3 साल में 2 कुंभ, एक अर्धकुंभ लगेगा: प्रयागराज से 3 हजार करोड़ ज्यादा उज्जैन सिंहस्थ में खर्च होंगे; आग बुझा...

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3 साल में 2 कुंभ, एक अर्धकुंभ लगेगा: प्रयागराज से 3 हजार करोड़ ज्यादा उज्जैन सिंहस्थ में खर्च होंगे; आग बुझा...
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Uttar Pradesh (UP) Prayagraj Mahakumbh 2025; Follow Uttarakhand Haridwar Ardh Kumbh, Maharashtra Nashik Kumbh, Madhya Pradesh Ujjain Simhastha Infrastructure, Safety, Budget Allotment, Preparations Updates On Dainik Bhaskar (दैनिक भास्कर) । इसी साल नासिक में गोदावरी के किनारे 17 जुलाई से 17 अगस्त के बीच कुंभ होगा। फिर इसके अगले साल यानी 2028 में...

प्रयागराज से 3 हजार करोड़ ज्यादा उज्जैन सिंहस्थ में खर्च होंगे; आग बुझाने बिछेगी पाइपलाइनप्रयागराज महाकुंभ के बाद 3 साल में नासिक, उज्जैन में सिंहस्थ और हरिद्वार में अर्धकुंभ लगना है। इन तीनों जगहों पर अखाड़ों और नागा संन्यासियों के दर्शन होंगे। प्रयागराज जैसी श्रद्धालुओं की भीड़ तो यहां नहीं उमड़ेगी, लेकिन यहां की सरकारें महाकुंभ जैमध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के अफसरों की टीमें प्रयागराज महाकुंभ पहुंचकर स्टडी कर चुकी हैं। इस स्टडी पर तीनों राज्यों की सरकारें तैयारी कर रही हैं। श्रद्धालुओं की संख्या का एनालिसिस किया जा रहा है। प्रयागराज महाकुंभ में सारे रिकॉर्ड भीड़ के टूटे हैं, लिहाजा इस पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ के मुताबिक सुविधाओं के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेफ्टी फीचर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट अलॉटमेंट किया जा रहा है। सबसे पहले जानिए कब और कहां पर कुंभ या अर्धकुंभ का आयोजन होना है। हरिद्वार में गंगा किनारे 2027 में अर्धकुंभ का आयोजन होगा। यह 6 मार्च से लेकर 14 अप्रैल तक चलेगा। इसी साल नासिक में गोदावरी के किनारे 17 जुलाई से 17 अगस्त के बीच कुंभ होगा। फिर इसके अगले साल यानी 2028 में मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होगा। यह 27 मार्च से 27 मई तक दो महीने चलेगा। पढ़िए तीनों जगहों पर क्या तैयारी चल रही हैं, प्रयागराज महाकुंभ से यहां के अफसर और सरकारों ने क्या कुछ सीखा, जो यहां काम आएगा- ये प्रयागराज महाकुंभ की तस्वीरें हैं। इस बार सारे रिकॉर्ड टूट गए। करीब 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया।42 हजार जवान तैनात होंगे, 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे; सड़कें और ओवरब्रिज अभी से बन रहे प्रयागराज महाकुंभ के बाद उज्जैन के सिंहस्थ की ज्यादा चर्चा होती है। प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर लौटे प्रदेश के अधिकारी अब सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में जुट गए हैं। मध्यप्रदेश के करीब आधा दर्जन अधिकारी तीन चरणों में महाकुंभ मैनेजमेंट की जानकारी लेने पहुंचे थे। प्रयागराज पहुंचे अधिकारियों ने मुख्य रूप से पुलिस डिप्लॉयमेंट, ट्रैफिक, फायर और क्राउड मैनेजमेंट के साथ जल पुलिस और रेस्क्यू के लिए ड्रोन की व्यवस्था को करीब से समझा है। महाकाल की नगरी उज्जैन में तीन साल बाद 2028 में शिप्रा नदी पर सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होगा। सिंहस्थ कुंभ मेला 27 मार्च 2028 से 27 मई 2028 तक है। इस दौरान 9 अप्रैल से 8 मई की तारीखों के बीच 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान प्रस्तावित हैं। कुंभ मेले में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया है। दो महीने लंबे इस पर्व का आयोजन करने में लगभग 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इससे पहले साल 2016 में सिंहस्थ का आयोजन हुआ था। जिसमें करीब सात करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी।इस बार शाही स्नान में 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसे देखते हुए अधिकारी अभी से तैयारियों में जुट गए हैं ताकि सामान्य दिनों व पर्वों पर भी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल सकें। सूत्रों के मुताबिक सिंहस्थ कुंभ में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी तक ज्यादा पैदल न चलना पड़े, इस देखते हुए सभी पार्किंग और व्यवस्थाएं बनाई जा जाएंगी।सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में 3 हजार करोड़ से अधिक के काम चल रहे हैं। इसके साथ ही करीब 1500 करोड़ के कार्य प्रस्तावित भी है। जिन्हें 2028 से पहले करने का लक्ष्य रखा गया है। शिप्रा नदी में स्नान के लिए 29 किलोमीटर तक नए घाटों का निर्माण किया जाएगा। उज्जैन कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर कई बैठकों का दौर हो चुका है। सीएम से लेकर एसीएस स्तर के अधिकारी खुद उज्जैन पहुंचकर कुंभ को लेकर चल रहे कार्यों और प्रस्तावित कार्य की जानकारी ले चुके है। 2 फरवरी को अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा उज्जैन संभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित कर चुके हैं।सिंहस्थ कुंभ दो माह तक चलेगा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 42 हजार से अधिक जवान कुंभ मेले के दौरान तैनात रहेंगे। इसके साथ दो नए थाने महाकाल लोक और तपोभूमि पर बनाए जा रहे हैं। इसी के साथ जगह-जगह छोटी-छोटी चौकियां बनाकर सुरक्षा रखी जाएगी।सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है। इस दौरान उज्जैन में सैटेलाइट रेलवे स्टेशनों का विकास किया जाएगा, जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। शिप्रा नदी पर नए पुलों के साथ एनएचएआई द्वारा नए मार्गों का प्रस्ताव रखा गया है। भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने सख्त रणनीति अपनाई है। शाही स्नान के दौरान अधिकतम 15 मिनट दिए जाने का फैसला लिया गया है।सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में जल्द ही एक नई कुंभ नगरी बसने जा रही है। जिसमें इंटर कनेक्टेड चौड़ी सड़कें, डिवाइडर, अंडर ग्राउंड लाइट, अस्पताल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं होंगी। खास बात ये है कि ये सभी निर्माण स्थायी होंगे। यानी कुंभ के बाद इन्हें तोड़ा नहीं जाएगा। लैंड पुलिंग से करीब 2378 हेक्टेयर जमीन पर उज्जैन विकास प्राधिकरण नई कुंभ नगरी बसाएगा। मध्य प्रदेश में इस तरह की यह पहली योजना है। जिस पर करीब 2000 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। दरअसल, सिंहस्थ-2028 को लेकर सरकार ने इस बार सिंहस्थ मेला क्षेत्र को स्थायी रूप से विकसित करने का प्लान तैयार किया है। जिससे हर 12 साल में सिंहस्थ की तैयारियों पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए बचेंगे।उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि प्रयागराज कुंभ मेला अधिकारी और कलेक्टर से मिलकर जानकारी जुटाई गई कि उन्होंने कब से मेले की व्यवस्था बनानी शुरू की थी। उनकी मेजर प्रायोरिटी क्या-क्या थी। उसकी सूची हम लोगों ने ली है। हमारे यहां जो मेजर प्रायोरिटी है वो प्रयागराज के सिमिलर ही है। पानी, साफ-सफाई, शहर का सेनिटेशन, शहर की सुंदरता उनकी टाइमलाइन वैसी ही बनाई गई है। उज्जैन कुंभ को देखते हुए हमने 4 साल पहले ही तैयारियां शुरू कर दीं।आईजी उमेश जोगा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में लर्निंग पॉइंट्स के लिए हम लोग तीन चरणों में गए थे। सबसे पहले दिसंबर में डीआईजी, कलेक्टर, कमिश्नर सहित अन्य अधिकारी वहां पहुंचे थे। दूसरी बार हम लोग गए। इस दौरान मुख्य रूप से पुलिस डिप्लॉयमेंट, ट्रैफिक, फायर और क्राउड मैनेजमेंट के साथ जल पुलिस और रेस्क्यू ड्रोन की व्यवस्था को करीब से समझा। पुलिस का प्रशिक्षण कैसा हो, यह भी लर्निंग का हमारा पॉइंट था। इसी प्रकार उज्जैन की पुलिस को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि उज्जैन कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। प्रयागराज में किस तरह से इंटेलिजेंट का उपयोग किया गया। साइबर टेक्नोलॉजी सहित आधुनिक उपकरणों का उपयोग। प्रयागराज की भौगोलिक स्थिति अलग है। उज्जैन में काफी हद तक रहवासी इलाके में मेला होगा। जबकि प्रयागराज में पूरा इलाका मैदान नुमा है। रेलवे स्टेशन से आने वाले श्रद्धालुओं और एयरपोर्ट से उज्जैन तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के रास्तों की जानकारी और उन्हें सभी मार्गों में किस तरह से व्यवस्थाएं लगानी है इस पर भी मंथन चल रहा है।प्रयागराज कुंभ में तीन से चार बार आग लगी थी। उज्जैन में होने वाला कुंभ गर्मी के सीजन में होगा। जिसके चलते यहां भी इसके बचाव के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। उनकी व्यवस्थाओं की स्टडी की गई है। जैसे फायर स्टेशन, पुलिस के रुकने का स्थान और दूसरी अन्य व्यवस्थाओं को एक साथ मर्ज किया गया था। जिसमें कम्युनिकेशन बहुत इजी हो जाता है। तत्काल मौके पर पहुंचकर आपातकाल की घटना में एक साथ टीम रेस्क्यू शुरू कर सकती है। प्रयागराज कुंभ में एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम भी बनाया गया था। जैसे भीड़ नियंत्रण के लिए पर स्क्वायर मीटर में कितने श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, उसका अलर्ट भी मिलता रहा। उसके आधार पर कब श्रद्धालुओं को किधर निकलना, किस रोड पर उनको डायवर्ट करना, यह सब कुछ पता चला सका। अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा के मुताबिक, आपदा प्रबंधन के लिए अधिकतम रिस्पांस समय 15 मिनट रहेगा। आग लगने की घटनाओं को तत्काल रूप से रोकने के लिए मेला क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाई जाएगी।14 फरवरी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे परिवार के साथ प्रयागराज पहुंचकर महाकुंभ में डुबकी लगाई। डुबकी लगाने के बाद उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। बीते 26 फरवरी को देवेंद्र फडणवीस ने प्रयागराज महाकुंभ के बाद 2027 नासिक में होने वाले कुंभ को लेकर एक बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कहा कि नासिक कुंभ मेला 2027 हाईटेक होगा। फडणवीस ने सीएम योगी को बधाई देते हुए कहा था- यह सिर्फ महाकुंभ नहीं था, यह प्रौद्योगिकी-सक्षम कुंभ था। महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि प्रयागराज महाकुंभ से सबक लेते हुए हमने नासिक कुंभ की योजना बनानी शुरू कर दी है। सीएम फडणवीस की बैठक को लेकर कहा कि सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। रेलवे और नागरिक उड्डयन के अधिकारी भी मौजूद थे। नासिक की सड़कों को चौड़ा करने, नासिक रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्मों की संख्या बढ़ाने और नासिक हवाई अड्डे पर निजी विमानों की पार्किंग पर चर्चा की गई। मंत्री ने आगे बताया कि नासिक रिंग रोड परियोजना के लिए काम शुरू किया गया। प्रयागराज में हमारे 25 अधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने हमारे साथ अपने अनुभव साझा किए। पर्याप्त बजट आवंटित किया जाएगा और हमें उम्मीद है कि नासिक कुंभ में लगभग 15 करोड़ लोग मौजूद रहेंगे। साथ ही प्रयागराज कुंभ की तर्ज पर एक अलग कानून बनाया जाएगा।अर्धकुंभ को लेकर हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा कॉरिडोर के निर्माण में तेजी हरिद्वार में अप्रैल 2027 में होने वाले अर्ध कुंभ को लेकर उत्तराखंड सरकार ने भी तैयारियों पर जोर देना शुरू कर दिया है। 2027 के आयोजन को देखते हुए हरिद्वार और ऋषिकेश में बन रहे गंगा कॉरिडोर के निर्माण में भी तेजी लाई जा रही है। यह बात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताई। सीएम ने बताया कि गंगा कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत गंगा तटों के सुंदरीकरण, घाटों के विस्तार, प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं, इसलिए यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।दैनिक भास्कर की टीम ने प्रयागराज महाकुंभ में सबसे बेहतरीन कवरेज किया। हमने महाकुंभ के हर रंग को दिखाया। पल–पल की अपडेट दी। कुंभ मेले के बसने से लेकर उजड़ने तक की कहानी हमने रीडर्स तक पहुंचाई। दैनिक भास्कर की टीम आने वाले हरिद्वार के अर्धकुंभ, नासिक और उज्जैन के सिंहस्थ की कवरेज इसी तरह से करेगी।महाकुंभ के बाद संगम क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान:7 दिन चलेगा अभियान, अवैध कब्जे और होर्डिंग्स हटेंगे; मोहल्लों की गलियों में चलेगी सफाई मुहिम प्रयागराज में महाकुंभ के समापन के बाद संगम क्षेत्र और आसपास के इलाकों में विशेष सफाई अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान सात दिन तक चलेगा। महापौर उमेश चंद्र ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने मेला क्षेत्र से जुड़े मोहल्लों, पार्किंग स्थलों और सड़कों की सफाई के निर्देश दिए। अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाने का भी आदेश दिया। दोबारा हुए कब्जों के लिए पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा जाएगा।हवा चलने से बढ़ा मेरठ में ठंड का अहसासपंजाब में आज फिर बारिश के आसार.

प्रयागराज से 3 हजार करोड़ ज्यादा उज्जैन सिंहस्थ में खर्च होंगे; आग बुझाने बिछेगी पाइपलाइनप्रयागराज महाकुंभ के बाद 3 साल में नासिक, उज्जैन में सिंहस्थ और हरिद्वार में अर्धकुंभ लगना है। इन तीनों जगहों पर अखाड़ों और नागा संन्यासियों के दर्शन होंगे। प्रयागराज जैसी श्रद्धालुओं की भीड़ तो यहां नहीं उमड़ेगी, लेकिन यहां की सरकारें महाकुंभ जैमध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के अफसरों की टीमें प्रयागराज महाकुंभ पहुंचकर स्टडी कर चुकी हैं। इस स्टडी पर तीनों राज्यों की सरकारें तैयारी कर रही हैं। श्रद्धालुओं की संख्या का एनालिसिस किया जा रहा है। प्रयागराज महाकुंभ में सारे रिकॉर्ड भीड़ के टूटे हैं, लिहाजा इस पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ के मुताबिक सुविधाओं के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेफ्टी फीचर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बजट अलॉटमेंट किया जा रहा है। सबसे पहले जानिए कब और कहां पर कुंभ या अर्धकुंभ का आयोजन होना है। हरिद्वार में गंगा किनारे 2027 में अर्धकुंभ का आयोजन होगा। यह 6 मार्च से लेकर 14 अप्रैल तक चलेगा। इसी साल नासिक में गोदावरी के किनारे 17 जुलाई से 17 अगस्त के बीच कुंभ होगा। फिर इसके अगले साल यानी 2028 में मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होगा। यह 27 मार्च से 27 मई तक दो महीने चलेगा। पढ़िए तीनों जगहों पर क्या तैयारी चल रही हैं, प्रयागराज महाकुंभ से यहां के अफसर और सरकारों ने क्या कुछ सीखा, जो यहां काम आएगा- ये प्रयागराज महाकुंभ की तस्वीरें हैं। इस बार सारे रिकॉर्ड टूट गए। करीब 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया।42 हजार जवान तैनात होंगे, 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे; सड़कें और ओवरब्रिज अभी से बन रहे प्रयागराज महाकुंभ के बाद उज्जैन के सिंहस्थ की ज्यादा चर्चा होती है। प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर लौटे प्रदेश के अधिकारी अब सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में जुट गए हैं। मध्यप्रदेश के करीब आधा दर्जन अधिकारी तीन चरणों में महाकुंभ मैनेजमेंट की जानकारी लेने पहुंचे थे। प्रयागराज पहुंचे अधिकारियों ने मुख्य रूप से पुलिस डिप्लॉयमेंट, ट्रैफिक, फायर और क्राउड मैनेजमेंट के साथ जल पुलिस और रेस्क्यू के लिए ड्रोन की व्यवस्था को करीब से समझा है। महाकाल की नगरी उज्जैन में तीन साल बाद 2028 में शिप्रा नदी पर सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होगा। सिंहस्थ कुंभ मेला 27 मार्च 2028 से 27 मई 2028 तक है। इस दौरान 9 अप्रैल से 8 मई की तारीखों के बीच 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान प्रस्तावित हैं। कुंभ मेले में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया है। दो महीने लंबे इस पर्व का आयोजन करने में लगभग 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इससे पहले साल 2016 में सिंहस्थ का आयोजन हुआ था। जिसमें करीब सात करोड़ श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी।इस बार शाही स्नान में 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसे देखते हुए अधिकारी अभी से तैयारियों में जुट गए हैं ताकि सामान्य दिनों व पर्वों पर भी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से चल सकें। सूत्रों के मुताबिक सिंहस्थ कुंभ में स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी तक ज्यादा पैदल न चलना पड़े, इस देखते हुए सभी पार्किंग और व्यवस्थाएं बनाई जा जाएंगी।सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में 3 हजार करोड़ से अधिक के काम चल रहे हैं। इसके साथ ही करीब 1500 करोड़ के कार्य प्रस्तावित भी है। जिन्हें 2028 से पहले करने का लक्ष्य रखा गया है। शिप्रा नदी में स्नान के लिए 29 किलोमीटर तक नए घाटों का निर्माण किया जाएगा। उज्जैन कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर कई बैठकों का दौर हो चुका है। सीएम से लेकर एसीएस स्तर के अधिकारी खुद उज्जैन पहुंचकर कुंभ को लेकर चल रहे कार्यों और प्रस्तावित कार्य की जानकारी ले चुके है। 2 फरवरी को अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा उज्जैन संभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित कर चुके हैं।सिंहस्थ कुंभ दो माह तक चलेगा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 42 हजार से अधिक जवान कुंभ मेले के दौरान तैनात रहेंगे। इसके साथ दो नए थाने महाकाल लोक और तपोभूमि पर बनाए जा रहे हैं। इसी के साथ जगह-जगह छोटी-छोटी चौकियां बनाकर सुरक्षा रखी जाएगी।सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है। इस दौरान उज्जैन में सैटेलाइट रेलवे स्टेशनों का विकास किया जाएगा, जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। शिप्रा नदी पर नए पुलों के साथ एनएचएआई द्वारा नए मार्गों का प्रस्ताव रखा गया है। भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने सख्त रणनीति अपनाई है। शाही स्नान के दौरान अधिकतम 15 मिनट दिए जाने का फैसला लिया गया है।सिंहस्थ-2028 को देखते हुए उज्जैन में जल्द ही एक नई कुंभ नगरी बसने जा रही है। जिसमें इंटर कनेक्टेड चौड़ी सड़कें, डिवाइडर, अंडर ग्राउंड लाइट, अस्पताल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं होंगी। खास बात ये है कि ये सभी निर्माण स्थायी होंगे। यानी कुंभ के बाद इन्हें तोड़ा नहीं जाएगा। लैंड पुलिंग से करीब 2378 हेक्टेयर जमीन पर उज्जैन विकास प्राधिकरण नई कुंभ नगरी बसाएगा। मध्य प्रदेश में इस तरह की यह पहली योजना है। जिस पर करीब 2000 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है। दरअसल, सिंहस्थ-2028 को लेकर सरकार ने इस बार सिंहस्थ मेला क्षेत्र को स्थायी रूप से विकसित करने का प्लान तैयार किया है। जिससे हर 12 साल में सिंहस्थ की तैयारियों पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए बचेंगे।उज्जैन कलेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि प्रयागराज कुंभ मेला अधिकारी और कलेक्टर से मिलकर जानकारी जुटाई गई कि उन्होंने कब से मेले की व्यवस्था बनानी शुरू की थी। उनकी मेजर प्रायोरिटी क्या-क्या थी। उसकी सूची हम लोगों ने ली है। हमारे यहां जो मेजर प्रायोरिटी है वो प्रयागराज के सिमिलर ही है। पानी, साफ-सफाई, शहर का सेनिटेशन, शहर की सुंदरता उनकी टाइमलाइन वैसी ही बनाई गई है। उज्जैन कुंभ को देखते हुए हमने 4 साल पहले ही तैयारियां शुरू कर दीं।आईजी उमेश जोगा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में लर्निंग पॉइंट्स के लिए हम लोग तीन चरणों में गए थे। सबसे पहले दिसंबर में डीआईजी, कलेक्टर, कमिश्नर सहित अन्य अधिकारी वहां पहुंचे थे। दूसरी बार हम लोग गए। इस दौरान मुख्य रूप से पुलिस डिप्लॉयमेंट, ट्रैफिक, फायर और क्राउड मैनेजमेंट के साथ जल पुलिस और रेस्क्यू ड्रोन की व्यवस्था को करीब से समझा। पुलिस का प्रशिक्षण कैसा हो, यह भी लर्निंग का हमारा पॉइंट था। इसी प्रकार उज्जैन की पुलिस को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि उज्जैन कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। प्रयागराज में किस तरह से इंटेलिजेंट का उपयोग किया गया। साइबर टेक्नोलॉजी सहित आधुनिक उपकरणों का उपयोग। प्रयागराज की भौगोलिक स्थिति अलग है। उज्जैन में काफी हद तक रहवासी इलाके में मेला होगा। जबकि प्रयागराज में पूरा इलाका मैदान नुमा है। रेलवे स्टेशन से आने वाले श्रद्धालुओं और एयरपोर्ट से उज्जैन तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के रास्तों की जानकारी और उन्हें सभी मार्गों में किस तरह से व्यवस्थाएं लगानी है इस पर भी मंथन चल रहा है।प्रयागराज कुंभ में तीन से चार बार आग लगी थी। उज्जैन में होने वाला कुंभ गर्मी के सीजन में होगा। जिसके चलते यहां भी इसके बचाव के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। उनकी व्यवस्थाओं की स्टडी की गई है। जैसे फायर स्टेशन, पुलिस के रुकने का स्थान और दूसरी अन्य व्यवस्थाओं को एक साथ मर्ज किया गया था। जिसमें कम्युनिकेशन बहुत इजी हो जाता है। तत्काल मौके पर पहुंचकर आपातकाल की घटना में एक साथ टीम रेस्क्यू शुरू कर सकती है। प्रयागराज कुंभ में एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम भी बनाया गया था। जैसे भीड़ नियंत्रण के लिए पर स्क्वायर मीटर में कितने श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, उसका अलर्ट भी मिलता रहा। उसके आधार पर कब श्रद्धालुओं को किधर निकलना, किस रोड पर उनको डायवर्ट करना, यह सब कुछ पता चला सका। अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा के मुताबिक, आपदा प्रबंधन के लिए अधिकतम रिस्पांस समय 15 मिनट रहेगा। आग लगने की घटनाओं को तत्काल रूप से रोकने के लिए मेला क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाई जाएगी।14 फरवरी को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे परिवार के साथ प्रयागराज पहुंचकर महाकुंभ में डुबकी लगाई। डुबकी लगाने के बाद उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्थाओं को लेकर योगी आदित्यनाथ की तारीफ की। बीते 26 फरवरी को देवेंद्र फडणवीस ने प्रयागराज महाकुंभ के बाद 2027 नासिक में होने वाले कुंभ को लेकर एक बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कहा कि नासिक कुंभ मेला 2027 हाईटेक होगा। फडणवीस ने सीएम योगी को बधाई देते हुए कहा था- यह सिर्फ महाकुंभ नहीं था, यह प्रौद्योगिकी-सक्षम कुंभ था। महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि प्रयागराज महाकुंभ से सबक लेते हुए हमने नासिक कुंभ की योजना बनानी शुरू कर दी है। सीएम फडणवीस की बैठक को लेकर कहा कि सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। रेलवे और नागरिक उड्डयन के अधिकारी भी मौजूद थे। नासिक की सड़कों को चौड़ा करने, नासिक रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्मों की संख्या बढ़ाने और नासिक हवाई अड्डे पर निजी विमानों की पार्किंग पर चर्चा की गई। मंत्री ने आगे बताया कि नासिक रिंग रोड परियोजना के लिए काम शुरू किया गया। प्रयागराज में हमारे 25 अधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने हमारे साथ अपने अनुभव साझा किए। पर्याप्त बजट आवंटित किया जाएगा और हमें उम्मीद है कि नासिक कुंभ में लगभग 15 करोड़ लोग मौजूद रहेंगे। साथ ही प्रयागराज कुंभ की तर्ज पर एक अलग कानून बनाया जाएगा।अर्धकुंभ को लेकर हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा कॉरिडोर के निर्माण में तेजी हरिद्वार में अप्रैल 2027 में होने वाले अर्ध कुंभ को लेकर उत्तराखंड सरकार ने भी तैयारियों पर जोर देना शुरू कर दिया है। 2027 के आयोजन को देखते हुए हरिद्वार और ऋषिकेश में बन रहे गंगा कॉरिडोर के निर्माण में भी तेजी लाई जा रही है। यह बात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताई। सीएम ने बताया कि गंगा कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत गंगा तटों के सुंदरीकरण, घाटों के विस्तार, प्रकाश व्यवस्था और आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचते हैं, इसलिए यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।दैनिक भास्कर की टीम ने प्रयागराज महाकुंभ में सबसे बेहतरीन कवरेज किया। हमने महाकुंभ के हर रंग को दिखाया। पल–पल की अपडेट दी। कुंभ मेले के बसने से लेकर उजड़ने तक की कहानी हमने रीडर्स तक पहुंचाई। दैनिक भास्कर की टीम आने वाले हरिद्वार के अर्धकुंभ, नासिक और उज्जैन के सिंहस्थ की कवरेज इसी तरह से करेगी।महाकुंभ के बाद संगम क्षेत्र में विशेष सफाई अभियान:7 दिन चलेगा अभियान, अवैध कब्जे और होर्डिंग्स हटेंगे; मोहल्लों की गलियों में चलेगी सफाई मुहिम प्रयागराज में महाकुंभ के समापन के बाद संगम क्षेत्र और आसपास के इलाकों में विशेष सफाई अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान सात दिन तक चलेगा। महापौर उमेश चंद्र ने अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने मेला क्षेत्र से जुड़े मोहल्लों, पार्किंग स्थलों और सड़कों की सफाई के निर्देश दिए। अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाने का भी आदेश दिया। दोबारा हुए कब्जों के लिए पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखा जाएगा।हवा चलने से बढ़ा मेरठ में ठंड का अहसासपंजाब में आज फिर बारिश के आसार

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माघी पूर्णिमा पर प्रयागराज में श्रद्धालुओं का जनसैलाबमाघी पूर्णिमा पर प्रयागराज में श्रद्धालुओं का जनसैलाबमाघी पूर्णिमा पर प्रयागराज में महाकुंभ मेले में 73 लाख 60 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है।
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उज्जैन सिंहस्थ कुंभ में होगी प्रयागराज से ज्यादा भीड़, साधु संतों ने दी प्रशासन को चेतावनी!उज्जैन सिंहस्थ कुंभ में होगी प्रयागराज से ज्यादा भीड़, साधु संतों ने दी प्रशासन को चेतावनी!ujjain simhastha kumbh mela 2028: उज्जैन सिंहस्थ कुंभ की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं. शिप्रा नदी का निरीक्षण करने पहुंचे संतों ने बहता नाला देख प्रशासन पर नाराजगी जताई और इसे जल्द से जल्द बंद करने की चेतावनी दी है.
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12 KM का सफर मिनटों में...हिमाचल में बनेगा एक और रोपवे, 80 करोड़ होंगे खर्चM12 KM का सफर मिनटों में...हिमाचल में बनेगा एक और रोपवे, 80 करोड़ होंगे खर्चMRopeway: 12 KM का सफर मिनटों में...हिमाचल में बनेगा एक और रोपवे, 80 करोड़ रुपये होंगे खर्च
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10 साल में केंद्र सरकार ने अदालती मामलों में 400 करोड़ रुपये से अधिक ख़र्च किए10 साल में केंद्र सरकार ने अदालती मामलों में 400 करोड़ रुपये से अधिक ख़र्च किएHindi News (हिंदी न्यूज़): Latest News in Hindi हिन्दी समाचार लेटेस्ट न्यूज़ इन हिंदी, The Wire Hindi
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नासिक, हरिद्वार और उज्जैन... प्रयागराज के बाद कब-कहां लगेंगे कुंभ मेले? जानिए सबकुछनासिक, हरिद्वार और उज्जैन... प्रयागराज के बाद कब-कहां लगेंगे कुंभ मेले? जानिए सबकुछहर 12 साल बाद कुंभ और छह साल बाद अर्ध कुंभ का आयोजन किया जाता है। 144 साल बाद महाकुंभ होता है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इस बार महाकुंभ का आयोजन हुआ है। दो साल बाद यानी 2027 में अगला कुंभ पड़ेगा। इसी साल एक अर्ध कुंभ भी पड़ रहा है। दोनों आयोजन अलग-अलग राज्यों में होंगे। सरकारों ने अभी से तैयारी शुरू कर दी...
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