हक की बात: गुजारा भत्ता देने में नाकाम पति की होगी संपत्ति कुर्क, पत्नी-बेटे की मांग पर कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला

Karnataka High Court On Husband Wife Case News

हक की बात: गुजारा भत्ता देने में नाकाम पति की होगी संपत्ति कुर्क, पत्नी-बेटे की मांग पर कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला
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बेंगलुरु के एक शख्स की कर्नाटक हाई कोर्ट ने पत्नी और बेटे को गुजारा भत्ता न देने के जुर्म में उसकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है। पहले यह भत्ता कुल 3000 रुपये था जिसे पत्नी-बेटे ने बढ़ाने की मांग की गई।

बेंगलुरु/नई दिल्ली: बेंगलुरु के एक शख्स को अपनी पत्नी और दिव्यांग बेटे को कम गुजारा भत्ता न देना भारी पड़ गया। कर्नाटक हाई कोर्ट ने उस शख्स की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दिया है। हाल ही के एक आदेश में, जस्टिस अनु सिवामणि और जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े की खंडपीठ ने शख्स को 12 अप्रैल 2012 से हर महीने 5,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है। बता दें कि 12 अप्रैल को पत्नी ने मुकदमा दायर किया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि बेंगलुरु के उत्तराहल्ली में उस शख्स का 1,276 वर्ग फुट का मकान कुर्क कर लिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर पत्नी की ओर से संपत्ति का और विवरण दिया जाता है, तो उन पर भी चार्ज लगाया जाएगा। संपत्ति पर लगाया गया चार्ज यह सुनिश्चित करने के लिए लगाया जाता है कि भविष्य में गुजारा भत्ता का भुगतान हो सके।क्या था पूरा मामला जानिए पत्नी ने साल 2002 में अपने पति के साथ क्रूरता का आरोप लगाते हुए घर छोड़ दिया था और अपने और अपने बेटे के लिए गुजारा भत्ता मांगा था। शुरुआत में, अदालत ने पत्नी को हर महीने 2,000 रुपये और बेटे को 1,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन दस साल बाद पत्नी और बेटे ने राशि बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की मांग की। सितंबर 2018 में, पारिवारिक अदालत ने पति को हर महीने 3,000 रुपये देने का आदेश दिया। हाई कोर्ट में पत्नी और बेटे ने जज के सामने यह दलील दी कि जो राशि मिल रही है वह अभी भी कम है और पति ने पुराना बकाया भी नहीं चुकाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पति ने कुछ जमीनें बेची और वह हर महीने 5,000 रुपये का भुगतान कर सकता है। साथ ही, उन्होंने अदालत से पति की संपत्ति को कुर्क करने की मांग की।कोर्ट ने मानी पत्नी और बेटे की बात पत्नी और बेटे की बात सुनकर कोर्ट ने गुजारा भत्ता बढ़ाकर प्रत्येक को ₹5,000 कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि बेटा दिव्यांग है, इसलिए यह राशि कम है और फैमिली कोर्ट को उसी के अनुसार आदेश देना चाहिए था। जजों ने यह कहते हुए कि 'पति ने अभी तक कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है, संपत्ति के अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 39 के तहत बकाया राशि को संपत्ति पर चार्ज बनाया जा सकता है। चूंकि पति अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में लापरवाही बरत रहा है, इसलिए पत्नी और बेटे को भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उसकी संपत्ति पर एक चार्ज बनाया जाना चाहिए।.

बेंगलुरु/नई दिल्ली: बेंगलुरु के एक शख्स को अपनी पत्नी और दिव्यांग बेटे को कम गुजारा भत्ता न देना भारी पड़ गया। कर्नाटक हाई कोर्ट ने उस शख्स की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दिया है। हाल ही के एक आदेश में, जस्टिस अनु सिवामणि और जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े की खंडपीठ ने शख्स को 12 अप्रैल 2012 से हर महीने 5,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है। बता दें कि 12 अप्रैल को पत्नी ने मुकदमा दायर किया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि बेंगलुरु के उत्तराहल्ली में उस शख्स का 1,276 वर्ग फुट का मकान कुर्क कर लिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर पत्नी की ओर से संपत्ति का और विवरण दिया जाता है, तो उन पर भी चार्ज लगाया जाएगा। संपत्ति पर लगाया गया चार्ज यह सुनिश्चित करने के लिए लगाया जाता है कि भविष्य में गुजारा भत्ता का भुगतान हो सके।क्या था पूरा मामला जानिए पत्नी ने साल 2002 में अपने पति के साथ क्रूरता का आरोप लगाते हुए घर छोड़ दिया था और अपने और अपने बेटे के लिए गुजारा भत्ता मांगा था। शुरुआत में, अदालत ने पत्नी को हर महीने 2,000 रुपये और बेटे को 1,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन दस साल बाद पत्नी और बेटे ने राशि बढ़ाकर 5,000 रुपये करने की मांग की। सितंबर 2018 में, पारिवारिक अदालत ने पति को हर महीने 3,000 रुपये देने का आदेश दिया। हाई कोर्ट में पत्नी और बेटे ने जज के सामने यह दलील दी कि जो राशि मिल रही है वह अभी भी कम है और पति ने पुराना बकाया भी नहीं चुकाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पति ने कुछ जमीनें बेची और वह हर महीने 5,000 रुपये का भुगतान कर सकता है। साथ ही, उन्होंने अदालत से पति की संपत्ति को कुर्क करने की मांग की।कोर्ट ने मानी पत्नी और बेटे की बात पत्नी और बेटे की बात सुनकर कोर्ट ने गुजारा भत्ता बढ़ाकर प्रत्येक को ₹5,000 कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि बेटा दिव्यांग है, इसलिए यह राशि कम है और फैमिली कोर्ट को उसी के अनुसार आदेश देना चाहिए था। जजों ने यह कहते हुए कि 'पति ने अभी तक कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया है, संपत्ति के अंतरण अधिनियम 1882 की धारा 39 के तहत बकाया राशि को संपत्ति पर चार्ज बनाया जा सकता है। चूंकि पति अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में लापरवाही बरत रहा है, इसलिए पत्नी और बेटे को भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उसकी संपत्ति पर एक चार्ज बनाया जाना चाहिए।

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