किया है। - सुदीप कोनेर, कार्यकारिणी सदस्य, बंगीय सांस्कृतिक परिसेबा
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