8th Pay Commission को लेकर विवाद गहरा गया है। कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार 69 लाख पेंशनभोगियों को आयोग के दायरे से बाहर करने की तैयारी में है। इन आरोपों के बीच, स्टाफ बॉडी ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें कर्मचारी संगठन सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखेंगे और पेंशनभोगियों के हितों की रक्षा के लिए दबाव...
8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग की अधिसूचना जारी की थी। अब इसके बाद पहला बड़ा कदम 15 नवंबर को होने जा रहा है। लाखों केंद्रीय कर्मचारियों की तरफ से सरकार से बात करने वाले NC-JCM स्टाफ साइड ने अपनी स्टैंडिंग कमेटी की अहम बैठक दिल्ली में बुलाई है। हालांकि, AIRF जनरल सेक्रेटरी शिवा गोपाल मिश्रा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में एजेंडा साफ नहीं है, लेकिन बैठक में कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स से जुड़ी कई अहम रणनीतियों पर चर्चा होने की पूरी उम्मीद है। क्यों अहम है यह बैठक? सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद यह स्टाफ साइड की पहली रणनीतिक बैठक है। यहीं से तय होगा कि वेतन, पेंशन, भत्तों, सर्विस कंडीशंस और पेंशनर्स की मांगें किस तरह सरकार के सामने रखी जाएंगी। स्टाफ साइड ही वह मान्यता-प्राप्त मंच है जिसके जरिए कर्मचारी और पेंशनर्स अपने हितों की पैरवी करते हैं। यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission: एरियर के लिए करना होगा लंबा इंतजार? 2027-28 नहीं बल्कि इतने साल बाद मिलेगा बढ़ा हुआ पैसा! NC-JCM क्या है और कैसे काम करता है? NC-JCM तीन-स्तरीय सिस्टम है, जिसमें कर्मचारी पक्ष और मंत्रालयों के प्रतिनिधि बातचीत करते हैं। इसमें तीन लेवल पर चर्चा होती है। पहली है- नेशनल काउंसिल, जहां वेतन आयोग जैसे बड़े मुद्दे उठते हैं। दूसरी है- डिपार्टमेंटल काउंसिल और तीसरी है- रीजनल/ऑफिस काउंसिल। स्टाफ साइड में बड़े कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि होते हैं, जिनका काम कर्मचारियों व पेंशनर्स के हितों की रक्षा करना है। 15 नवंबर की बैठक में क्या उठ सकता है? हालांकि पत्र में एजेंडा नहीं लिखा, लेकिन पहले उठाए गए मुद्दों के आधार पर माना जा रहा है कि ये पॉइंट चर्चा में आ सकते हैं। वेतन स्तर में संशोधन पेंशन सुधार DA मर्जर अंतरिम राहत हेल्थ बेनिफिट्स फरवरी में स्टाफ साइड ने सरकार को इन मुद्दों की विस्तृत सूची दी थी, लेकिन इन्हें अंतिम टर्म ऑफ रेफ्रेंस में शामिल नहीं किया गया। इसलिए इस बार इन्हीं छूटे हुए बिंदुओं पर जोर रहने की संभावना है। 69 लाख पेंशनर्स की टेंशन क्यों बढ़ी? ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने हाल ही में सरकार को पत्र लिखकर ToR में कई गंभीर असंगतियों की शिकायत की है। AIDEF ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजे पत्र में कहा है कि, ToR में 8वें वेतन आयोग की तारीख-ए-इम्प्लीमेंटेशन का स्पष्ट जिक्र नहीं है। सबसे बड़ा आरोप है कि ToR में 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन का कोई जिक्र ही नहीं है। फेडरेशन ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित' बताया। AIDEF ने यह भी चेताया कि ToR यह संकेत देता है कि सरकार शायद 10 साल पर होने वाली वेतन आयोग प्रणाली में बदलाव कर सकती है, जबकि 7वें वेतन आयोग में तारीख साफ तौर पर 1 जनवरी 2016 लिखी गई थी। इन सबके बीच माना जा रहा है कि 15 नवंबर को NC-JCM स्टाफ साइड की होने वाली बैठक भले ही अंदरूनी हो, लेकिन इसका असर सीधे कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स पर पड़ेगा। पेंशन रिवीजन शामिल होगा या नहीं, इम्प्लीमेंटेशन डेट क्या होगी, और वेतन संशोधन कैसे आगे बढ़ेगा, इन सब पर स्टाफ साइड को एक मजबूत रणनीति बनानी होगी, ताकि सरकार के साथ होने वाली आधिकारिक बातचीत में उनका पक्ष ठोस रहे।.
8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 3 नवंबर को 8वें वेतन आयोग की अधिसूचना जारी की थी। अब इसके बाद पहला बड़ा कदम 15 नवंबर को होने जा रहा है। लाखों केंद्रीय कर्मचारियों की तरफ से सरकार से बात करने वाले NC-JCM स्टाफ साइड ने अपनी स्टैंडिंग कमेटी की अहम बैठक दिल्ली में बुलाई है। हालांकि, AIRF जनरल सेक्रेटरी शिवा गोपाल मिश्रा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में एजेंडा साफ नहीं है, लेकिन बैठक में कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स से जुड़ी कई अहम रणनीतियों पर चर्चा होने की पूरी उम्मीद है। क्यों अहम है यह बैठक? सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद यह स्टाफ साइड की पहली रणनीतिक बैठक है। यहीं से तय होगा कि वेतन, पेंशन, भत्तों, सर्विस कंडीशंस और पेंशनर्स की मांगें किस तरह सरकार के सामने रखी जाएंगी। स्टाफ साइड ही वह मान्यता-प्राप्त मंच है जिसके जरिए कर्मचारी और पेंशनर्स अपने हितों की पैरवी करते हैं। यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission: एरियर के लिए करना होगा लंबा इंतजार? 2027-28 नहीं बल्कि इतने साल बाद मिलेगा बढ़ा हुआ पैसा! NC-JCM क्या है और कैसे काम करता है? NC-JCM तीन-स्तरीय सिस्टम है, जिसमें कर्मचारी पक्ष और मंत्रालयों के प्रतिनिधि बातचीत करते हैं। इसमें तीन लेवल पर चर्चा होती है। पहली है- नेशनल काउंसिल, जहां वेतन आयोग जैसे बड़े मुद्दे उठते हैं। दूसरी है- डिपार्टमेंटल काउंसिल और तीसरी है- रीजनल/ऑफिस काउंसिल। स्टाफ साइड में बड़े कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि होते हैं, जिनका काम कर्मचारियों व पेंशनर्स के हितों की रक्षा करना है। 15 नवंबर की बैठक में क्या उठ सकता है? हालांकि पत्र में एजेंडा नहीं लिखा, लेकिन पहले उठाए गए मुद्दों के आधार पर माना जा रहा है कि ये पॉइंट चर्चा में आ सकते हैं। वेतन स्तर में संशोधन पेंशन सुधार DA मर्जर अंतरिम राहत हेल्थ बेनिफिट्स फरवरी में स्टाफ साइड ने सरकार को इन मुद्दों की विस्तृत सूची दी थी, लेकिन इन्हें अंतिम टर्म ऑफ रेफ्रेंस में शामिल नहीं किया गया। इसलिए इस बार इन्हीं छूटे हुए बिंदुओं पर जोर रहने की संभावना है। 69 लाख पेंशनर्स की टेंशन क्यों बढ़ी? ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने हाल ही में सरकार को पत्र लिखकर ToR में कई गंभीर असंगतियों की शिकायत की है। AIDEF ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजे पत्र में कहा है कि, ToR में 8वें वेतन आयोग की तारीख-ए-इम्प्लीमेंटेशन का स्पष्ट जिक्र नहीं है। सबसे बड़ा आरोप है कि ToR में 69 लाख पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की पेंशन रिवीजन का कोई जिक्र ही नहीं है। फेडरेशन ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित' बताया। AIDEF ने यह भी चेताया कि ToR यह संकेत देता है कि सरकार शायद 10 साल पर होने वाली वेतन आयोग प्रणाली में बदलाव कर सकती है, जबकि 7वें वेतन आयोग में तारीख साफ तौर पर 1 जनवरी 2016 लिखी गई थी। इन सबके बीच माना जा रहा है कि 15 नवंबर को NC-JCM स्टाफ साइड की होने वाली बैठक भले ही अंदरूनी हो, लेकिन इसका असर सीधे कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स पर पड़ेगा। पेंशन रिवीजन शामिल होगा या नहीं, इम्प्लीमेंटेशन डेट क्या होगी, और वेतन संशोधन कैसे आगे बढ़ेगा, इन सब पर स्टाफ साइड को एक मजबूत रणनीति बनानी होगी, ताकि सरकार के साथ होने वाली आधिकारिक बातचीत में उनका पक्ष ठोस रहे।
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