Donald Trump on H-1B Visa: व्हाइट हाउस ने H-1B वीजा पर ट्रंप के विचारों को स्पष्ट किया है, जिसमें कहा गया है कि उनका रुख 'अमेरिका फर्स्ट' पर आधारित है। ट्रंप नहीं चाहते कि अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां विदेशी कर्मचारियों द्वारा छीनी जाएं। उनका मानना है कि विदेशी कंपनियां अमेरिका में निवेश करते समय शुरुआत में अपने कर्मचारी ला सकती हैं, लेकिन स्थापित...
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। H-1B वीजा पर सख्त रुख अपनाने के बाद ट्रंप के तेवर अचानक नरम पड़ गए और उन्होंने वीजा की शर्तें रातोंरात बदल दी थीं। वहीं, अब व्हाइट हाउस ने H-1B वीजा पर ट्रंप के विचार सामने रखे हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि H-1B वीजा पर ट्रंप का रुख काफी सामान्य है। वो अमेरिका फर्स्ट में विश्वास रखते हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, ट्रंप नहीं चाहते कि अमेरिकियों की नौकरी छीनी जाए या उनकी जगह पर किसी दूसरे देश के नागरिक को प्राथमिकता दी जाए। अमेरिकी कर्मचारियों को H-1B वीजा से रिप्लेस किया जा रहा था, जिसके कारण ट्रंप को यह फैसला लेना पड़ा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने क्या कहा? कैरोलिन लेविट का कहना है, H-1B वीजा पर ट्रंप का सामान्य विचार है। वो चाहते हैं कि अगर कोई विदेशी कंपनी अमेरिका में अरबों रुपये निवेश कर रही है और अपने साथ बाहर से कर्मचारी लेकर आ रही है, तो शुरुआत में यह ठीक है। कैरोलिन लेविट के अनुसार, कंपनी पूरी तरह से स्थापित होने के बाद ट्रंप चाहते हैं कि वहां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी पर रखा जाए। ट्रंप ने अमेरिका में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों से अपील की है कि अगर वो अमेरिका में बिजनेस कर रहीं हैं, तो बेहतर होगा वो अमेरिकी कर्मचारियों को ही तवज्जो दें। मगर, राष्ट्रपति के इस फैसले को लेकर काफी सारी गलतफहमियां फैल गईं हैं। विदेशी कंपनियों से ट्रंप की अपील लेविट ने आगे कहा,टैरिफ बढ़ाने से लेकर दुनिया के अन्य देशों से व्यापार कम करने जैसे फैसले भी इसी का हिस्सा हैं। इससे हमारे देश को अरबों का फायदा हो रहा है। कई लोग अमेरिकियों को अच्छी सैलरी पर नौकरी दे रहे हैं। ट्रंप ने बढ़ाई H-1B वीजा की फीस बता दें कि ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी थी। हालांकि, बाद में ट्रंप प्रशासन ने इसपर सफाई देते हुए कहा कि यह वन टाइम फीस होगी और यह रकम बार-बार नहीं देनी होगी। वहीं, पुराने H-1B वीजा धारकों पर यह नियम लागू नहीं होगा। ट्रंप के इस फैसले से उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ऐसे में ट्रंप ने सफाई पेश करते हुए कहा कि वो चाहते हैं कौशल युक्त विदेश लोग अमेरिका में आएं और अमेरिकियों को स्किल्स सिखाएं, जिससे हमारे लोगों को ज्यादा से ज्यादा नौकरियां मिलेंगी। यह भी पढ़ें- भारतीय सीमा के पास चीन की नई चाल, तिब्बत में सड़कों और हवाई पट्टियों का तेजी से कर रहा विस्तार.
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। H-1B वीजा पर सख्त रुख अपनाने के बाद ट्रंप के तेवर अचानक नरम पड़ गए और उन्होंने वीजा की शर्तें रातोंरात बदल दी थीं। वहीं, अब व्हाइट हाउस ने H-1B वीजा पर ट्रंप के विचार सामने रखे हैं। व्हाइट हाउस का कहना है कि H-1B वीजा पर ट्रंप का रुख काफी सामान्य है। वो अमेरिका फर्स्ट में विश्वास रखते हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, ट्रंप नहीं चाहते कि अमेरिकियों की नौकरी छीनी जाए या उनकी जगह पर किसी दूसरे देश के नागरिक को प्राथमिकता दी जाए। अमेरिकी कर्मचारियों को H-1B वीजा से रिप्लेस किया जा रहा था, जिसके कारण ट्रंप को यह फैसला लेना पड़ा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने क्या कहा? कैरोलिन लेविट का कहना है, H-1B वीजा पर ट्रंप का सामान्य विचार है। वो चाहते हैं कि अगर कोई विदेशी कंपनी अमेरिका में अरबों रुपये निवेश कर रही है और अपने साथ बाहर से कर्मचारी लेकर आ रही है, तो शुरुआत में यह ठीक है। कैरोलिन लेविट के अनुसार, कंपनी पूरी तरह से स्थापित होने के बाद ट्रंप चाहते हैं कि वहां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी पर रखा जाए। ट्रंप ने अमेरिका में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों से अपील की है कि अगर वो अमेरिका में बिजनेस कर रहीं हैं, तो बेहतर होगा वो अमेरिकी कर्मचारियों को ही तवज्जो दें। मगर, राष्ट्रपति के इस फैसले को लेकर काफी सारी गलतफहमियां फैल गईं हैं। विदेशी कंपनियों से ट्रंप की अपील लेविट ने आगे कहा,टैरिफ बढ़ाने से लेकर दुनिया के अन्य देशों से व्यापार कम करने जैसे फैसले भी इसी का हिस्सा हैं। इससे हमारे देश को अरबों का फायदा हो रहा है। कई लोग अमेरिकियों को अच्छी सैलरी पर नौकरी दे रहे हैं। ट्रंप ने बढ़ाई H-1B वीजा की फीस बता दें कि ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी थी। हालांकि, बाद में ट्रंप प्रशासन ने इसपर सफाई देते हुए कहा कि यह वन टाइम फीस होगी और यह रकम बार-बार नहीं देनी होगी। वहीं, पुराने H-1B वीजा धारकों पर यह नियम लागू नहीं होगा। ट्रंप के इस फैसले से उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। ऐसे में ट्रंप ने सफाई पेश करते हुए कहा कि वो चाहते हैं कौशल युक्त विदेश लोग अमेरिका में आएं और अमेरिकियों को स्किल्स सिखाएं, जिससे हमारे लोगों को ज्यादा से ज्यादा नौकरियां मिलेंगी। यह भी पढ़ें- भारतीय सीमा के पास चीन की नई चाल, तिब्बत में सड़कों और हवाई पट्टियों का तेजी से कर रहा विस्तार
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