उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एमिटी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी सिर्फ डिग्री देना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण करना भी है। उन्होंने कुलपतियों से नई शिक्षा नीति को गंभीरता से अपनाने और छात्रों को नवाचार के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। धनखड़ ने ज्ञान के समान वितरण के लिए...
चेतना राठौर, नोएडा। विश्वविद्यालय सिर्फ डिग्री थमाने के लिए नहीं हैं, इन पर राष्ट्र निर्माण की भी जिम्मेदारी है। एमिटी विश्वविद्यालय में सोमवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन के शुभारंभ पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने यह बात कही। मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कुलपतियों को शिक्षा के प्रति गंभीरता से काम करना होगा। नई शिक्षा नीति को उन्हें खुद बेहतर ढंग से समझना होगा और छात्रों को भी उतनी ही गंभीरता से नई शिक्षा नीति को ग्रहण करना होगा। धनखड़ ने कुलपतियों के लिए आयोजित सम्मेलन के मंच से भी एक बार फिर एक विधान, एक निशान और एक प्रधान की बात को बल दिया। कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिबद्धता से कश्मीर धारा 370 से मुक्त हुआ। इससे वहां के लोगों और छात्रों को मौलिक अधिकार मिल सके। अब तेजी से जम्मू कश्मीर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने छात्रों को नई शिक्षा नीति से परिचित कराने की अपील की। डा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर भी याद का कुलपतियों को जिम्मेदारियों का और बोध कराते हुए संदेश दिया कि विद्यार्थी हमेशा अर्जुन रहें और कुलपति कृष्ण, क्योंकि आप उनके जीवन रथ को चला रहे हैं। कुलपति मंथन करें। अपने ज्ञान से ऐसे नवाचार कराए, जो देश और नागरिकों के जीवन में उपयोगी बन सकें। उपराष्ट्रपति ने ग्रीनफील्ड संस्थाएं बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अभी तक शैक्षणिक संस्थाएं ब्राउनफील्ड हैं, यानी विकसित क्षेत्रों में स्थापित हैं। हमें ग्रीनफील्ड संस्थाएं बनानी होंगी। ऐसी संस्थाएं ही ज्ञान के समान वितरण को सुनिश्चित कर सकती हैं। कई स्थान ऐसे हैं जो इन संस्थाओं के विकास से अछूते हैं। बड़ी संख्या में लोग दूरी के कारण इन लाभों से वंचित हैं। उन क्षेत्रों में ग्रीनफील्ड संस्थाएं स्थापित करें जो अब तक इनसे लाभान्वित नहीं हो पाए हैं। छात्रों को बताना होगा कि नई शिक्षा नीति देश के विकास की नई गाथा गढ़ने में कितने मायने रखती है। देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए कितनी उपयोगी है। शिक्षा ही असमानता को दूर करने का सबसे बड़ा औजार है। उपराष्ट्रपति ने आइटी इंडस्ट्री और स्कूल शिक्षा में बेहतर काम करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को सराहा। उन्होंने कहा कि शोध सिर्फ अकादमिक श्रेष्ठता के लिए नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में बदलाव के उद्देश्य से हों। शिक्षा देश में समानता लाती है, लोकतंत्र को प्राण देती है, देश का निर्माण करती है। अब समय आ गया है कि भारत को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने चाहिए, इनकी स्थापना न सिर्फ पढ़ाने के लिए बल्कि अग्रणी बनने के लिए हो। 19 देशों के 300 विश्वविद्यालयों के 200 कुलपतियों ने सम्मेलन में लिया हिस्सा यह आयोजन भारतीय विश्वविद्यालय संघ द्वारा संघ की उत्कृष्टता के 99 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया। सम्मेलन में 19 देशों से 300 विश्वविद्यालयों के कुलपति आफलाइन और 200 कुलपति आनलाइन शामिल हुए। उपराष्ट्रपति, भारत की सदियों पुरानी शिक्षा पद्धति की विशेषताओं और वैश्विक स्तर पर उस शिक्षा के प्रति छात्रों की रुचि के जरिये कुलपतियों में जोश भरने का भी प्रयास करते नजर आए। उन्होंने कहा कि हमारे पास तक्षशिला जैसा प्राचीन विश्वविद्यालय रहा, जो सिर्फ चाणक्य के लिए ही नहीं बल्कि अपने गहन ज्ञान के भंडार के लिए प्रसिद्ध है। भारतीय प्राचीन विश्वविद्यालय से निकले शिक्षाविदों ने पूरे विश्व को राह दिखाई। इसी को ध्यान में रख नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत सरकार द्वारा देश की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने और सुधारने के लिए लाई गई है। उन्होंने धरातल पर उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं मिलने को लेकर चिंता जताते हुए कुलपतियों को चेताया कि सिर्फ डिग्री तक ही छात्रों को सीमित न करें बल्कि उन्हें ऐसे शिक्षित करें कि वे नए विचारों और नवाचारों को उत्पन्न करें, क्योंकि नए विचारों से ही सकारात्मक बदलाव आते हैं। इस मौके पर एआइयू काफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया। सम्मेलन में पहले दिन हुए आठ सत्र इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ मंच पर एमिटी शिक्षण समूह के संस्थापक अध्यक्ष डॉ.
अशोक कुमार चौहान, उत्तर प्रदेश सरकार के आइटी और इलेक्ट्रानिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा, गौतमबुद्धनगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा, भारतीय विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक, एआईयू की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल पर आसीन रहे। उच्च शिक्षा संस्थानों में राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना विषय पर राज्यसभा सदस्य डा. सुधांशु त्रिवेदी का विशेष संबोधन भी हुआ। सम्मेलन के पहले दिन आठ से अधिक सत्र हुए, जिसमें विभिन्न देशों और राज्यों से आए कुलपतियों ने ‘भविष्य की उच्च शिक्षा की परिकल्पना में भारत की निर्णायक भूमिका’ विषय पर विचार रखे।
New Education Policy 2020 Reforms Vice President Jagdeep Dhankhar Education Role Of Universities In Nation Building Greenfield Educational Institutions Indian Higher Education Future Amity University Conference Highlights Indian Universities Association AIU
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