साल-दर-साल इस तरह आतंक का गढ़ बनता चला गया पाकिस्तान via NavbharatTimes Pakistan
यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि पाकिस्तान भारत और जम्मू-कश्मीर को अशांत रखने के लिए आतंकी संगठनों का इस्तेमाल करता है। दशकों से इस बात को भारत और दुनिया के तमाम देश मानते हैं। अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए की 1996 की एक रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकी मसूद अजहर को 60 हजार डॉलर प्रति महीने की मदद करती है। गुरुवार को चीन के वीटो लगाने के बाद एक बार फिर मसूद अजहर को ग्लोबल आंतकी घोषित नहीं किया जा सका। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि भारत विरोधी गतिविधि करने वाले आतंकी समूह को पाकिस्तान की आईएसआई का समर्थन है। क्या चाहते हैं ये आतंकी समूह इन आतंकी संगठनों का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को 'आजाद' कराना और उसे पाकिस्तान में शामिल करना है। इनमें जहां कुछ संगठनों की स्थापना अफगानिस्तान में सोवियत की मौजूदगी से लड़ने के लिए की गई थी, बाद में इनका ध्यान पाक की आईएसआई के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर की तरफ मोड़ दिया गया। आईएसआई ने न सिर्फ इन संगठनों की मदद की, बल्कि इन्हें आर्थिक तौर पर सहयोग किया, ट्रेनिंग मुहैया कराई और जरूरी साजो-सामान उपलब्ध कराया। साल-दर-साल साल 1981 में कई छोटे-मोटे 'जिहादी' संगठनों को बढ़ावा देने की कोशिश हुई, लेकिन यह बहुत कारगर साबित नहीं हुआ। पहली बार साल 1984 में जम्मू-कश्मीर को अस्थायी करने के लिए हूजी की स्थापना हुई। इस संगठन को पाकिस्तान की आईएसआई ने काफी मदद दी। साल 1985 में हूजी में फूट पड़ी और इसमें से हम नाम का संगठन अलग हो गया। हम की स्थापना फजलुर रहमान खलील ने की। खलील अब पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय है। साल 1989 में इस्लामिक संगठन जमात-ए-इस्लामी नाम के संगठन की 'अलगाववादी' विंग के तौर पर हिजबुल मुजाहिदीन की स्थापना हुई। बताया जाता है कि यह काम भी आईएसआई की देख-रेख में ही हुआ है। आतंकी सैयद सलाहुद्दीन ने इस संगठन की स्थापना की थी। साल 1990 में इस्लामिक संगठन मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद की सैन्य विंग के तौर पर लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना हुई। बताया जाता है कि लश्कर की स्थापना में आईएसआई की मदद की। इसका शुरुआती काम जम्मू-कश्मीर में विद्रोहियों को तैयार करना था। आतंकी हाफिज सईद ने इस संगठन की स्थापना की थी। साल 1993 में हूजी और हम एक बार फिर साथ आए और हुआ की स्थापना हुई। साल 1993 से 1994 के बीच यह संगठन काफी सक्रिय हुआ। साथ ही इसके कई अहम आतंकवादी गिरफ्तार हो गए। गिरफ्तार आतंकियों में मसूद अजहर भी शामिल था। साल 1994 में यूनाइटेड जिहाद काउंसिल, एक भारत विरोधी आतंकी संगठनों का समूह, जिनका एक उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को आजाद करना था। हिजबुल नेता सैयद सलाहुद्दीन को इस संगठन का नेता बनाया गया। इस संगठन में लैश्कर-ए-तैयबा, हम और अल-बद्र नाम के संगठन के कम से कम 13 सदस्य शामिल थे। साल 1997 में हरकत-उल-अंसार पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया। इसक कारण पाकिस्तान के लिए इस संगठन की मदद करना मुश्किल हो गया। ऐसे में हरकत-उल-अंसार फिर टूट गया और फिर से हूजी और हम के तौर पर स्वतंत्र रूप से काम करने लगा। साल 1998 में शुरुआती तौर पर हिजबुल के बैनर के तले काम करने वाले अल-बद्र को आईएसआई ने स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। हलांकि साल 2000 के बाद अल-बद्र के जैश में विलय होने की खबरें भी आईं। साल 2000 में इंडियन एयरलाइंस के अपहरण के बाद लोगों को छोड़ने के बदले मसूद अजहर को रिहा करने की मांग की गई। गिरफ्त से आजाद होने के बाद मसूद ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। हम के कई सदस्यों ने अपना संगठन छोड़कर जैश को जॉइन कर लिया। साल 2001 में जैश-ए-मोहम्मद ने अपना नाम तहरीक-उल-फुकरान किया, ताकि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण फंडिंग को शिफ्ट कर सके। इसी साल भारत, संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने जैश-ए-मोहम्मद को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। 2001 में अमेरिका ने लैश्कर को आतंकी संगठन घोषित किया। 2002 में भारत ने हिजबुल मुजाहिद्दीन को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। 2002 में लश्कर-ए-तैयबा ने अपनी फंडिंग के लिए जमात-उद-दावा नाम का संगठन बनाया। 2015 में पाकिस्तान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और भारत ने हम को प्रतिबंधित कर दिया। 2016 में हिजबुल कमांडर बुराहन वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में हिजबुल के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया गया और उसके कई आतंकियों को मार दया गया। भारत में आतंकी तारीखों पर पाक की मुहर 1999, दिसंबर 24: हम ने भारत से काठमांडू जा रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान अगवा किया। इसमें 174 पैसेंजर्स सवार थे। अगवा लोगों को छोड़ने के बदले मसूद अजहर समेत तीन आतंकियों को छोड़ने की मांग की गई। 2000, अप्रैल 19: जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में पहला आतंकी हमला किया। विस्फोटक से भरी कार से श्रीनगर स्थित आर्मी की बिल्डिंग के पास धमाका किया गया। 2001, दिसंबर 13: जैश के हथियारबंद आतंकियों ने दिल्ली में संसद पर हमला किया। 14 लोग मारे गए और 20 से ज्यादा घायल हुए। 2005, अक्टूबर 29: लश्कर-ए-तैयबा द्वारा दिल्ली में सिलसिलेवार 3 धमाके किए गए। इसमें 63 लोग मारे गए, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल थे। 2006, जुलाई 11: लश्कर-ए-तैयबा ने प्रेशर कूकर बम के जरिए मुंबई में लोकल ट्रेन में सात धमाके किए गए। इसमें 180 से ज्यादा लोग मारे गए और 800 से ज्यादा घायल हुए। 2008, नवंबर 26: लश्कर ने ही मुंबई में अब तक का सबसे बड़ा आंतकी हमला किया। मुंबई के ताज होटल समेत कई जगहों को हथियारबंद आतंकियों ने निशाना बनाया। तीन दिन तक शहर में आतंक का खेल चला। इसमें 170 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए। 2011, सितंबर 7: संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरू को फांसी की सजा दिए जाने का बदला लेने के लिए हूजी ने दिल्ली हाई कोर्ट में ब्रीफकेस में बॉम रखकर धमाका किया। 2016, सितंबर 18: जैश के चार आतंकियों ने उरी में भारतीय आर्मी की पोस्ट पर हमला किया। इसमें सभी आतंकी मारे गए। लेकिन सेना के 19 जवान भी शहीद हुए। 2019, फरवरी 14: जैश के आत्मघाती आतंकी ने सीआरपीएफ के जवानों के काफिले पर विस्फोटक भरी गाड़ी से हमला किया। इसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे।.
यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि पाकिस्तान भारत और जम्मू-कश्मीर को अशांत रखने के लिए आतंकी संगठनों का इस्तेमाल करता है। दशकों से इस बात को भारत और दुनिया के तमाम देश मानते हैं। अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए की 1996 की एक रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकी मसूद अजहर को 60 हजार डॉलर प्रति महीने की मदद करती है। गुरुवार को चीन के वीटो लगाने के बाद एक बार फिर मसूद अजहर को ग्लोबल आंतकी घोषित नहीं किया जा सका। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि भारत विरोधी गतिविधि करने वाले आतंकी समूह को पाकिस्तान की आईएसआई का समर्थन है। क्या चाहते हैं ये आतंकी समूह इन आतंकी संगठनों का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को 'आजाद' कराना और उसे पाकिस्तान में शामिल करना है। इनमें जहां कुछ संगठनों की स्थापना अफगानिस्तान में सोवियत की मौजूदगी से लड़ने के लिए की गई थी, बाद में इनका ध्यान पाक की आईएसआई के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर की तरफ मोड़ दिया गया। आईएसआई ने न सिर्फ इन संगठनों की मदद की, बल्कि इन्हें आर्थिक तौर पर सहयोग किया, ट्रेनिंग मुहैया कराई और जरूरी साजो-सामान उपलब्ध कराया। साल-दर-साल साल 1981 में कई छोटे-मोटे 'जिहादी' संगठनों को बढ़ावा देने की कोशिश हुई, लेकिन यह बहुत कारगर साबित नहीं हुआ। पहली बार साल 1984 में जम्मू-कश्मीर को अस्थायी करने के लिए हूजी की स्थापना हुई। इस संगठन को पाकिस्तान की आईएसआई ने काफी मदद दी। साल 1985 में हूजी में फूट पड़ी और इसमें से हम नाम का संगठन अलग हो गया। हम की स्थापना फजलुर रहमान खलील ने की। खलील अब पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय है। साल 1989 में इस्लामिक संगठन जमात-ए-इस्लामी नाम के संगठन की 'अलगाववादी' विंग के तौर पर हिजबुल मुजाहिदीन की स्थापना हुई। बताया जाता है कि यह काम भी आईएसआई की देख-रेख में ही हुआ है। आतंकी सैयद सलाहुद्दीन ने इस संगठन की स्थापना की थी। साल 1990 में इस्लामिक संगठन मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद की सैन्य विंग के तौर पर लश्कर-ए-तैयबा की स्थापना हुई। बताया जाता है कि लश्कर की स्थापना में आईएसआई की मदद की। इसका शुरुआती काम जम्मू-कश्मीर में विद्रोहियों को तैयार करना था। आतंकी हाफिज सईद ने इस संगठन की स्थापना की थी। साल 1993 में हूजी और हम एक बार फिर साथ आए और हुआ की स्थापना हुई। साल 1993 से 1994 के बीच यह संगठन काफी सक्रिय हुआ। साथ ही इसके कई अहम आतंकवादी गिरफ्तार हो गए। गिरफ्तार आतंकियों में मसूद अजहर भी शामिल था। साल 1994 में यूनाइटेड जिहाद काउंसिल, एक भारत विरोधी आतंकी संगठनों का समूह, जिनका एक उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को आजाद करना था। हिजबुल नेता सैयद सलाहुद्दीन को इस संगठन का नेता बनाया गया। इस संगठन में लैश्कर-ए-तैयबा, हम और अल-बद्र नाम के संगठन के कम से कम 13 सदस्य शामिल थे। साल 1997 में हरकत-उल-अंसार पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया। इसक कारण पाकिस्तान के लिए इस संगठन की मदद करना मुश्किल हो गया। ऐसे में हरकत-उल-अंसार फिर टूट गया और फिर से हूजी और हम के तौर पर स्वतंत्र रूप से काम करने लगा। साल 1998 में शुरुआती तौर पर हिजबुल के बैनर के तले काम करने वाले अल-बद्र को आईएसआई ने स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। हलांकि साल 2000 के बाद अल-बद्र के जैश में विलय होने की खबरें भी आईं। साल 2000 में इंडियन एयरलाइंस के अपहरण के बाद लोगों को छोड़ने के बदले मसूद अजहर को रिहा करने की मांग की गई। गिरफ्त से आजाद होने के बाद मसूद ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की। हम के कई सदस्यों ने अपना संगठन छोड़कर जैश को जॉइन कर लिया। साल 2001 में जैश-ए-मोहम्मद ने अपना नाम तहरीक-उल-फुकरान किया, ताकि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण फंडिंग को शिफ्ट कर सके। इसी साल भारत, संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने जैश-ए-मोहम्मद को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। 2001 में अमेरिका ने लैश्कर को आतंकी संगठन घोषित किया। 2002 में भारत ने हिजबुल मुजाहिद्दीन को आतंकी संगठन घोषित कर दिया। 2002 में लश्कर-ए-तैयबा ने अपनी फंडिंग के लिए जमात-उद-दावा नाम का संगठन बनाया। 2015 में पाकिस्तान, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और भारत ने हम को प्रतिबंधित कर दिया। 2016 में हिजबुल कमांडर बुराहन वानी के मारे जाने के बाद कश्मीर में हिजबुल के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया गया और उसके कई आतंकियों को मार दया गया। भारत में आतंकी तारीखों पर पाक की मुहर 1999, दिसंबर 24: हम ने भारत से काठमांडू जा रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान अगवा किया। इसमें 174 पैसेंजर्स सवार थे। अगवा लोगों को छोड़ने के बदले मसूद अजहर समेत तीन आतंकियों को छोड़ने की मांग की गई। 2000, अप्रैल 19: जैश-ए-मोहम्मद ने भारत में पहला आतंकी हमला किया। विस्फोटक से भरी कार से श्रीनगर स्थित आर्मी की बिल्डिंग के पास धमाका किया गया। 2001, दिसंबर 13: जैश के हथियारबंद आतंकियों ने दिल्ली में संसद पर हमला किया। 14 लोग मारे गए और 20 से ज्यादा घायल हुए। 2005, अक्टूबर 29: लश्कर-ए-तैयबा द्वारा दिल्ली में सिलसिलेवार 3 धमाके किए गए। इसमें 63 लोग मारे गए, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल थे। 2006, जुलाई 11: लश्कर-ए-तैयबा ने प्रेशर कूकर बम के जरिए मुंबई में लोकल ट्रेन में सात धमाके किए गए। इसमें 180 से ज्यादा लोग मारे गए और 800 से ज्यादा घायल हुए। 2008, नवंबर 26: लश्कर ने ही मुंबई में अब तक का सबसे बड़ा आंतकी हमला किया। मुंबई के ताज होटल समेत कई जगहों को हथियारबंद आतंकियों ने निशाना बनाया। तीन दिन तक शहर में आतंक का खेल चला। इसमें 170 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए। 2011, सितंबर 7: संसद पर हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरू को फांसी की सजा दिए जाने का बदला लेने के लिए हूजी ने दिल्ली हाई कोर्ट में ब्रीफकेस में बॉम रखकर धमाका किया। 2016, सितंबर 18: जैश के चार आतंकियों ने उरी में भारतीय आर्मी की पोस्ट पर हमला किया। इसमें सभी आतंकी मारे गए। लेकिन सेना के 19 जवान भी शहीद हुए। 2019, फरवरी 14: जैश के आत्मघाती आतंकी ने सीआरपीएफ के जवानों के काफिले पर विस्फोटक भरी गाड़ी से हमला किया। इसमें सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे।
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