Sheopur School Mid Day Meal: श्योपुर जिले के सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के तमाम दावों के बीच एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है. विजयपुर विकासखंड के तिरंगापुरा मिडिल स्कूल में बच्चों को मिड डे मील रद्दी कागज पर परोसा गया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है.
दीपक दंडोतिया श्योपुर. जिले के विजयपुर विकासखंड स्थित तिरंगापुरा मिडिल स्कूल में छात्रों को मिड-डे मील परोसने के तरीके ने सरकारी व्यवस्था की अमानवीयता को उजागर कर दिया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया, जिसमें देखा गया कि नौनिहालों को रद्दी कागज के टुकड़ों पर खाना परोसा जा रहा था, जबकि वे जमीन पर बैठकर भोजन कर रहे थे.
इस शर्मनाक घटना ने सरकारी स्कूलों में बच्चों के सम्मान और स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वायरल हुए वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मिडिल स्कूल के छात्र-छात्राओं को बाहर जमीन पर बैठाया गया है और उन्हें भोजन करने के लिए कोई थाली या प्लेट नहीं दी गई. इसके बजाय, उनके सामने रद्दी कॉपी-किताबों के कागज़ बिछाए गए हैं, जिन पर चावल और सब्जी जैसे खाद्य पदार्थ परोसे गए हैं. यह दृश्य इतना हृदय विदारक है कि स्थानीय लोगों और राहगीरों ने कड़ी आपत्ति जताई. लोगों का कहना था कि बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जैसा कि आम तौर पर जेलों में भी कैदियों के साथ नहीं किया जाता. यह सीधे तौर पर बच्चों के सम्मान और उनके स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाला कृत्य है. वायरल वीडियो से जागा प्रशासन, कलेक्टर ने लिया एक्शन मामले की जानकारी मिलते ही श्योपुर के कलेक्टर अर्पित वर्मा ने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने बिना किसी देरी के कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से संबंधित शिक्षक को निलंबित करने का आदेश दिया. इसके साथ ही, मिड-डे मील की सप्लाई की जिम्मेदारी संभाल रहे संतोषी स्व-सहायता समूह के अनुबंध को भी निरस्त कर दिया गया है. बच्चों के सम्मान और स्वास्थ्य दोनों के साथ खिलवाड़ विजयपुर के एसडीएम अभिषेक मिश्रा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि वीडियो के आधार पर गहन जांच शुरू कर दी गई है और नियम के अनुसार अन्य जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि “यह बच्चों के सम्मान और स्वास्थ्य दोनों के साथ खिलवाड़ है, और ऐसी लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है.” निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल यह घटना शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था की विफलता को भी दर्शाती है. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता महीनों से बेहद खराब रही है, लेकिन निरीक्षण अधिकारी केवल फाइलों में दौरे की खानापूर्ति करते रहे. यदि पर्यवेक्षण अधिकारी नियमित रूप से स्कूलों का दौरा करते और मानकों का पालन सुनिश्चित करते, तो ऐसी अमानवीय स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती. फिलहाल, प्रशासन ने एक जांच टीम गठित कर दी है जो यह पता लगाएगी कि इतने लंबे समय तक बच्चों को कागज पर खाना क्यों परोसा गया और इस पूरी लापरवाही के लिए निगरानी अधिकारी और अन्य कर्मचारी कितने जिम्मेदार हैं. सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की शर्मनाक घटना दोबारा न हो. क्या है मिड-डे मील योजना मध्य प्रदेश में मध्याह्न भोजन कार्यक्रम भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप 1995 से संचालित किया जा रहा है. इसका प्राथमिक उद्देश्य स्कूल में बच्चों के नामांकन और उपस्थिति को बढ़ाना और उन्हें पोषण संबंधी सहायता प्रदान करना है. यह योजना प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के बच्चों को स्कूल के दिनों में गर्म, पका हुआ भोजन मुफ्त उपलब्ध कराती है. योजना का नोडल विभाग पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग है. इस कार्यक्रम के तहत भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी आमतौर पर ग्राम पंचायतों या स्व-सहायता समूहों को दी जाती है. हाल ही में श्योपुर जैसे जिलों में इस योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताएँ और लापरवाही सामने आई है, जिसने बच्चों को पौष्टिक भोजन और सम्मानजनक माहौल देने के मूल लक्ष्य पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. कलेक्टर अर्पित वर्मा: “बच्चों को पेपर पर खाना परोसना बेहद शर्मनाक है. संबंधित शिक्षक और समूह पर तत्काल कार्रवाई की गई है.” एसडीएम अभिषेक मिश्रा: “वीडियो के आधार पर जांच चल रही है. दोषियों के खिलाफ नियम अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.”
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