अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ईरानी वार्ताकार समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट जंग का आज 27वां दिन है। इस बीच गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरानी वार्ताकार समझौते के लिए विनती कर रहे हैं, और उन्होंने चेतावनी दी है कि समय तेजी से बीत रहा है। ट्रुथ सोशल पर एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी वार्ताकार अमेरिका के साथ समझौते के लिए भीख मांग रहे हैं, जबकि सार्वजनिक रूप से वे कह रहे हैं कि वे केवल अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने ईरानी पक्ष को बहुत अलग और अजीब बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य क्षमता पूरी तरह से खत्म हो हो चुकी है और उसके पुनरुत्थान की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान को जल्द ही सीरियस हो जाना चाहिए। अगर यह मौका हाथ से निकल गया तो पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं होगा।' क्या हैं ईरान की पांच शर्ते? ईरान ने अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी हैं और उसका कहना है कि मिडिल ईस्ट में छिड़ा युद्ध अमेरिका की शर्तों पर नहीं, बल्कि ईरान की शर्तों पर ही समाप्त होगा। हमले और हत्या की घटनाएं बंद हों। सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो। दोबारा युद्ध ना हो, ठोस तंत्र बने। युद्ध नुकसान की भरपाई, मुआवजा तय हो। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले। NATO को भी ट्रंप की खरी-खरी इससे पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक और पोस्ट में कहा था कि नाटो देशों ने ईरान के साथ संघर्ष में मदद के लिए कुछ नहीं किया है। इतना ही नहीं ट्रंप ने नाटो को पागल राष्ट्र तक बता दिया जो सैन्य रूप से तबाह हो चुका है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका को नाटो से कुछ भी नहीं चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सहयोगियों को वर्तमान स्थिति को कभी नहीं भूलना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई है जब ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति से जुड़े अमेरिकी नेतृत्व वाले कदमों का समर्थन करने में नाटो सहयोगियों ने भाग नहीं लिया।.
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट जंग का आज 27वां दिन है। इस बीच गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरानी वार्ताकार समझौते के लिए विनती कर रहे हैं, और उन्होंने चेतावनी दी है कि समय तेजी से बीत रहा है। ट्रुथ सोशल पर एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी वार्ताकार अमेरिका के साथ समझौते के लिए भीख मांग रहे हैं, जबकि सार्वजनिक रूप से वे कह रहे हैं कि वे केवल अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने ईरानी पक्ष को बहुत अलग और अजीब बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य क्षमता पूरी तरह से खत्म हो हो चुकी है और उसके पुनरुत्थान की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान को जल्द ही सीरियस हो जाना चाहिए। अगर यह मौका हाथ से निकल गया तो पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं होगा।' क्या हैं ईरान की पांच शर्ते? ईरान ने अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी हैं और उसका कहना है कि मिडिल ईस्ट में छिड़ा युद्ध अमेरिका की शर्तों पर नहीं, बल्कि ईरान की शर्तों पर ही समाप्त होगा। हमले और हत्या की घटनाएं बंद हों। सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो। दोबारा युद्ध ना हो, ठोस तंत्र बने। युद्ध नुकसान की भरपाई, मुआवजा तय हो। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले। NATO को भी ट्रंप की खरी-खरी इससे पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक और पोस्ट में कहा था कि नाटो देशों ने ईरान के साथ संघर्ष में मदद के लिए कुछ नहीं किया है। इतना ही नहीं ट्रंप ने नाटो को पागल राष्ट्र तक बता दिया जो सैन्य रूप से तबाह हो चुका है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका को नाटो से कुछ भी नहीं चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सहयोगियों को वर्तमान स्थिति को कभी नहीं भूलना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई है जब ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति से जुड़े अमेरिकी नेतृत्व वाले कदमों का समर्थन करने में नाटो सहयोगियों ने भाग नहीं लिया।
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