DUSU Election 2024: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव में इस साल वोटिंग प्रतिशत पिछले 10 सालों में सबसे कम रहा। मॉर्निंग कॉलेजों का वोटिंग पर्सेंटेज केवल 29.
नई दिल्ली: जिस हिसाब से दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के चुनावों में प्रत्याशियों और उनके साथियों का जोश दिखा, उस हिसाब से वी-डे पर वोटर्स का जोश बहुत कम नजर आया। मॉर्निंग कॉलेजों का वोटिंग पर्सेंटेज काफी कम 29.
78% रहा। डीयू में 52 कॉलेजों में शुक्रवार को डूसू चुनाव समेत कॉलेज यूनियन के चुनाव के लिए वोटिंग हुई। नॉर्थ कैंपस, साउथ कैंपस समेत अन्य कॉलेजों में जगह-जगह पुलिस बल मुस्तैद था। हाई कोर्ट ने चुनाव के बीच हुए डिफेसमेंट को देखते हुए नाराजगी जताई। इसके बावजूद नॉर्थ कैंपस में प्रत्याशियों के सपोर्टर्स पुलिस की मौजूदगी में पर्चे उड़ाते नजर आए। स्टूडेंट्स ने वी-डे को हॉलिडे की तरह मनाया। बहुत कम स्टूडेंट्स वोटिंग के लिए पहुंचे। पिछले साल डीयू में तीन साल के गैप के बाद चुनाव हुए थे। फ्रेशर्स से लेकर सीनियर्स सभी उत्साह से भरे नजर आए। मगर वोटिंग पर्सेंटेज 42% ही रहा था। इस साल 42 मॉर्निंग कॉलेजों का वोटिंग पर्सेंटेज 30% से भी कम रहा। यह पिछले 10 सालों में सबसे कम वोटिंग पर्सेंटेज है।चहल-पहल, मगर हर जगह नहींडूसू चुनाव के लिए स्टूडेंट्स का सेल्फी सेशन भी चला। नॉर्थ और साउथ कैंपस में स्टूडेंट्स फूड अड्डों पर मस्ती करते दिखे, लेकिन भीड़ नजर नहीं आई। नॉर्थ कैंपस में रामजस कॉलेज, किरोड़मल कॉलेज, हंसराज कॉलेज में थोड़ी बहुत चहल-पहल दिखी। मिरांडा हाउस, लॉ फैकल्टी, एसजीटीबी खालसा, हिंदू कॉलेज समेत कई कॉलेजों में चुनाव जैसा माहौल दिखा नहीं। कुछ कॉलेजों में लगा ही नहीं कि चुनाव है।पुलिस रही तैनात, फिर भी उड़ाए पर्चेनॉर्थ कैंपस, साउथ कैंपस से लेकर आउटर एरिया के कॉलेजों के भीतर-बाहर पुलिस बल तैनात था। नॉर्थ कैंपस में बैरिकेडिंग कर गाड़ियों की एंट्री बंद कर दी गई थी। सभी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन कॉलेजों के बाहर अपने प्रत्याशी के लिए स्टूडेंट्स को मनाते दिखे। फूड कूपन भी बांटे गए। चुनावी रौनक में पार्टी कार्यकर्ता भी नजर आए। पुलिस भी मुस्तैद दिखी।पर्चे उड़ाते स्टूडेंट्स दिखे छात्रकई पॉइंट जैसे रामजस कॉलेज के पास, किरोड़ीमल कॉलेज, लॉ सेंटर के बाहर पर्चे उड़ाते स्टूडेंट्स दिखे। जिन्हें कुछ जगह तो पुलिस वालों ने टोका-रोका भी, मगर 10 कदम बाद फिर वो पर्चे उड़ाते दिखे। कुछ पॉइंट्स पर पुलिस भी इसे अनदेखा करती नजर आई। प्रचार के साथ पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने, पर्चे उड़ाने, भारी-भरकम खर्च पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सवाल उठाया और वोटों की गिनती पर तब तक रोक लगा दी, जब तक नुकसान की भरपाई ना हो। मगर इसकी जानकारी ज्यादातर वोटर्स को नहीं थी।'वाइब तो है, मगर मुद्दे भी चाहिए'चुनावी माहौल में स्टूडेंट्स सुबह 8:30 की वोटिंग के लिए 8 बजे ही पहुंच गए थे, तो सपोटर्स की ड्यूटी सुबह 7 बजे से ही लग गई थी। मिरांडा हाउस कॉलेज की बीए स्टूडेंट दीया गुप्ता ने कहा, मैंने स्टूडेंट्स के बेसिक मुद्दों पर कैंडिडेट्स को चुना है। फर्स्ट ईयर से हूं, तो पहली बार कॉलेज यूनियन और डूसू चुनाव के लिए वोट दिया। चुनाव में बतौर वॉलंटियर भी काम किया। यह स्पेशल दिन रहा। मगर जिस हिसाब से कुछ दिनों से चुनाव का शोर था, उस हिसाब से वोटिंग कम ही हुई।'...मगर इस साल का माहौल फीका है'हंसराज कॉलेज की बीएससी फिजिकल साइंस स्टूडेंट रिद्धिमा का कहना है, मैंने पिछले साल वोट दिया था। इस बार भी देने आई हूं। मगर इस साल का माहौल फीका है। वजह है कि चुनाव में प्रत्याशियों के मुद्दे उनके सपोर्टस के हो-हल्ले में खो गए। हालांकि, कुछ स्टूडेंट्स ने चुनाव को जमकर एंजॉय किया। मिरांडा हाउस की ही थर्ड ईयर की स्टूडेंट आरुषि ने कहा कि इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी में जहां इतने कैंपस है, इतने सारे स्टूडेंट्स हैं, वहां चुनाव होगा तो प्रचार भी होगा। ऐसे में कूड़ा भी होगा। हां! इसे साफ करना भी जरूरी है। कुल मिलाकर डूसू चुनाव में एक वाइब है, इसे मैंने खूब एंजॉय किया।'यकीनन कागजों की बर्बादी...' किरोड़ीमल कॉलेज के फिजिक्स ऑनर्स के स्टूडेंट रोशन कहते हैं, डूसू चुनाव वाइब्रेंट है। मुझे अंदाजा नहीं था कि डूसू चुनाव इतने बड़े लेवल पर होता है। मैंने नॉमिनेशन के बीच अलग-अलग ग्रुप के सपोर्टर्स के बीच मारपीट होते देखी। सड़कों पर पैम्फ्लेंट्स का कूड़ा देखा। सड़क में एक के पीछे एक आती लग्जरी कारें भी देखीं। मगर इस दौरान ऐसे कैंडिडेट भी देखे जो स्टूडेंट्स के लिए इंडिपेंडेंट चुनाव लड़ रहे हैं। वो भी बिना किसी दिखावे के। चुनाव में वैरायटी है। हां! यकीनन कागजों की बर्बादी इसकी गंभीरता पर सवाल खड़ा करती है। अगर मुद्दों पर जोर दिया जाए तो ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स वी-डे एंजॉय करेंगे। अभी डूसू में वोटिंग पर्सेंटेज भी कम रहता है। ईवीएम में 'नोटा' का बटन भी ज्यादा दबाया जाता है।कैंपस पहुंचे पार्टी कार्यकर्तावोटिंग पर नजर रखने के लिए उम्मीदवार ही नहीं बीजेपी ओर कांग्रेस कार्यकर्ता भी नजर आए। जो अपनी स्टूडेंट्स विंग के पैनल को जिताने के लिए कॉलेज गेट के बाहर तैनात थे। एसजीटीबी सेकंड ईयर स्टूडेंट रमनप्रीत कहती हैं, कैंपस पॉलिटिक्स के बारे में ज्यादा नहीं पता। मगर यह पता है कि गर्ल्स की सेफ्टी, नाइट आउट, हॉस्टल के मुद्दों पर मैंने वोट किया। लॉ सेंटर के फाइनल ईयर के स्टूडेंट लोकेश ने बताया, चुनावी मुद्दे स्टूडेंट्स के मुद्दे होने चाहिए। जैसे लॉ फैकल्टी में ठंडा साफ पानी तक नहीं मिलता। तेज गर्मी में धीमे पंखे के बीच क्लास चलती है। मगर कैंडिडेंट्स का इस पर ध्यान ही नहीं। उनके सपोर्टर्स तो डीयू से हैं भी नहीं। मुझे लगता है चाहे यूनिवर्सिटी का चुनाव हो या कॉलेज का, प्रेजिडेंशल डिबेट जरूरी है। जैसे जेएनयू में होती है।पिछले 10 चुनाव की सबसे कम वोटिंगदिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स यूनियन की वोटिंग पर्सेंटेज जिस हिसाब से गिरी है, वो डूसू चुनाव में स्टूडेंट्स के रुझान की कमी पर सवाल खड़ा करता है। आखिर क्यों इस साल वोटर्स ने इस कदर इस चुनाव को नकारा है। डूसू से डीयू के 52 कॉलेज/विभाग जुड़े हैं, जिनमें से 42 मॉर्निंग कॉलेज हैं। डूसू 2024-25 के लिए मॉर्निंग कॉलेजों के 145893 वोटर्स में से सिर्फ 43451 वोटर्स ने अपना वोट डूसू पैनल– प्रेजिडेंट, वाइस प्रेजिडेंट, सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी के लिए दिया।इन जगह वोटर्स ने दिखाया जोशसबसे ज्यादा वोटिंग लाइब्रेरी साइंस डिपार्टमेंट में हुई जहां 124 वोटर्स में से 104 यानी 83.8% ने वोट दिया। लॉ सेंटर 2 में 63.6%, कैंपस लॉ सेंटर में भी 2800 में से 1552 स्टूडेंट्स ने अपना वोट दिए। रामलाल आनंद कॉलेज में 49.9%, हिंदू कॉलेज में 40% वोटिंग हुई।यहां हुई बहुत कम वोटिंगवहीं, बुद्धिस्ट स्टडीज सेंटर के 210 में से 54 वोटर्स, यानी महज 25.71% ने डूसू चुनाव में ईवीएम बटन दबाया। इन दोनों ही विभागों से डूसू पैनल के लिए 6-6 कैंडिडेट खड़े हैं। एसजीटीबी खालसा कॉलेज के स्टूडेंट्स ने डूसू चुनाव से अलग होने के कॉलेज प्रशासन के फैसले पर प्रदर्शन किया, हाई कोर्ट से राहत पाई, उसी कॉलेज के 2982 वोटर्स में से सिर्फ 459 वोटर्स यानी 15.39% ने अपना वोट दिया। डूसू पैनल के लिए दयाल सिंह कॉलेज में सिर्फ 16.3%, मिरांडा हाउस में 21.15%, विवेकानंद कॉलेज में 20% वोटिंग हुई। श्यामलाल कॉलेज में 39.6%, वैंकटेश्वर कॉलेज में वोटिंग पर्सेंटेज 38.4%, एआरएसडी कॉलेज में 38.3%, रामजस कॉलेज में वोटिंग पर्सेंटेज 35.73%, साउथ कैंपस में 33.3%, देशबंधु कॉलेज में 34.91%, किरोड़ीमल कॉलेज में वोटिंग पर्सेंटेज 33.78% रहा।
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