Madhya Pradesh Liquor Policy CAG Report 2025; शराब ठेकेदारों ने शिवराज सरकार को 756 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया था। इस रकम की वसूली अब तक नहीं हो पाई है। ये खुलासा भारत के नियंत्रक-महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट से हुआ है। 31 मार्च 2022 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष की...
कैग की रिपोर्ट में खुलासा, इसमें 5 लाख पीएम आवास और 1500 किमी सड़कें बन जातींशराब ठेकेदारों ने मध्यप्रदेश सरकार को 756 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है। तीन साल बीत चुके हैं, अभी तक सरकार ये रकम वसूल नहीं पाई है। ये खुलासा हुआ है, भारत के नियंत्रक महालेखाकार परीक्षा की रिपोर्ट में। 31 मार्च 2022 को खत्म हुए वित्तीय वर्षकैग ने फरवरी 2022 से अक्टूबर 2022 की अवधि के दौरान 52 में से 26 जिला आबकारी और आबकारी आयुक्त कार्यालय की जांच के दौरान ये रिपोर्ट तैयार की है। इसमें 2,569 केस में 756 करोड़ की हानि होने की तरफ इशारा किया गया है। साथ ही सरकार की शराब नीति पर भी सवाल उठाए हैं। कैग के इस खुलासे के बाद भास्कर ने एनालिसिस किया कि 756 करोड़ रुपए में केंद्र और राज्य की कौन-कौन सी स्कीम्स प्रभावी ढंग से लागू हो सकती थीं? पता चला कि इतने पैसे में सरकार 5 लाख गरीबों के पीएम आवास बना सकती थी। वहीं, पीएम ग्राम सड़क योजना के तहत 1500 किमी सड़कें बन सकती थीं। पढ़िए, किस तरह से शराब ठेकेदारों ने सरकार का पैसा खा लिया और सरकार इसे वसूल क्यों नहीं पा रही? जानिए इतने पैसों में क्या-क्या हो सकता था?1.
नई शराब नीति 4 महीने में कैंसिल, 471 करोड़ का नुकसान कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि साल 2020-21 की शराब नीति को 1 अप्रैल से लागू किया गया, लेकिन चार महीने बाद अगस्त में इस नीति को कैंसिल कर दिया। इससे सरकार को 471.38 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। जो अभी तक नहीं मिला है। दरअसल, सरकार ने 16 जिलों के मौजूदा खुदरा लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे और 20 समूह लाइसेंस दिए थे। कैग ने पाया कि इस अवधि के दौरान 20 में से 11 लाइसेंसधारियों ने शराब नीति रद्द करने और उनकी सुरक्षा जमा राशि को वापस पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कोविड महामारी के प्रतिबंधों के कारण शराब दुकानों का संचालन करने और लाइसेंस शुल्क का भुगतान करने में असमर्थता का हवाला दिया। लाइसेंस रद्द करने के बाद इनकी 241.50 करोड़ की राशि की वसूली 31 मार्च 2023 तक लंबित रही। आबकारी विभाग ने मई 2023 में अपने जवाब में कहा कि कोविड प्रतिबंधों के कारण फुटकर शराब दुकानें लगातार चालू नहीं रहीं। कई ठेकेदारों ने लाइसेंस सरेंडर कर दिए और विभाग ने इन दुकानों का संचालन किया था। कैग ने विभाग के इस जवाब को नहीं माना क्योंकि जिन 18 जिलों में समूह लाइसेंस के बजाय फुटकर लाइसेंस की व्यवस्था लागू थी, वहां शराब ठेकेदारों ने पूरी राशि जमा की थी।सरकार ने 2020-21 में प्रदेश के 52 जिलों में शराब बेचने के 329 लाइसेंस जारी किए थे। इससे 10 हजार 729 करोड़ रुपए का राजस्व मिलना था। 38 ठेकेदारों ने शराब दुकानों का संचालन करने से इनकार कर दिया था। जिनसे सरकार के खाते में 1 हजार 605 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा होनी थी। आबकारी विभाग ने इन दुकानों के नए सिरे से ठेके दिए, लेकिन 38 ठेकेदारों से 269 करोड़ रुपए वसूल करने थे, सरकार वो मार्च 2024 तक वसूल नहीं कर पाई। इनमें से 11 ठेकेदारों से ही 232 करोड़ रुपए वसूल होने थे जबकि 17 ठेकेदारों से 37 करोड़ रुपए की वसूली होनी थी। इनका मामला कोर्ट में लंबित था।कैग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि विभाग के पास बोली लगाने की प्रक्रिया के दौरान बोलीदाताओं की वित्तीय स्थिति का आकलन करने का कोई प्रावधान नहीं था। सुरक्षा राशि जमा करने में विफलता के कारण कलेक्टर धार ने बदनावर और गंधवानी समूह के लाइसेंस रद्द कर दिए थे। हालांकि, समूह से कोई वसूली नहीं की जा सकती है क्योंकि जिले के लाइसेंसधारी के नाम पर कोई चल-अचल संपत्ति नहीं थी। इसके कारण शासन को 9 करोड़ 58 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।रीवा जिले की सभी 71 दुकानों का ठेका एक समूह बिलासपुर के गोपाल एसोसिएट्स को दिया गया था। जिसमें 10 पार्टनर थे। एसोसिएट्स ने सुरक्षा निधि की राशि और अन्य दस्तावेज जमा नहीं किए। इस वजह से ठेका कैंसिल कर दिया गया। गोपाल एसोसिएट्स का एक पार्टनर निकुंज शिवहरे था। मेसर्स वाइन ट्रेडर्स ने मुरैना में ठेका लिया था। इसके एवज में 3.63 करोड़ की बैंक गारंटी जमा की थी। रीवा कलेक्टर ने शिवहरे से यह राशि जब्त करने के लिए मुरैना कलेक्टर को पत्र लिखा, लेकिन मुरैना जिला आबकारी अधिकारी ने यह राशि जब्त करने के बजाय ठेकेदार की देय राशि में समायोजित कर दी।तीन जिले- बैतूल, सिंगरौली और रीवा में जिला आबकारी अधिकारियों ने 6 खुदरा दुकानों से विदेशी और देसी शराब जब्त की। पंचनामा के अनुसार, दुकानों में शराब का कुल स्टॉक 1 लाख 05 हजार 268 था। जांच अधिकारियों ने अपने स्टॉक रजिस्टरों में केवल 14 हजार 42 बोतलें दर्ज कीं यानी 91 हजार 226 बोतलों को रिकॉर्ड में नहीं लिया। रिकॉर्ड में न आने वाली बोतलों की कीमत 1 करोड़ 69 लाख रुपए है।ठेके का नियम है कि ठेकेदार की बैंक गारंटी तब स्वीकार की जाएगी, जब उसके नाम अथवा कंपनी के नाम पर जारी की गई हो। जांच में पाया गया कि 19 ठेकेदारों ने 18.39 करोड़ की बैंक गारंटी में नाम तक का उल्लेख नहीं किया गया। कैग ने रिपोर्ट में उदाहरण देते हुए बताया कि 11 लाख 12 हजार रुपए की एक बैंक गारंटी ठेकेदार रविंद्र सिंह के नाम पर प्रस्तुत की गई थी। जब बैंक में जाकर जांच की तो पता चला कि यह बद्री प्रसाद जायसवाल के नाम पर जारी हुई थी।प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 1500 किमी सड़क बन सकती है। PMGSY के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, 1 किमी सड़क बनाने की राष्ट्रीय औसत लागत करीब 55 से 65 लाख रुपए है। मप्र में ये लागत 50 से 55 लाख के करीब है। वहीं, इतने पैसों में शहर में 750 किमी सीमेंट और डामर की सड़क बन सकती है। 1 किमी लंबी सड़क बनाने में औसतन एक करोड़ रुपए का खर्च आता है।756 करोड़ में मप्र में 7-8 नए जिला अस्पताल सभी आधुनिक उपकरण समेत तैयार हो सकते हैं। एक अस्पताल को बनाने की लागत करीब 100 करोड़ रुपए आती है। साथ ही 10 लाख रुपए की लागत से एक जनऔषधि केंद्र स्थापित होता है। ऐसे में इतने पैसों में 7500 जन औषधि केंद्रों की स्थापना की जा सकती है।756 करोड़ रुपए में 750 नए स्कूल बन सकते हैं या पुराने स्कूलों को सुधारा जा सकता है। एक स्कूल बिल्डिंग बनाने में करीब 1 करोड़ रुपए का खर्च आता है। वहीं, 15 हजार स्कूलों में 15 हजार स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जा सकते हैं। एक स्मार्ट क्लासरूम बनाने में 5 लाख रुपए की लागत आती है।इतने पैसों में 5 लाख से ज्यादा गरीबों के पक्के मकान बन सकते हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री आवास योजना में एक हितग्राही को औसतन 1.5 लाख रुपए दिए जाते हैं। साथ ही 1.5 करोड़ रुपए प्रति गांव की लागत से 500 गांवों में नल-जल योजना का क्रियान्वयन हो सकता है।कैग रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2022 तक खनन के लिए पट्टे हासिल करने वाले 45 ठेकेदारों ने सरकार द्वारा निर्धारित मात्रा से ज्यादा बजरी, लाल रेत, संगमरमर, रेत और डोलोमाइट का खनन किया। खनिज विभाग इन ठेकेदारों से न तो रॉयल्टी वसूल कर सका और न ही बकाएदारों पर जुर्माना लगाया। नतीजतन सरकार को 630 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। खास बात यह है कि खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन की सूचना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तक नहीं दी। बावजूद इसके खनिज के अवैध परिवहन को टीपी देना जारी रखा। इसी तरह तीन जिलों- छिंदवाड़ा, सागर और सीहोर में 10 ठेकेदारों ने बिना अनुमति खनन किया। जिसकी रॉयल्टी का का बाजार मूल्य 81 करोड़ रुपए आंका गया है।विधायक की कंपनियों से 520 करोड़ की रिकवरी होगी, कटनी-जबलपुर में अवैध खुदाई पर एक्शन मध्यप्रदेश सरकार, कटनी से जुड़ी तीन माइनिंग कंपनियों से 520 करोड़ रुपए की रिकवरी करेगी। इनमें से 440 करोड़ रुपए, खनन की स्वीकृत सीमा से अधिक आयरन अयस्क खुदाई जबकि 80 करोड़ से ज्यादा, जीएसटी चोरी का जुर्माना है। ये तीनों कंपनियां विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक से संबंधित हैं।भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों ने किया सड़क जामबाढ़ के पानी में डूबकर बच्ची की मौतखगड़िया, वैशाली में बाढ़, 112 स्कूल बंदविधानसभा का मानसून सत्र एक सितंबर से संभावितदरभंगा के पोखराम में घर में घुसा बारिश का पानीगोरखपुर में बाढ़ पीड़ितों को इस बार कच्चा चना मिलेगा
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