विस्तीर्ण : हिंदी हैं हम शब्द श्रंखला

साहित्य News

विस्तीर्ण : हिंदी हैं हम शब्द श्रंखला
हिंदीशब्द श्रंखलाविस्तीर्ण
  • 📰 Amar Ujala
  • ⏱ Reading Time:
  • 65 sec. here
  • 10 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 53%
  • Publisher: 51%

हिंदी हैं हम शब्द श्रंखला में आज का शब्द है - विस्तीर्ण। प्रस्तुत है गयाप्रसाद शुक्ल की कविता 'सनेही' जो इस शब्द का भाव स्पष्ट करती है।

हिंदी हैं हम शब्द श्रंखला में आज का शब्द है- विस्तीर्ण , जिसका अर्थ है- विस्तृत, जो दूर तक फैला हुआ हो। प्रस्तुत है गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' कविता- तू है महासागर अगम तू है गगन विस्तीर्ण तो मैं एक तारा क्षुद्र हूँ, तू है महासागर अगम मैं एक धारा क्षुद्र हूँ । तू है महानद तुल्य तो मैं एक बूँद समान हूँ, तू है मनोहर गीत तो मैं एक उसकी तान हूँ ।। तू है सुखद ऋतुराज तो मैं एक छोटा फूल हूँ, तू है अगर दक्षिण पवन तो मैं कुसुम की धूल हूँ । तू है सरोवर अमल तो मैं एक उसका मीन हूँ, तू है पिता तो पुत्र मैं तब

अंक में आसीन हूँ ।। तू अगर सर्वधार है तो एक मैं आधेय हूँ, आश्रय मुझे है एक तेरा श्रेय या आश्रेय हूँ । तू है अगर सर्वेश तो मैं एक तेरा दास हूँ, तुझको नहीं मैं भूलता हूँ, दूर हूँ या पास हूँ ।। तू है पतित-पावन प्रकट तो मैं पतित मशहूर हूँ, छल से तुझे यदि है घृणा तो मैं कपट से दूर हूँ । है भक्ति की यदि भूख तुझको तो मुझे तब भक्ति है, अति प्रीति है तेरे पदों में, प्रेम है, आसक्ति है ।। तू है दया का सिन्धु तो मैं भी दया का पात्र हूँ, करुणेश तू है चाहता, मैं नाथ करुणामात्र हूँ । तू दीनबन्धु प्रसिद्ध है, मैं दीन से भी दीन हूँ, तू नाथ ! नाथ अनाथ का, असहाय मैं प्रभु-हीन हूँ ।। तब चरण अशरण-शरण है, मुझको शरण की चाह है, तू शीत करता दग्ध को, मेरे हृदय में दाह है । तू है शरद-राका-शशी, मन चित्त चारु चकोर है, तब ओट तजकर देखता यह और की कब ओर है ।। हृदयेश ! अब तेरे लिए है हृदय व्याकुल हो रहा, आ आ ! इधर आ ! शीघ्र आ ! यह शोर यह गुल हो रहा । यह चित्त-चातक है तृषित, कर शान्त करुणा-वारि से, घनश्याम ! तेरी रट लगी आठों पहर है अब इसे ।। तू जानता मन की दशा रखता न तुझसे बीच हूँ, जो कुछ भी हूँ तेरा किया हूँ, उच्च हूँ या नीच हूँ । अपना मुझे, अपना समझ, तपना न अब मुझको पड़े, तजकर तुझे यह दास जाकर द्वार पर किसके अड़े ।। तू है दिवाकर तो कमल मैं, जलद तू, मैं मोर हूँ, सब भावनाएँ छोड़कर अब कर रहा यह शोर हूँ । मुझमें समा जा इस तरह तन-प्राण का जो तौर है, जिसमें न फिर कोई कहे, मैं और हूँ तू और है ।

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Amar Ujala /  🏆 12. in İN

हिंदी शब्द श्रंखला विस्तीर्ण गयाप्रसाद शुक्ल सनेही कविता तुलना प्रेम

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

अनुरंजित: भगवतीचरण वर्मा की कविताअनुरंजित: भगवतीचरण वर्मा की कविताहिंदी हैं हम शब्द श्रंखला में आज का शब्द है अनुरंजित। भगवतीचरण वर्मा की कविता में अनुरंजित शब्द की व्याख्या और भावनाओं का चित्रण है।
Read more »

हिंदी हैं हम: गोरजहिंदी हैं हम: गोरजसुमित्रानंदन पंत की एक कविता का हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में गोरज शब्द का अर्थ और चित्रण.
Read more »

सुमित्रानंदन पंत की कविता पर गोरज शब्द श्रंखलासुमित्रानंदन पंत की कविता पर गोरज शब्द श्रंखलाहिंदी हैं हम शब्द श्रंखला में आज का शब्द है गोरज। सुमित्रानंदन पंत की एक कविता प्रस्तुत है
Read more »

गोरज: सुमित्रानंदन पंत की कवितागोरज: सुमित्रानंदन पंत की कविताहिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- गोरज। सुमित्रानंदन पंत की एक कविता प्रस्तुत है जिसमें गोरज का अर्थ समझाया गया है
Read more »

सुमित्रानंदन पंत: गोरजसुमित्रानंदन पंत: गोरजहिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है गोरज, जिसका अर्थ है गौ के खुरों से उड़ती हुई गर्द या धूल। प्रस्तुत है सुमित्रानंदन पंत की कविता - गोरज.
Read more »

सुमित्रानंदन पंत की कविता 'गोरज'सुमित्रानंदन पंत की कविता 'गोरज'हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है गोरज। प्रस्तुत है सुमित्रानंदन पंत की गोरज कविता।
Read more »



Render Time: 2026-04-02 06:01:02