Operation Sindhu: ईरान में भारतीय छात्र ज्यादातर मेडिकल एजुकेशन हासिल करने के लिए जाते हैं। इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष की वजह से भारतीय छात्र यहां फंस गए हैं।
Indians Evacuation From India: 'चारों तरफ धमाकों की आवाज थी। हमें लगा हम मारे जाएंगे। हमें लग रहा था कि ये हमारी आखिरी रात होने वाली है।' ये कहना है सईदा फैजे जैनब का, जो हाल ही में ईरान से लौटी हैं। ईरान में पढ़ाई करने गए भारतीय छात्रों को एक-एक कर सुरक्षित लाया जा रहा है। युद्धग्रस्त मुल्क से लौटने वाले भारतीय छात्रों ने अपने साथ घटित घटनाओं के बारे में बताया है। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके हॉस्टल के पास ही बम गिर रह रहे थे। ईरान से सबसे पहले 110 भारतीयों को 'ऑपरेशन सिंधु' के तहत लाया गया। इसके बाद रविवार को 250 से ज्यादा भारतीय छात्र ईरान से लौटे हैं। छात्रों के साथ-साथ यहां काम करने गए भारतीय नागरिकों को भी स्वदेश लाया जा रहा है। ईरान में 13 जून को हालात बिगड़ने लगे, जब इजरायल ने ईरान के ऊपर हवाई हमले किए। इसके बाद हाल ही में अमेरिका ने भी ईरान के तीन न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले किए हैं। इस वक्त मिडिल ईस्ट में काफी ज्यादा टेंशन बढ़ चुकी है। हॉस्टल के पास गिरी मिसाइलें: भारतीय छात्र मोहसिनअलीपुर, कर्नाटक के रहने वाले सैय्यद मोहसिन रजा भी उन भारतीय छात्रों में शामिल हैं, जो ईरान से सुरक्षित वापस लौटे हैं। मोहसिन ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया, '13 जून को शाम के 3:30 बज रहे थे, मैं उस तारीख को कभी नहीं भूलूंगा, मैं उस समय को कभी नहीं भूलूंगा। हमारे हॉस्टल से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर मिसाइलें दागी गईं। एक धमाके की आवाज आई, जैसे कि बिजली गरज रही हो। पहले तो हमें समझ में नहीं आया कि क्या हुआ था, लेकिन फिर हमें एहसास हुआ कि ये मिसाइल हमला था। हम हैरान थे, हिल गए थे, समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें।'मोहसिन शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी में MBBS कर रहे थे। वह फर्स्ट ईयर में हैं, लेकिन अब उन्हें भारत लौटना पड़ा है। उन्होंने बताया कि वह तेहरान के डिस्ट्रिक्ट 2 में रह रहे थे, जहां पर बमबारी की शुरुआत हुई थी। मोहसिन 22 जून को भारत लौटे हैं। ईरान से लौटने वाले छात्रों ने बताया कि इजरायली हमलों की वजह से तेहरान में इमारतें थर्राने लगीं। सिर्फ इतना ही नहीं, शॉकवेव से दीवारें कांप रही थीं। कई इमारतों की खिड़कियां भी टूट गईं। मिसाइलें और एयर डिफेंस सिस्टम आंखों से देखा: मोहसिन रजाभारतीय छात्र मोहसिन ने आगे बताया, 'हमें लगा कि शायद ये आवाज सेना के वाहनों या उससे मिल जुलती चीज से आई है। लेकिन फिर खिड़कियां टूट गईं। हमारे सामने वाली बिल्डिंग हिल रही थी। हमने ये सब अपनी आंखों से देखा। तब हमें समझ आ गया कि मामला गंभीर है।' उन्होंने आगे बताया, 'हमने सब कुछ देखा, हमने मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम को अपनी आंखों से देखा। उसके बाद, हमने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। हमें पता चला कि तेहरान में एक भारतीय दूतावास है, जो हमारे सबसे नजदीक है, लेकिन हम वहां नहीं जा सकते थे। हमारे पास उनके नंबर थे। हमने उन्हें फोन किया और पूछा कि अब क्या करना है। स्थिति खराब होती जा रही थी'हमें लगा, हमारी जिंदगी की ये आखिरी रात: सईदा फैज जैनब वहीं, तेहरान के डिस्ट्रिक्ट 6 में रहने वाली सईदा फैज जैनब को अपने हॉस्टल में मची अफरातफरी याद है। जहां वह अपनी जान बचाने की उम्मीद के साथ भागकर बेसमेंट में छिप रही थीं। सईद ने बताया, 'चारों तरफ बमबारी और विस्फोटों की आवाजें थीं। हमें अपनी जान बचाने के लिए बेसमेंट में छिपना पड़ा। हमें लगा कि हम मर जाएंगे। हमें लगा ये हमारी जिंदगी की आखिरी रात होगी।' शनिवार तक हालात और भी ज्यादा खराब हो चुके थे। जान बचाने के लिए बेसमेंट में भागते: सईदा फैज जैनबसईदा ने बताया, 'धमाकों की आवाज से हम सो नहीं पा रहे थे। फिर भारतीय दूतावास ने छात्रों को तेहरान से कोम और यज्द जैसे शहरों में भेजना शुरू कर दिया। वे लोग रिस्पांसिव थे। हमने जब भी फोन किया, उन्होंने उठाया। उन्होंने हमें शहर से बाहर करने और रहने में काफी मदद की। हमें 15 दिनों का खाना स्टॉक करने को कहा गया। हम पूरे समय हॉस्टल में ही रहे। जब भी कोई आवाज आती, तो जान बचाने के लिए हम लोग सीधे बेसमेंट में भागते। सबसे खराब चीज ये थी कि कुछ दिनों बाद हमारे व्हाट्सएप और टेलीग्राम ने काम करना बंद कर दिया। हम अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। ये बहुत डरावना समय था।'.
Indians Evacuation From India: 'चारों तरफ धमाकों की आवाज थी। हमें लगा हम मारे जाएंगे। हमें लग रहा था कि ये हमारी आखिरी रात होने वाली है।' ये कहना है सईदा फैजे जैनब का, जो हाल ही में ईरान से लौटी हैं। ईरान में पढ़ाई करने गए भारतीय छात्रों को एक-एक कर सुरक्षित लाया जा रहा है। युद्धग्रस्त मुल्क से लौटने वाले भारतीय छात्रों ने अपने साथ घटित घटनाओं के बारे में बताया है। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके हॉस्टल के पास ही बम गिर रह रहे थे। ईरान से सबसे पहले 110 भारतीयों को 'ऑपरेशन सिंधु' के तहत लाया गया। इसके बाद रविवार को 250 से ज्यादा भारतीय छात्र ईरान से लौटे हैं। छात्रों के साथ-साथ यहां काम करने गए भारतीय नागरिकों को भी स्वदेश लाया जा रहा है। ईरान में 13 जून को हालात बिगड़ने लगे, जब इजरायल ने ईरान के ऊपर हवाई हमले किए। इसके बाद हाल ही में अमेरिका ने भी ईरान के तीन न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले किए हैं। इस वक्त मिडिल ईस्ट में काफी ज्यादा टेंशन बढ़ चुकी है। हॉस्टल के पास गिरी मिसाइलें: भारतीय छात्र मोहसिनअलीपुर, कर्नाटक के रहने वाले सैय्यद मोहसिन रजा भी उन भारतीय छात्रों में शामिल हैं, जो ईरान से सुरक्षित वापस लौटे हैं। मोहसिन ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया, '13 जून को शाम के 3:30 बज रहे थे, मैं उस तारीख को कभी नहीं भूलूंगा, मैं उस समय को कभी नहीं भूलूंगा। हमारे हॉस्टल से सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी पर मिसाइलें दागी गईं। एक धमाके की आवाज आई, जैसे कि बिजली गरज रही हो। पहले तो हमें समझ में नहीं आया कि क्या हुआ था, लेकिन फिर हमें एहसास हुआ कि ये मिसाइल हमला था। हम हैरान थे, हिल गए थे, समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें।'मोहसिन शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी में MBBS कर रहे थे। वह फर्स्ट ईयर में हैं, लेकिन अब उन्हें भारत लौटना पड़ा है। उन्होंने बताया कि वह तेहरान के डिस्ट्रिक्ट 2 में रह रहे थे, जहां पर बमबारी की शुरुआत हुई थी। मोहसिन 22 जून को भारत लौटे हैं। ईरान से लौटने वाले छात्रों ने बताया कि इजरायली हमलों की वजह से तेहरान में इमारतें थर्राने लगीं। सिर्फ इतना ही नहीं, शॉकवेव से दीवारें कांप रही थीं। कई इमारतों की खिड़कियां भी टूट गईं। मिसाइलें और एयर डिफेंस सिस्टम आंखों से देखा: मोहसिन रजाभारतीय छात्र मोहसिन ने आगे बताया, 'हमें लगा कि शायद ये आवाज सेना के वाहनों या उससे मिल जुलती चीज से आई है। लेकिन फिर खिड़कियां टूट गईं। हमारे सामने वाली बिल्डिंग हिल रही थी। हमने ये सब अपनी आंखों से देखा। तब हमें समझ आ गया कि मामला गंभीर है।' उन्होंने आगे बताया, 'हमने सब कुछ देखा, हमने मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम को अपनी आंखों से देखा। उसके बाद, हमने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। हमें पता चला कि तेहरान में एक भारतीय दूतावास है, जो हमारे सबसे नजदीक है, लेकिन हम वहां नहीं जा सकते थे। हमारे पास उनके नंबर थे। हमने उन्हें फोन किया और पूछा कि अब क्या करना है। स्थिति खराब होती जा रही थी'हमें लगा, हमारी जिंदगी की ये आखिरी रात: सईदा फैज जैनब वहीं, तेहरान के डिस्ट्रिक्ट 6 में रहने वाली सईदा फैज जैनब को अपने हॉस्टल में मची अफरातफरी याद है। जहां वह अपनी जान बचाने की उम्मीद के साथ भागकर बेसमेंट में छिप रही थीं। सईद ने बताया, 'चारों तरफ बमबारी और विस्फोटों की आवाजें थीं। हमें अपनी जान बचाने के लिए बेसमेंट में छिपना पड़ा। हमें लगा कि हम मर जाएंगे। हमें लगा ये हमारी जिंदगी की आखिरी रात होगी।' शनिवार तक हालात और भी ज्यादा खराब हो चुके थे। जान बचाने के लिए बेसमेंट में भागते: सईदा फैज जैनबसईदा ने बताया, 'धमाकों की आवाज से हम सो नहीं पा रहे थे। फिर भारतीय दूतावास ने छात्रों को तेहरान से कोम और यज्द जैसे शहरों में भेजना शुरू कर दिया। वे लोग रिस्पांसिव थे। हमने जब भी फोन किया, उन्होंने उठाया। उन्होंने हमें शहर से बाहर करने और रहने में काफी मदद की। हमें 15 दिनों का खाना स्टॉक करने को कहा गया। हम पूरे समय हॉस्टल में ही रहे। जब भी कोई आवाज आती, तो जान बचाने के लिए हम लोग सीधे बेसमेंट में भागते। सबसे खराब चीज ये थी कि कुछ दिनों बाद हमारे व्हाट्सएप और टेलीग्राम ने काम करना बंद कर दिया। हम अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पा रहे थे। ये बहुत डरावना समय था।'
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