लोकसभा चुनाव: कुछ ऐसा है कैराना का इतिहास, जहां पड़ी थी महागठबंधन की नींव
लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए को सत्ता से बाहर करने के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी , बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने महागठबंधन कर लिया है. कागज पर यह महागठबंधन बीजेपी पर भारी पड़ता दिखाई देता है.
लोगों की नजर में यह महागठबंधन भले ही लोकसभा चुनाव को देखते हुए हुआ हो, लेकिन इस महागठबंधन की नींव 2018 में ही पड़ गई थी. 2018 में फूलपुर और गोरखपुर सीट पर उपचुनाव हुए, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा. इस जीत से विपक्ष काफी उत्साहित हुआ. इसके बाद कैराना लोकसभा सीट, जिस पर का कब्जा था, उस पर उपचुनाव हुआ. इस उपचुनाव में सपा-बसपा और रालोद एक होकर चुनाव लड़े, जिसके नतीजे स्वरूप बीजेपी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा.कैराना लोकसभा सीट साल 1962 में अस्तित्व में आई थी. इस सीट के अंतर्गत 5 विधानसभा क्षेत्र शामली, थानाभवन, कैराना शहर, गंगोह और नाकुर आते हैं. इस सीट के चुनावी इतिहास पर नज़र डालें तो यहां किसी एक पार्टी का प्रभुत्व कभी नहीं रहा. 1962 में यहां के जाट किसान नेता यशपाल सिंह ने इंडिपेंडेंट लड़करको हरा दिया था. 1967 में भी ये सीट संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के गयूर अली खान ने जीती. साल 1971 में कांग्रेस ने यहां खाता खोला और शफकत जंग ने चुनाव जीता. हालांकि 1977 और 1980 के चुनावों में ये सीट जनता दल के पास रही. 1984 में पीएम इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति की लहर में चौधरी अख्तर हसन ने बड़ी जीत दर्ज की. जनता दल ने फिर इस सीट पर वापसी की और 1989, 1991 के चुनावों में जनता दल के हरपाल सिंह ने अख्तर हसन को हराया. 1996 में अख्तर हसन के बेटे मुनव्वर हसन ने कांग्रेस का साथ छोड़कर सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. हालांकि दो ही साल बाद 1998 में बीजेपी के वीरेन्द्र वर्मा ने मुन्नवर को हरा दिया. इसके बाद साल 1999 और 2004 में ये सीट आरएलडी के आमिर आलम खान और अनुराधा चौधरी के पास रही. 2009 के लोकसभा चुनाव में मुन्नवर की पत्नी तबस्सुम ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंची. 2014 में बीजेपी के दिवंगत हुकुम सिंह ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी.2018 में बीजेपी के तत्कालीन सांसद हुकुम सिंह का निधन हो गया. इसके बाद इस सीट पर उपचुनाव हुए. बीजेपी ने इस सीट पर हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को टिकट दिया. वहीं राष्ट्रीय लोक दल ने तबस्सुम बेगम को टिकट दिया, जो दो दिन पहले तक सपा में ही थीं. कैराना उपचुनाव से पहले यूपी की दो लोकसभा सीटों फूलपुर और गोरखपुर पर उपचुनाव हुए थे. इन दोनों सीटों पर बीजेपी का कब्जा था.
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