प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर पर पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने पर एक भावकु ब्लॉग लिखकर इसके पुनर्निर्माण का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का पुनः खड़ा होना भारत की अदम्य आत्मा का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि सोमनाथ की कहानी विनाश की नहीं, बल्कि राष्ट्र की अटूट जिजीविषा की कहानी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आक्रांताओं द्वारा सोमनाथ मंदिर के बार-बार विध्वंस और इसके पुनर्निर्माण की कहानी पर एक भावुक ब्लॉग लिखा है. भारत के गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर को पहली बार 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के हाथों विध्वंस का सामना करना पड़ा, जिसमें पवित्र ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया था.
इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी , जफर खान और औरंगजेब जैसे मुगल शासकों ने भी हिंदू आस्था के इस प्राचीन केंद्र पर हमले किए. हर विध्वंस के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रयास किए गए. भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर इसका आधुनिक स्वरूप निर्मित हुआ. .stroy-870 .read-more-content ~ div {display: none;} .stroy-870 .read-more-content #tab-link-wrapper-plugin {display: none;} .stroy-870 .read-more-content #live-tv-ico {display: none;}.story-with-main-sec .read-more-content p.edpara {display: none;}और पढ़ेंपीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा, 'सोमनाथ... ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है. भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है. द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है. ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है...सौराष्ट्रे सोमनाथं च...यानी ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है. ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है.'उन्होंने आगे लिखा, 'शास्त्रों में ये भी कहा गया है: सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते। लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥ अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है. मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वो पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है. दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था. वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं. जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था. यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था.' Advertisement पीएम मोदी ने सोमनाथ पर हमले को मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि इतनी बार विध्वंस का सामना करने के एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है. साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे. मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका. संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है. 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे.उन्होंने लिखा कि 1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है. जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है. हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं, ये ऐसा दुःख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है. हम कल्पना कर सकते हैं कि इसका उस दौर में भारत पर और लोगों के मनोबल पर कितना गहरा प्रभाव पड़ा होगा. सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था. ये बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता था. ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी. हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे. Advertisement पीएम मोदी ने लिखा कि सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है. ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है. 1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया. यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था. लेकिन हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया. और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुनः जीवंत किया.उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा, 'महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका. सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, हमारा विश्वास और प्रबल हुआ. उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं की भीतर सांस लेती रही. साल 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है, कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है. वो आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है, वो आज भी हमारी शक्ति का पुंज है. ये हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति को जन्म दिया. उन्होंने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें.' Advertisement प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे, वो अनुभव उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया. 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की. उन्होंने कहा, 'दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे. ये आपको किसी भी संख्या में पढ़ी गई पुस्तकों से अधिक हमारी सभ्यता की गहरी समझ देंगे.' इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है. ये बार बार नष्ट किए गए, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए. पहले की तरह सशक्त. पहले की तरह जीवंत. यही राष्ट्रीय मन है, यही राष्ट्रीय जीवन धारा है. इसका अनुसरण आपको गौरव से भर देता है. इसको छोड़ देने का मतलब है, मृत्यु. इससे अलग हो जाने पर विनाश ही होगा.उन्होंने लिखा, 'ये सर्वविदित है कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया. उन्होंने आगे बढ़कर इस दायित्व के लिए कदम बढ़ाया. 1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई. उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा. अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे. महान सरदार साहब इस ऐतिहासिक दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था. तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे. वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें. उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी. लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया.' Advertisement पीएम मोदी ने लिखा कि सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के.एम. मुंशी जी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है. उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था. सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’, अवश्य पढ़ी जानी चाहिए. जैसा कि मुंशी जी की पुस्तक के शीर्षक से स्पष्ट होता है, हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो आत्मा और विचारों की अमरता में अटूट विश्वास रखती है. हम विश्वास करते हैं- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः. सोमनाथ का भौतिक ढांचा नष्ट हो गया, लेकिन उसकी चेतना अमर रही. इन्हीं विचारों ने हमें हर कालखंड में, हर परिस्थिति में फिर से उठ खड़े होने, मजबूत बनने और आगे बढ़ने का सामर्थ्य दिया है. इन्हीं मूल्यों और हमारे लोगों के संकल्प की वजह से आज भारत पर दुनिया की नजर है. दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है. वो हमारे इनोवेटिव युवाओं में निवेश करना चाहती है. हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारा संगीत और हमारे अनेक पर्व आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं. योग और आयुर्वेद जैसे विषय पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रहे हैं. ये स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दे रहे हैं. आज कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है. Advertisement प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि अनादि काल से सोमनाथ जीवन के हर क्षेत्र के लोगों को जोड़ता आया है. सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य यहां आए थे और कहा जाता है कि प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा, 'भवबीजाङ्कुरजनना रागाद्याः क्षयमुपगता यस्य. अर्थात्, उस परम तत्व को नमन जिसमें सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं. जिसमें राग और सभी विकार शांत हो गए हैं. आज भी दादा सोमनाथ के दर्शन से ऐसी ही अनुभूति होती है. मन में एक ठहराव आ जाता है, आत्मा को अंदर तक कुछ स्पर्श करता है, जो अलौकिक है, अव्यक्त है. 1026 के पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद 2026 में भी सोमनाथ का समुद्र उसी तीव्रता से गर्जना करता है और तट को स्पर्श करती लहरें उसकी पूरी गाथा सुनाती हैं. उन लहरों की तरह सोमनाथ बार-बार उठता रहा है.पीएम मोदी ने लिखा कि अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं. उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है. इतिहास के पन्नों में वे केवल फुटनोट हैं, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है. सोमनाथ हमें ये बताता है कि घृणा और कट्टरता में विनाश की विकृत ताकत हो सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की शक्ति होती है. करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सोमनाथ आज भी आशा का अनंत नाद है. ये विश्वास का वो स्वर है, जो टूटने के बाद भी उठने की प्रेरणा देता है. अगर हजार साल पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर अपने पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है, तो हम हजार साल पहले का समृद्ध भारत भी बना सकते हैं. आइए, इसी प्रेरणा के साथ हम आगे बढ़ते हैं. एक नए संकल्प के साथ, एक विकसित भारत के निर्माण के लिए. एक ऐसा भारत, जिसका सभ्यतागत ज्ञान हमें विश्व कल्याण के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है. जय सोमनाथ!---- समाप्त ---- ये भी देखें
PM Narendra Modi First Attack On Somnath Temple Mahmud Ghazni 1026 AD Attack On Somnath India Civilisational Heritage Jyotirlinga Cultural Resilience Spiritual Legacy Prabhas Patan Somnath Temple Trust
United States Latest News, United States Headlines
Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.
वैक्यूम क्लीनर बनाने वाली कंपनी ने बनाई Bugatti जैसी दिखने वाली सुपरकार, जानें 1000 हॉर्सपावर वाली इस EV के बारे मेंचीन की ड्रीम टेक्नोलॉजी कंपनी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में कदम रख रही है। कंपनी ने अपनी नई इलेक्ट्रिक हाइपरकार की तस्वीरें जारी की हैं, जिसका डिजाइन बुगाटी से काफी मिलता-जुलता है। यह कार 1000 हॉर्सपावर से ज्यादा की पावर जनरेट कर सकती है। आइए आपको इसके बारे में बताते...
Read more »
क्या 1000 करोड़ के फ्रॉड में इस कपंनी को बचा रही है दिल्ली पुलिस... अरेस्ट न कर बेल दिलाने की है तैयारी?दिल्ली पुलिस 1000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी मोहित गोगिया की पत्नी श्वेता गोगिया और राम सिंह को गिरफ्तार नहीं कर पा रही है। आरोप है कि पुलिस यूनिटी कंपनी के प्रति अधिक मेहरबान है, जिसने 100 करोड़ से अधिक की वसूली कर ली है। अन्य सैकड़ों पीड़ित अपने पैसे वापस पाने के लिए भटक रहे हैं, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे...
Read more »
'Gen Z को खेलों के मैदान पर तिरंगा फहराते देखना गर्व की बात', वाराणसी में वॉलीबॉल चैंपियनशिप के उद्घाटन के बाद बोले PM मोदीPM Modi:
Read more »
‘सोमनाथ शब्द से ही गर्व भर जाता है’ 1000 साल पहले गजनवी ने मंदिर पर किया था हमला, पीएम मोदी ने लिखा खास लेख...1000 Years of Somnath Temple Attack: महमूद गजनवी ने जनवरी 1026 में सोमवार मंदिर पर पहली बार हमला किया था. पीएम मोदी ने इस घटना के 1000 साल पूरे होने पर खास लेख लिखा है. इसमें उन्होंने इसे केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक बताया.
Read more »
नए साल में दिल्ली को मिलेंगी 1000 ई-बसें, 4 बस डिपो भी जल्द खुलने को तैयारदिल्ली को नए साल की पहली तिमाही में लगभग एक हजार नई इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं।
Read more »
कभी बैकग्राउंड डांसर थी ये एक्ट्रेस, हीरोइन बनते ही किया राज... एक साल में दीं दो 1000 करोड़ी मूवीएक एक्ट्रेस जो इंडस्ट्री में आने से पहले स्पोर्ट्स प्लेयर, मॉडल और बैकग्राउंड डांसर रह चुकी है। पहली ही फिल्म से इस एक्ट्रेस ने सक्सेस हासिल की। दो साल में तीन 1000 करोड़ी फिल्में दीं। जानिए बॉलीवुड की वो एक्ट्रेस कौन हैं।
Read more »
