पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य समुद्री मोर्चे पर तनाव बढ़ा रहा है। हूती विद्रोहियों के हमलों से यह मार्ग, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है, वैश्विक व्यापार के लिए संवेदनशील बन गया है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब समुद्री मोर्चे तक फैलने की आशंका बढ़ा रहा है। ईरान समर्थक हूती विद्रोही पहले ही इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका ले चुके हैं और उनके निशाने पर मुख्य रूप से इजरायल है। यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखने वाले हूती विद्रोहियों की रणनीतिक पहुंच बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य तक है, जिसे वैश्विक समुद्री व्यापार की दृष्टि से होर्मुज के बाद सबसे संवेदनशील मार्ग माना जाता है। विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि इस मार्ग पर दबाव बढ़ता है तो यह मौजूदा संघर्ष का अगला बड़ा मोर्चा बन सकता है। बाब-अल-मंदेब क्यों है महत्वपूर्ण? बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अपनी सबसे संकरी जगह पर लगभग 30 किलोमीटर चौड़ा है। यह उत्तर-पूर्व में यमन तथा पश्चिम में इरिट्रिया और जिबूती के बीच स्थित है। अरबी में इसका अर्थ 'आंसुओं का द्वार' है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से यह समुद्री मार्ग कठिन और जोखिमपूर्ण माना जाता रहा है। यही मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और मिस्त्र की स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर से हिंद महासागर तक जहाजों को सीधा रास्ता देता है। वैकल्पिक रास्ता स्वेज नहर खुलने से पहले जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप आफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। आज भी यदि यह मार्ग बाधित होता है तो यही वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर सऊदी अरब से नीदरलैंड जाने वाले तेल टैंकर को लाल सागर मार्ग से लगभग 12,000 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि अफ्रीका घूमकर जाने पर यह दूरी 20,000 किलोमीटर से अधिक हो जाती है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार इस कारण यात्रा अवधि 34 दिन से घटकर 19 दिन रह जाती है। एलएनजी के लिए महत्वपूर्ण दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 12 से 14 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ईआइए के नवीनतम आकलन के अनुसार, 2025 में प्रतिदिन लगभग 42 लाख बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बाब-अल-मंदेब से होकर गुजरे, जो वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का लगभग पांच प्रतिशत है। इसके अलावा कतर से यूरोप जाने वाली बड़ी मात्रा में एलएनजी आपूर्ति भी इसी मार्ग पर निर्भर है। स्वेज नहर प्राधिकरण के अनुसार, 2025 की अंतिम तिमाही में स्वेज नहर से कुल 3,426 जहाज गुजरे, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े थे। इनमें 1,330 तेल टैंकर और 88 एलएनजी वाहक जहाज शामिल थे। लगभग 1,339 थोक और सामान्य मालवाहक जहाज कृषि उपज, कोयला और लौह अयस्क ले जा रहे थे, जबकि 459 कंटेनर जहाज कुल यातायात का 13 प्रतिशत रहे। 2023 के अंत और 2024 में हूती विद्रोहियों द्वारा जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद लाल सागर मार्ग से यातायात में तेज गिरावट आई थी। अंतरराष्ट्रीय नौवहन संगठन के अनुसार नवंबर 2023 से सितंबर 2024 के बीच इस क्षेत्र में 67 गंभीर सुरक्षा घटनाएं दर्ज की गईं। कई प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने उस दौरान अपने जहाज अफ्रीका के रास्ते मोड़ दिए थे। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बाब-अल-मंदेब को बंद करके नौवहन बाधित करना कठिन है, लेकिन यूरोप की तुलना में एशिया पर दबाव ज्यादा रहेगा। एशिया की ओर आने वाले जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ सकता है, जबकि यूरोप और अमेरिका जाने वाले कुछ जहाजों पर सीमित असर पड़ेगा। इससे माल ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम दोनों बढ़ेंगे। 2024 में युद्धकालीन जोखिम बीमा दर 0.
6 प्रतिशत से बढ़कर दो प्रतिशत तक पहुंच गई थी। एशियाई व्यापारिक साझेदारों पर प्रतिकूल असर होर्मुज जलमार्ग बंद होने से सऊदी अरब ने अपनी पूरब-पश्चिम पाइपलाइन प्रणाली को मजबूत किया है, जो अबकैक को लाल सागर तट पर यान्बू बंदरगाह से जोड़ती है। लेकिन यदि बाब-अल-मंदेब पर संकट गहराता है तो ईरान के विरोधियों से अधिक उसके एशियाई व्यापारिक साझेदारों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। यह भी पढ़ें- 'तो काट देंगे पैर...': ईरान की अमेरिका को चेतावनी, US Army और रूस की चेचन यूनिटें जमीनी युद्ध के लिए तैयार
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