गैस आपूर्ति में भारी कमी से लुधियाना के एमएसएमई सेक्टर पर गहरा संकट आ गया है। सामान्य से 5-10 ही गैस उपलब्ध होने के कारण उत्पादन 50 तक गिर गया है, जिससे कई इकाइयाँ बंद होने के कगार पर हैं।
मुनीश शर्मा, लुधियाना। गैस सप्लाई में आई भारी कमी ने देश के एमएसएमई सेक्टर को गहरे संकट में डाल दिया है। सामान्य दिनों की तुलना में गैस की उपलब्धता घटकर महज 5 से 10 प्रतिशत रह गई है, जिससे उद्योगों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई इकाइयों को मजबूरी में उत्पादन घटाना पड़ा है, जबकि कुछ उद्योग पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। गैस की कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। अधिकांश एमएसएमई इकाइयों का उत्पादन घटकर लगभग 50 प्रतिशत तक सिमट गया है। जिन उद्योगों में गैस का उपयोग अनिवार्य है, वहां स्थिति और भी गंभीर है। खासकर पेंट, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, हार्डनिंग, हीट ट्रीटमेंट और स्टील रोलिंग मिल्स जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन उद्योगों में गैस के बिना उत्पादन प्रक्रिया पूरी करना लगभग असंभव होता है। स्थिति से निपटने के लिए कुछ उद्योगों ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में डीजल भट्ठियों का सहारा लिया है, लेकिन यह विकल्प भी राहत देने के बजाय नई समस्या खड़ी कर रहा है। हाल ही में इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में करीब 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादन लागत में भारी इजाफा हो गया है। बढ़ती लागत के कारण उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा में बने रहना मुश्किल हो रहा है। गैस संकट ने एमएसएमई सेक्टर के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।चैंबर आफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग के प्रधान उपकार सिंह आहुजा का कहना है कि मौजूदा समय इंडस्ट्री के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। पंजाब जैसे राज्यों में एमएसएमई सेक्टर की संख्या अधिक है और यहां माइक्रो उद्योग बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार छोटे उद्योगों के लिए अचानक वैकल्पिक व्यवस्था करना आसान नहीं होता। यही कारण है कि कई माइक्रो यूनिट्स आधी क्षमता पर ही काम कर पा रही हैं, जबकि कुछ पूरी तरह बंद पड़ी हैं। फेडरेशन आफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल आर्गनाइजेशन के प्रधान गुरमीत सिंह कुलार का कहना है कि यह संकट विशेष रूप से माइक्रो और छोटे उद्योगों के लिए गंभीर है। बड़ी कंपनियों के पास संसाधन और विकल्प होते हैं, जिससे वे ऐसे मुश्किल समय में खुद को संभाल लेती हैं। लेकिन छोटे उद्योगों के पास सीमित संसाधन होते हैं, जिससे वे जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। उद्योग संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस संकट के समय माइक्रो और छोटे उद्योगों को विशेष राहत दी जाए। उनका कहना है कि एमएसएमई सेक्टर उत्पादन शृंखला की रीढ़ है और बड़ी इंडस्ट्री भी इन पर निर्भर करती है।.
मुनीश शर्मा, लुधियाना। गैस सप्लाई में आई भारी कमी ने देश के एमएसएमई सेक्टर को गहरे संकट में डाल दिया है। सामान्य दिनों की तुलना में गैस की उपलब्धता घटकर महज 5 से 10 प्रतिशत रह गई है, जिससे उद्योगों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई इकाइयों को मजबूरी में उत्पादन घटाना पड़ा है, जबकि कुछ उद्योग पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। गैस की कमी का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। अधिकांश एमएसएमई इकाइयों का उत्पादन घटकर लगभग 50 प्रतिशत तक सिमट गया है। जिन उद्योगों में गैस का उपयोग अनिवार्य है, वहां स्थिति और भी गंभीर है। खासकर पेंट, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, हार्डनिंग, हीट ट्रीटमेंट और स्टील रोलिंग मिल्स जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन उद्योगों में गैस के बिना उत्पादन प्रक्रिया पूरी करना लगभग असंभव होता है। स्थिति से निपटने के लिए कुछ उद्योगों ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में डीजल भट्ठियों का सहारा लिया है, लेकिन यह विकल्प भी राहत देने के बजाय नई समस्या खड़ी कर रहा है। हाल ही में इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में करीब 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादन लागत में भारी इजाफा हो गया है। बढ़ती लागत के कारण उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा में बने रहना मुश्किल हो रहा है। गैस संकट ने एमएसएमई सेक्टर के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।चैंबर आफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग के प्रधान उपकार सिंह आहुजा का कहना है कि मौजूदा समय इंडस्ट्री के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। पंजाब जैसे राज्यों में एमएसएमई सेक्टर की संख्या अधिक है और यहां माइक्रो उद्योग बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार छोटे उद्योगों के लिए अचानक वैकल्पिक व्यवस्था करना आसान नहीं होता। यही कारण है कि कई माइक्रो यूनिट्स आधी क्षमता पर ही काम कर पा रही हैं, जबकि कुछ पूरी तरह बंद पड़ी हैं। फेडरेशन आफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल आर्गनाइजेशन के प्रधान गुरमीत सिंह कुलार का कहना है कि यह संकट विशेष रूप से माइक्रो और छोटे उद्योगों के लिए गंभीर है। बड़ी कंपनियों के पास संसाधन और विकल्प होते हैं, जिससे वे ऐसे मुश्किल समय में खुद को संभाल लेती हैं। लेकिन छोटे उद्योगों के पास सीमित संसाधन होते हैं, जिससे वे जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। उद्योग संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इस संकट के समय माइक्रो और छोटे उद्योगों को विशेष राहत दी जाए। उनका कहना है कि एमएसएमई सेक्टर उत्पादन शृंखला की रीढ़ है और बड़ी इंडस्ट्री भी इन पर निर्भर करती है।
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