राहुल गांधी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: राफेल, राम मंदिर और गठबंधन पर एनबीटी से खुलकर की बात-Navbharat Times

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राहुल गांधी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: राफेल, राम मंदिर और गठबंधन पर एनबीटी से खुलकर की बात-Navbharat Times
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राहुल गांधी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: राफेल, राम मंदिर और गठबंधन पर एनबीटी से खुलकर की बात, पढ़ें पूरा इंटरव्यू via NavbharatTimes LokSabhaElections2019 ElectionsWithTimes NarendraModi RahulGandhi

नई दिल्ली आम चुनाव में इस बार कांग्रेस की साख दांव पर है। 2014 आम चुनाव में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस के सामने 2019 आम चुनाव में प्रदर्शन को बेहतर करने की चुनौती है। क्या पार्टी अपने अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में ऐसा कर पाएगी? क्या राहुल गांधी नरेन्द्र मोदी से मुकाबले के लिए तैयार हैं? क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन पर क्या है राहुल गांधी की राय? क्या सोचते हैं प्रियंका गांधी के बारे में? ऐसे तमाम सवालों पर एनबीटी के लिए नदीम और नरेन्द्र नाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से बात की। बातचीत के प्रमुख अंश : सवाल: तीन चरणों का चुनाव खत्म हो चुका है, क्या आकलन है आपका? जवाब: कांग्रेस की अगुवाई वाला यूपीए यह चुनाव जीतेगा। परिणाम हमारे पक्ष में आएंगे क्योंकि देश बीजेपी सरकार से निराश है और बदलाव चाहता है। सीटों की संख्या की बजाए देश की जनता का मूड देखिए। वातावरण में बदलाव साफ दिख रहा है। इसके तीन कारण हैं। बेरोजगारी चरम सीमा पर है, युवाओं में आक्रोश है, लेकिन नरेंद्र मोदी बेरोजगारी पर बात करने को भी तैयार नहीं। भ्रष्टाचार, जो चारों ओर छाया हुआ है। खासकर राफेल सौदे में हुए भ्रष्टाचार के सारे सुराग मोदी जी के दरवाजे तक पहुंचते हैं।देश की जनता नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ खड़ी हो रही है। यह 23 मई को चुनाव के परिणामों में दिखाई देगा। सवाल: चलिए मान लेते हैं कि यूपीए सत्ता में आ रहा है तो फिर बड़ा सवाल यह कि प्रधानमंत्री कौन होगा? क्या आप प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं या फिर ममता, मायावती और शरद पवार में से कोई आपकी पसंद होगा? जवाब: प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला हम 23 मई को परिणाम आने के बाद करेंगे। इस पर हमारे गठबंधन के सहयोगियों एवं अन्य विपक्षी नेताओं के साथ हमारी सहमति है। यह फैसला देशकी जनता की आवाज को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सवाल: अगर पूरे परिदृश्य को देखा जाए तो क्या आपको लगता नहीं हैं कि कांग्रेस पार्टी की निर्भरता क्षेत्रीय दलों पर ज्यादा रहेगी क्योंकि कुछ राज्यों को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में क्षेत्रीय दल ही मुख्य मुकाबले में हैं? जवाब: हमारा गठबंधन समान विचारधारा वाले दलों के साथ है और देश के लिए हमारा विज़न भी समान है। हम सहयोगी दलों का आदर करते हैं और गठबंधन की राजनीति को सहयोग की राजनीति के रूप में देखते हैं, न कि निर्भरता या शोषण की राजनीति के रूप में। गठबंधन के सहयोगियों को लेकर मेरा रुख हमेशा लचीला रहा है। यदि हमारी विचारधारा समान है, हम एक दूसरे का सम्मान करते हैं, तो हमें गठबंधन स्वीकार है। क्षेत्रीय दलों के साथ हमारी साझेदारी बहुत सफल होने वाली है। सवाल: यूपी और बिहार एक वक्त कांग्रेस के गढ़ हुआ करते थे, लेकिन आज दोनों राज्यों में कांग्रेस सबसे कमजोर स्थिति में है, इन दो राज्यों में अपने को मजबूत करने के लिए कांग्रेस के पास क्या कोई एक्शन प्लान है? जवाब: इन दो राज्यों में हमारा इतिहास बहुत पुराना है। यहां पर हमारे संगठन की संरचना बहुत मजबूत है। बिहार में हम गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन यूपी में अकेले लड़ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस सीटें जीतेगी। हमने यूपी में प्रियंका जी और सिंधिया जी को भेजा है। बिहार में हमारे राज्य प्रभारी, शक्ति सिंह गोहिल ने बहुत अच्छा काम किया है। इसके अलावा हम अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ अपने टेक्नॉलजी प्लैटफॉर्म, ‘शक्ति’ के माध्यम से भी सीधे बात कर पाते हैं। इसने हमें भारत में कांग्रेस के हर कार्यकर्ता से जोड़ दिया है, और हम उनसे सीधे बात करते हैं। हर पोलिंग बूथ से हमारे कार्यकर्ता हमें नियमित तौर पर इनपुट दे रहे हैं। सवाल: हाल के वर्षों में मिडिल क्लास, शहरी और सवर्ण तबका कांग्रेस से कटता गया? क्या वजह आप मानते हैं, जिसकी वजह से उनतक कांग्रेस अपनी बात लेकर नहीं पहुंच पा रही है ? जवाब: कांग्रेस पार्टी हर भारतीय की पार्टी है और हर किसी की मदद करती है। जब नोटबंदी और जीएसटी से छोटे व्यापारियों पर मार पड़ी, तो उनके साथ लड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी खड़ी हुई। भारत में जहां कहीं भी समस्या आती है, तो कांग्रेस पार्टी उस समस्या के समाधान के लिए खड़ी होती है। हर भारतीय की आवाज बनती है। इसके अलावा जो कुछ भी है, वो मीडिया का बनाया हुआ है, सच्चाई नहीं। हमारे घोषणापत्र को देखिए, उसमें मध्यम वर्ग के लिए कितना कुछ है। टैक्स ब्रेक से लेकर बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, बेहतर शहर और कस्बे बनाने की प्रतिबद्धता। हमारी हर नीति सभी को साथ लेकर चलने की है,ताकि कोई छूट न जाए। कांग्रेस पार्टी हर स्थिति में देश के साथ खड़ी रहेगी, देश के लिए काम करेगी, देश के हर नागरिक को आत्मसात करेगी, चाहे उसकी जाति, वर्ण, उम्र या लिंग कोई भी हो। सवाल: मोदी सरकार के खिलाफ आपने राफेल को बड़ा मु्द्दा बनाया हुआ है, इसे कितना असरकारी मानते हैं? जवाब: सच्चाई बिल्कुल साफ है। राफेल सौदे में प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने अपने मित्र अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ रु.

का कान्ट्रैक्ट दिलवाने के लिए देश की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया। मोदी जी के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने बारे में मुझे जरा भी संदेह नहीं है, वर्ना मैं इसे इतना बलपूर्वक न उठाता। एक अखबार में प्रकाशित दस्तावेज साबित करते हैं कि प्रधानमंत्री राफेल सौदे में पैरेलेल नेगोसिएशन कर रहे थे। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने साफ कहा कि इस कान्ट्रैक्ट में अनिल अंबानी को शामिल करने का दबाव मोदी जी ने डाला। नेगोसिएशन कमेटी के सदस्यों का मतभेद सबके सामने आ गया, जिससे यह भी साफ हो गया कि उन्हें यह सौदा मंजूर करने के लिए मजबूर किया गया था, जिस पर सदस्यों को गंभीर आपत्ति थी। अब इससे ज्यादा सबूत और क्या चाहिए? सवाल: यूपीए सरकार आने पर उसका इस मुद्दे पर क्या एक्शन प्लान होगा? जवाब: हम इस सौदे की जाँच करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि वो सभी लोग, जिन्होंने देशहित की बजाए अपने व्यक्तिगत हित को प्राथमिकता दी, उन सभी को सजा मिले। जहां तक राफेल लड़ाकू जहाज की बात है, मेरा मानना है कि यह लड़ाकू जहाज अच्छा है और एयरफोर्स ने इसे गहरे परीक्षण के बाद चुना है। सवाल: एक वर्ग की राय यह भी है कि प्रधानमंत्री के लिए आपने जो नारा दिया, वह नहीं देना चाहिए। प्रधानमंत्री पद की गरिमा होती है। क्या आपको इस बात का डर नहीं कि आपका यह नारा बैकफायर भी कर सकता है? जवाब: नहीं मुझे पूरा यकीन है कि यह नारा एक ही दिशा में फायर करेगा। बैक फायर नहीं करेगा। मुझसे संसद भवन में एक पत्रकार ने ही कहा, राहुल जी यह नारा देश के दिल के अंदर घुस गया है। आप बाहर जाइये और कहिए,‘चौककीदार’, लोग कहेंगे, ‘चोर है’। मैं कहीं भी, किसी भी राज्य में, जहां भी जाता हूँ, मैं कहता हूँ,‘चौकीदार’, तो लोग कहते हैं, ‘चोर है’। यह कोई हमारा बनाया हुआ नारा नहीं, बल्कि यह सच्चाई है। सवाल: न्याय योजना को लेकर आप बहुत आशान्वित हैं लेकिन क्या इसे कांग्रेस प्रभावी तरीके से वोटर तक पहुंचाने में सफल हो रही है ? और अगर आप सत्ता में आते हैं तो इसे लागू कर पाने के लिए देश की अर्थव्यस्था तैयार है? जवाब: न्याय एक सोची समझी योजना है। हम करोड़ों भारतीयों के हाथों में कैश देंगे और सुनिश्चित करेंगे कि उनके पास खर्च करने के लिए पैसा हो। बड़ी संख्या में नौकरियों का निर्माण होगा। अर्थव्यवस्था फिर से ट्रैक पर आएगी। यह नोटबंदी की तरह कोई बिना सोचे समझे लिया गया फैसला नहीं है कि अचानक एक रात 8 बजे एक व्यक्ति द्वारा ले लिया गया। न्याय पर काफी लंबे समय तक शोध किया गया। पैसा कहां से आएगा? अनिल अंबानी और उनके पूंजीपति मित्रों की जेब से आएगा, जो देश को लूट रहे हैं। यह मध्यम वर्ग की जेब से नहीं लिया जाएगा। आय कर में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन होगा, पैसा वहां सेआएगा। । हम लोगों तक इस योजना की खूबी को पहुंचाएंगे और उनका समर्थन लेकर आएंगे। सवाल: यह भी चर्चा उठती है कि अगर कांग्रेस सत्ता में आयी तो रघुराम राजन, जनरल हुड्डा के लिए भी आप उसी तरह भूमिका तलाश सकते हैं जैसा आपने उन्हें अपने लिए घोषणा पत्र बनाने में किया? जवाब: हमारे पास अत्यधिक प्रतिभाशाली लोग हैं, और इसके अलावा ऐसे भी लोग हैं, जो पार्टी से बाहर रहकर कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखते हैं। उनमें से अनेक ने हमारे घोषणापत्र के निर्माण की प्रक्रिया में अपने विचार रखे और अपना योगदान दिया। हम उनके सहयोग के लिए आभारी हैं और जब हम सरकार का गठन करेंगे, तो ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ काम करने के तरीके तलाशेंगे। सवाल: इस बार कांग्रेस ने घोषणापत्र को बनाने में बहुत मेहनत की। बहुत वक्त लगाया। कई वादों के साथ चुनाव में उतरी। इसमें आप खुद बहुत इन्वॉलव हुए। क्या आपको लगता है कि चुनाव में वोट देते समय वोटर घोषणा पत्र को तरजीह देते हैं? जवाब: हमने जब काम शुरु किया, मैंने टीम को कहा कि मेरी रुचि यह सुनने में नहीं है कि कांग्रेस पार्टी के बुद्धिजीवी, विशेषज्ञ और प्रोफेशनल्स क्या चाहते हैं? वो क्या चाहते हैं, यह मुझे मालूम है। मेरी रुचि यह सुनने में है कि इस देश का नागरिक क्या चाहता है। मैं चाहता था कि यह देश का घोषणापत्र बने। मैं इसे केवल कुछ लोगों का घोषणापत्र बनाना नहीं चाहता। मैंने टीम को कहा, मैं चाहता हूं कि आप हजारों लोगों से बात करें। मुझे इसकी परवाह नहीं यदि विचार अजीबोगरीब भी हों, मैं उसे अपने समक्ष रख परखना चाहता हूं। मैं देखना चाहता हूँ कि वह कैसा विचार है। हम सारे विचारों को अपने समक्ष रखेंगे,उसके बाद हम निर्णय करेंगे। हमने घोषणापत्र पारंपरिक रूप से नहीं बनाया। सवाल: वायनाड से चुनाव लड़ने को लेकर आप पर सवाल उठाए गए। उस सीट को चुनने के पीछे आपकी मंशा क्या थी? जवाब: आप दक्षिण भारत में कहीं भी जाएं, हर जगह एक भावना है कि उनकी आवाज कोई नहीं सुनता। यह भारत की एकजुटता के लिए सही नहीं। यह भावना खत्म करने और दक्षिण भारत में रहने वाले हर भारतीय को यह बताने, कि उसकी आवाज भी सुनी जाएगी और आप भी देश का महत्वपूर्ण हिस्सा हो और आप भी भारत हो, यही बताने के लिए मैं दक्षिण भारत में वायनाड से चुनाव लड़ रहा हूं। सवाल: अमेठी और वायनाड दोनों से जगह से जीत की स्थिति में कौन सी सीट रखना चाहेंगे और कौन सी छोड़ना चाहेंगे? जवाब: यह एक कठिन फैसला होगा लेकिन अभी हमने इस बारे में सोचा नहीं है। हमारा फैसला दोनों सीटों के वोटर्स की भावनाओं का ख्याल रखते हुए होगा। सवाल: प्रियंका गांधी के वाराणसी से चुनाव लड़ने की सम्भावना कही जा रही है? प्रियंका गांधी ने खुद कहा है कि इस बारे में कांग्रेस अध्यक्ष को फैसला लेना है? जवाब: प्रियंका को लेकर जो फैसला लेना चाहिए था, पार्टी ने ले लिया है। फैसला क्या हुआ, इस पर अभी हम सस्पेंस बना कर रखना चाहते हैं। सवाल: कहा जाता है कि राष्ट्रवाद और धर्म की बात कांग्रेस को मोदी-शाह की टीम बैकफुट पर धकेल देती है। इन मुद्दों को काउंटर करने के लिए कांग्रेस की रणनीति क्या है? जवाब: हम भाजपा की अतिराष्ट्रवादी और सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं करते। इसमें हमें फ्रंटफुट पर रहने की कोई इच्छा नहीं। एक सच्चे राष्ट्रवादी को युवाओं को नौकरियां दिलाने और किसानों का दर्द दूर करने के लिए चिंतित होना चाहिए। भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण इन सभी मामलों में हम सदैव फ्रंटफुट पर हैं। सवाल: राम मंदिर मुद्दे पर क्या सोच है आपकी? क्या इस विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है। जवाब: जहाँ तक राम मंदिर की बात है, हम इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे। सवाल: नैरेटिव सेट करने के लिएआपने क्या किया? देश का नैरेटिव क्या है? जवाब: नरेंद्र मोदी की बड़ी विफलताओं ने हमारे लिए नैरेटिव तय करने में मदद की। जमीनी मुद्दे क्या हैं, बिल्कुल साफ है। ये हैं -बेरोजगारी, किसानों का पलायन और अर्थव्यवस्था की दयनीय स्थिति। देश की जनता इन्हीं समस्याओं पर बात करना चाहती है। चुनावी विश्लेषक तक यही बात कर रहे हैं।हमारे घोषणापत्र में हमने देश को उस बदहाली से बाहर निकालने का प्रारूप दिया है। दूसरी तरफ भाजपा के घोषणापत्र में नौकरियों की बात तक नहीं की गई है! लगता है कि उनके लिए बेरोजगारी कोई समस्या ही नहीं। बेरोजगारी की दर पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा है और नरेंद्र मोदी इस बारे में बात तक नहीं कर रहे हैं। सवाल: नरेन्द्र मोदी सरकार की तीन सबसे बड़ी विफलताएं गिनाना हो तो वह क्या होगी? जवाब: बेरोजगारी, भारतीय अर्थव्यवस्था का पतन, नोटबंदी और गब्बर सिंह टैक्स। मोदी जी ने अर्थव्यवस्था को डिमोनेटाईज़ किया, हम इसे रिमोनेटाईज़ करेंगे। इसीलिए हम न्याय योजना लेकर आए हैं। उनकी दूसरी बड़ी विफलता है कि उन्हें देश की कृषि की समस्याओं के बारे में थोड़ी सी भी जानकारी नहीं। नरेंद्र मोदी को नहीं पता कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति कृषि है और आप इसे नजरंदाज नहीं कर सकते। कालेधन के खिलाफ लड़ाई में भी वो विफल हो गए। सवाल: आप मंदिर जा रहे हैं। आपको शिवभक्त कहा जा रहा है। कुछ लोग इसे सॉफ्ट हिंदुत्व बता रहे हैं, आप धर्म से जुड़ी राजनीति को किस तरह देखते हैं? जवाब: यदि कोई व्यक्ति या समुदाय मुझे अपने घर या पूजास्थल में आमंत्रित करता है, तो मैं वहां अवश्य जाना चाहता हूँ। मैं उनकी धार्मिक भावनाओं को समझता हूं। और उनका सम्मान करता हूं। यही भारत की संस्कृति है। जहां तक मेरे शिवभक्त होने की बात है, वह मेरा व्यक्तिगत पहलू है। मैं अपनी पहचान का इस्तेमाल वोट लेने के लिए नहीं कर सकता। मैं नहीं मानता कि धर्म को जबरदस्ती राजनीति में लाना चाहिए। इससे समाज में विभाजन और ध्रुवीकरण उत्पन्न होता है।

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