पार्टी के स्टार प्रचारक हेने के बावजूद भी लोकसभा चुनाव से क्यों बाहर हो गए हैं ये नेता? BJP4India myogiadityanath yadavakhilesh Mayawati samajwadiparty INCUttarPradesh BJP4UttarPrdesh anilrai123
आगामी लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की राजनीति चार बड़े राजनीतिक चेहरों के इर्द गिर्द घूमती नजर आ रही है. ये चार बड़े राजनीतिक चेहरे अलग-अलग पार्टियों और अलग-अलग इलाकों से हैं, लेकिन इनके बिना इस चुनाव में उत्तर प्रदेश की राजनीति की कल्पना भी नहीं की जा सकती.
प्रदेश के बड़े राजनीतिक चेहरों में पहला नाम मुख्यमंत्रीय योगी आदित्यनाथ का है. जिन्होंने अपने दो वर्ष के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में पार्टी में एक बड़ी हैसियत बनाई है. आज वे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के कई राज्यों में बीजेपी के स्टार प्रचारक बन गए हैं. वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में मोदी के बाद प्रदेश में कोई पार्टी का प्रमुख चेहरा है, तो वह योगी आदित्यनाथ ही हैं. पार्टी उन्हीं के नेतृत्व में प्रदेश के अंदर लोकसभा का चुनाव लड़ेगी. उत्तर प्रदेश के दूसरे प्रमुख राजनीति चेहरा हैं, पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव. गौरतलब है कि 2014 से 2019 तक आते-आते एसपी में मुलायम युग पूरी तरह खत्म हो चुका है. अब पार्टी में सिर्फ एक ही चेहरा अखिलेश यादव का है. बात करें तीसरे चेहरे की तो वो बीएपी सुप्रीमों मायावती हैं. जबकि चौथा चेहरा कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का है. जिन्होंने हाल ही में राजनीति में इंट्री मारी है, लेकिन उनके कद को किसी के मुकाबले कमतर नहीं माना जा सकता.ध्यान देने वाली बात है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के चारों बड़े चेहरों में बहुत सारी असमनताएं हैं. माया-अखिलेश को छोड़ दें, तो ये सारे चेहरे एक दूसरे के खिलाफ खड़े हैं. लेकिन इन चारों बड़े राजनीतिक चेहरों के बीच एक समनाता दिखाई दे रही है और वो हैं, लोकसभा चुनाव के मैदान से बाहर रहने का फैसला किया है. सुत्रों की माने तो ये चारों नेता अलग-अलग कारणों से लोकसभा चुनाव से बाहर रह सकते हैं. क्योंकि कांग्रेस और एसपी ने अभी तक की अपनी लिस्ट में इन नेताओं का नाम नहीं डाला है.सबसे पहले बात करते हैं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की. पार्टी योगी को लोकसभा का चुनाव लड़ा कर मुख्यमंत्री बदले जाने का संकेत नहीं देना चाहेगी. मुख्यमंत्री के चुनाव मैदान में उतरते से यही संदेश जाएगा कि प्रदेश का मुख्यमंत्री बदला जा सकता है. वहीं बसपा सुप्रीमों मायावती पिछले 15 सालों से कोई लोकसभा चुनाव नहीं लड़ी हैं. पार्टी के सुत्रों की माने तो माया इस बार भी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी. हालांकि गाहे-बगाहे माया के चुनाव लड़ने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन पार्टी के करीबी सूत्रों का दावा है कि मायावती ने चुनाव प्रचार पर फोकस करने के लिए चुनाव न लड़ने का फैसला किया है.समाजवादी पार्टी ने अपने लोकसभा प्रत्याशियों की चौथी लिस्ट जारी कर चुकी है. जिसमें पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का नाम अभी तक शामिल नहीं किया गया है. सूत्रों के अनुसार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए सुरक्षित सीट की तलाश की जा रही है. शुरुआती दौर में ये चर्चा थी कि अखिलेश यादव कन्नौज से चुना लड़ेगें लेकिन डिंपल के सीट छोड़ने से इनकार के बाद अखिलेश अब आजमगढ़ जाने की तैयारी में हैं. हालांकि यादव परिवार में तेज प्रताप की सीट को लेकर अभी पेंच फंसा हुआ हैं.अखलेश यादव ने अपर्णा का टिकट भले ही काट दिया हो लेकिन तेज प्रताप को लेकर मुलायम अभी भी अड़े हुए हैं. यादव परिवार के करीबी सुत्रों की मानें तो मुलायम आजमगढ़ से तेज प्रताप यादव कोलड़ाना चाहते हैं. अब बात आती है कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की, जिन्होंने हाल ही में पार्टी की सक्रिय राजनीति में कदम रखा है. कांग्रेस ने रायबरेली और अमेठी से सोनिया गांधी और राहुल गांधी के टिकट का ऐलान कर दिया है. प्रियंका के आने का साथ उनके चुनाव लडने की ख़बरे आई थी, लेकिन कांग्रेस के सूत्र प्रियंका के चुनाव लड़ने की खबरों से इनकार कर रहे हैं. साफ है उत्तर प्रदेश की राजनीति जिन चेहरों पर है, वो सीधे-सीधे मैदान में जाने से कतरा रहे हैं.
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