सरकार के खिलाफ लिखी पोस्ट, अवार्ड लिस्ट से हटा लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का नाम

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लखनऊ: सरकार के खिलाफ पोस्‍ट लिखीं तो अवार्ड लिस्‍ट से हटाया नाम, प्रोफेसर का आरोप

लखनऊ: सरकार के खिलाफ पोस्‍ट लिखीं तो अवार्ड लिस्‍ट से हटाया नाम, प्रोफेसर का आरोप Asad Rehman March 10, 2019 10:06 AM अखिलेश यादव भी प्रोफेसर के समर्थन में उतरे और सरकार पर निशाना साधा। उत्तर प्रदेश की लखनऊ यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि उनका नाम सरकार द्वारा दिए जाने वाले एक प्रतिष्ठित अवॉर्ड के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। लेकिन केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ फेसबुक पोस्ट लिखने के कारण उनका नाम इस लिस्ट से हटा दिया गया है। प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि बीती 26 फरवरी को उन्हें स्टेट एम्पलोयी लिटरेरी एसोसिएशन की तरफ से एक फोन कॉल आया था। इसमें बताया गया था कि उनका नाम रमन लाल अग्रवार पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट कर लिया गया है। इस पुरस्कार के तहत विजेता को 11000 रुपए का इनाम मिलना था। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि बीती 6 मार्च को उन्हें एसोसिएशन के महासचिव दिनेश चंद्र अवस्थी का फोन आया। इस दौरान उन्होंने बताया कि मेरी एक फेसबुक पोस्ट की वजह से मेरा नाम अवॉर्ड विजेताओं की लिस्ट से हटा दिया गया है। यह पुरस्कार आगामी 17 मार्च को एक कार्यक्रम में दिए जाने हैं। रविकांत ने बताया कि अब उनकी जगह किसी और को यह पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं जब इस मुद्दे पर स्टेट एम्पलोयी लिटरेरी एसोसिएशन के महासचिव दिनेश चंद्र अवस्थी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। अब इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरु हो गई है। दरअसल शनिवार की शाम सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रोफेसर रविकांत के समर्थन में एक ट्वीट किया और लिखा कि ‘भाजपा दलितों का लगातार शोषण कर रही है। आज लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रविकांत का नाम सरकार द्वारा दिए जाने वाले अवॉर्ड की लिस्ट से इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने भाजपा के विरुद्ध अपने विचार प्रकट किए थे। यह उनके कथित राष्ट्रवाद का असली चेहरा है।’ Also Read Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App.

लखनऊ: सरकार के खिलाफ पोस्‍ट लिखीं तो अवार्ड लिस्‍ट से हटाया नाम, प्रोफेसर का आरोप Asad Rehman March 10, 2019 10:06 AM अखिलेश यादव भी प्रोफेसर के समर्थन में उतरे और सरकार पर निशाना साधा। उत्तर प्रदेश की लखनऊ यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि उनका नाम सरकार द्वारा दिए जाने वाले एक प्रतिष्ठित अवॉर्ड के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। लेकिन केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ फेसबुक पोस्ट लिखने के कारण उनका नाम इस लिस्ट से हटा दिया गया है। प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि बीती 26 फरवरी को उन्हें स्टेट एम्पलोयी लिटरेरी एसोसिएशन की तरफ से एक फोन कॉल आया था। इसमें बताया गया था कि उनका नाम रमन लाल अग्रवार पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट कर लिया गया है। इस पुरस्कार के तहत विजेता को 11000 रुपए का इनाम मिलना था। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि बीती 6 मार्च को उन्हें एसोसिएशन के महासचिव दिनेश चंद्र अवस्थी का फोन आया। इस दौरान उन्होंने बताया कि मेरी एक फेसबुक पोस्ट की वजह से मेरा नाम अवॉर्ड विजेताओं की लिस्ट से हटा दिया गया है। यह पुरस्कार आगामी 17 मार्च को एक कार्यक्रम में दिए जाने हैं। रविकांत ने बताया कि अब उनकी जगह किसी और को यह पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं जब इस मुद्दे पर स्टेट एम्पलोयी लिटरेरी एसोसिएशन के महासचिव दिनेश चंद्र अवस्थी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। अब इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरु हो गई है। दरअसल शनिवार की शाम सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रोफेसर रविकांत के समर्थन में एक ट्वीट किया और लिखा कि ‘भाजपा दलितों का लगातार शोषण कर रही है। आज लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रविकांत का नाम सरकार द्वारा दिए जाने वाले अवॉर्ड की लिस्ट से इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने भाजपा के विरुद्ध अपने विचार प्रकट किए थे। यह उनके कथित राष्ट्रवाद का असली चेहरा है।’ Also Read Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

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