राहुल गांधी जहां रुके, कांग्रेस की वही सीट फंसी: कुटुंबा में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम मुश्किल में; 2020 में...

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राहुल गांधी जहां रुके, कांग्रेस की वही सीट फंसी: कुटुंबा में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम मुश्किल में; 2020 में...
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Bihar Kutumba Assembly Election 2025; Follow Kutumba Vidhan Sabha Election Ground Report, JDU Congress Jansuraj Candidate Latest News Analysis On Dainik Bhaskar (दैनिक भास्कर) 2020 के विधानसभा चुनावों में ललन राम नाराजगी में निर्दलीय चुनाव लड़ गए थे। ललन को करीब 20 हजार वोट मिले थे और राजेश राम की NDA कैंडिडेट से जीत का अंतर करीब 15 हजार ही...

कुटुंबा में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम मुश्किल में; 2020 में जिसने जिताया, वही सामनेबिहार के औरंगाबाद जिले की कुटुंबा सीट पर कांग्रेस की साख दांव पर लगी हुई है। यहां से प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम मैदान में हैं। ये वो सीट भी है, जहां ‘वोट अधिकार यात्रा’ के दौरान न सिर्फ राहुल आए थे, बल्कि ठहरे भी थे। इस बार राजेश राम का सामना उस कैंडिडराजेश राम के सामने NDA की तरफ से HAM के कैंडिडेट ललन राम भुइयां हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में ललन राम नाराजगी में निर्दलीय चुनाव लड़ गए थे। ललन को करीब 20 हजार वोट मिले थे और राजेश राम की NDA कैंडिडेट से जीत का अंतर करीब 15 हजार ही था। ये हिसाब-किताब छोड़ भी दें, तो कुटुंबा में राजेश राम को लेकर लोगों में नाराजगी नजर आती है। इलाके के अम्बा गांव में कोचिंग सेंटर चलाने वाले 33 साल के रवि कुमार पाल कहते हैं, ‘मैं अब तक महागठबंधन प्रत्याशी को समर्थन देता आया हूं। राजेश राम का रवैया ठीक नहीं है। जीतने के बाद उनका लोगों से मिलना-जुलना नहीं है। इसलिए उन्हें हटाना जरूरी लगता है।’ रवि कुमार अकेले नहीं हैं। जनसंपर्क पर निकल रहे राजेश राम का बीते 15 दिनों में लगभग 4 गांवों में विरोध हो चुका है। पेचकस, रिसियप, दुलारे और नेवड़ा गांव में लोगों ने राजेश राम को घेरकर काम नहीं होने की शिकायत की। ऐसे में क्या प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अपना गढ़ बचा पाएंगे, कुटुंबा में लोगों के क्या मुद्दे हैं? यही जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची।कुटुंबा बिहार के औरंगाबाद जिले में एक प्रखंड है। यह औरंगाबाद लोकसभा की 6 विधानसभा सीटों में से एक है। कुटुंबा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। अनुसूचित जाति के यहां 29.

2% और मुस्लिम समुदाय से लगभग 7.8% मतदाता हैं। यह पूरी तरह ग्रामीण क्षेत्र है। यहां पिछली दो बार से मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार राम चुनाव जीत रहे हैं। राजेश राम को 2010 में यहां हार मिली थी। फिर 2015 में उन्होंने 10,098 मतों और 2020 में बढ़ाकर 16,653 मतों के अंतर से जीत हासिल की। राजेश राम के सामने इस बार NDA की तरफ से HAM पार्टी ने ललन राम भुइयां को उतारा है। वहीं जन सुराज ने श्यामबली को टिकट दिया है।कुटुंबा में हलवाई का काम करने वाले 45 साल के धनंजय प्रसाद गुप्ता नेताओं की अनदेखी से नाराज हैं। वे कहते हैं कि कोई भी नेता आता है तो अपने खास लोगों से पूछता है कि जनता की दिक्कतें-लाचारी क्या है। पूछना तो आम आदमी से चाहिए। खास लोग तो सब गलत-सही ही बता देते हैं। वे जीविका योजना का लाभ सभी को नहीं मिलने की शिकायत करते हैं।33 साल के रवि कुमार पाल इलाके के अम्बा गांव में कोचिंग सेंटर चलाते हैं। वे ट्रैफिक जाम और बेरोजगारी को सबसे बड़ी चुनौती बताते हैं। वे कहते हैं, ‘अम्बा में दो-चार गाड़ियों के बाद ही जाम लग जाता है। पिछले 10 साल से यही समस्या देख रहा हूं। रोजगार के अभाव में जीवन चलना मुश्किल हो गया है।' 'स्कूलों की व्यवस्था ठीक-ठाक नहीं है। अगर सरकारी स्कूल अच्छे होते, तो बच्चे मेरे पास क्यों आते।’ चुनाव में रवि कुमार बदलाव की बात करते हैं। वे मौजूदा विधायक राजेश राम को हटाने की बात करते हैं।कुटुंबा के पिपरा गांव में रहने वाले 60 साल के अभय कुमार सिंह होटल में हेल्पर का काम करते हैं। वे भी सड़कों की खराब स्थिति और अस्पताल की कमी को बड़ी समस्या मानते हैं। अभय कहते हैं कि क्षेत्र में कई दिक्कतें हैं। सड़कें बनते ही टूट जाती हैं। इलाके में अस्पताल भी नहीं है। अभय कांग्रेस विधायक राजेश राम से नाराज हैं। अम्बा गांव में टाइल्स बेचने वाले 33 साल के रवि कुमार सिंह खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम से परेशान हैं। वे भी HAM के ललन राम को समर्थन देने की बात करते हैं। वे कहते हैं, ‘यहां NDA का माहौल मजबूत है। ललन राम हर किसी से मुलाकात करते हैं, लेकिन वर्तमान विधायक का रवैया गलत है। जीतने के बाद लोगों से न मिलना, न जुलना है। उनका कई जगह विरोध हो रहा।’कुटुंबा में रहने वाली 60 साल की सूरजवानी देवी जीविका योजना का पैसा न मिलने से नाखुश हैं। हालांकि, वे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई और रोजगार की ठीक व्यवस्था का हवाला देकर NDA को समर्थन देने की बात करती हैं। वे कहती हैं, क्षेत्र में सब ठीक चल रहा है। बच्चे स्कूल जाते हैं। सरकारी स्कूल में पढ़ाई अच्छी है। नौकरी-रोजगार सबकी सही चल रही है। हमारे लिए मोदी जी ठीक हैं। लालू जी नहीं। बाकी जन सुराज वाले नए आए हैं। कुटुंबा के मुस्लिम बहुल गांव नेवड़ा की रहने वाली 55 साल की रुकैया खातून के गांव में जनसंपर्क के लिए पहुंचे राजेश राम का विरोध किया गया था। इसके पीछे वे खराब सड़क, नाली और कब्रिस्तान न होने को कारण बताती हैं। रुकैया जीविका योजना का पैसा मिलने से खुश हैं। वहीं राजेश राम से नाराजगी है, लेकिन इसके बाद भी वे उनके ही समर्थन की बात कहती हैं। इसका कारण पूछने पर वे कहती हैं, ‘समस्याएं हैं, लेकिन ठीक हो जाएंगी।’रुकैया के ही गांव में रहने वाले 30 साल के मोहम्मद आजाद फिलहाल दिल्ली में नौकरी कर रहे हैं। वे स्थानीय स्तर पर रोजगार की कमी और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की खराब हालत को लेकर नाराज हैं। वे कहते हैं कि राजेश राम ने 10 साल काम नहीं किया, लेकिन RJD के गठबंधन की वजह से समर्थन उन्हीं को करेंगे। आजाद बताते हैं, ‘राजेश राम खड़े हैं, तो उन्हें ही मिलेगा, लेकिन 10 साल विधायक रहे, फिर भी कोई काम नहीं हुआ। इतनी सारी समस्याएं हैं, लेकिन विकल्प क्या है। समझ नहीं आ रहा। आखिर में मजबूरी में RJD गठबंधन को ही देना पड़ेगा।’मौजूदा विधायक और बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम अपनी जीत का भरोसा जताते हैं। वे कहते हैं कि इस बार जनता जाति या धर्म के आधार पर नहीं बल्कि महंगाई, बेरोजगारी और विकास के मुद्दे पर मतदान करेगी। राजेश राम दावा करते हैं कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनना तय है। जनता परिवर्तन चाहती है और कांग्रेस उस विश्वास को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। वे कहते हैं, ‘मुद्दा विकास को जारी रखने का है। बिहार में कमाई, दवाई और पढ़ाई जैसे मुद्दे अहम हैं। कुटुंबा में जनता का समर्थन मिल रहा है। यह मेरे लिए सौभाग्य है। हम विकास में विश्वास रखते हैं।’ जगह-जगह विरोध के सवाल पर राजेश राम दावा करते हैं कि ये लोकतंत्र का हिस्सा है। वे कहते हैं, ‘प्रतिपक्ष की भूमिका लोकतंत्र का हिस्सा है। कुटुंबा में यह खूबसूरत लोकतंत्र दिख रहा है, जो अन्य जगहों पर कम ही देखने को मिलता है।’ विपक्षी ललन राम और जन सुराज को लेकर राजेश राम कहते हैं कि हर कोई अपनी कोशिश कर रहा है। हम भी मजबूती से कोशिश कर रहे हैं।विधानसभा क्षेत्र से HAM पार्टी के प्रत्याशी ललन राम भुइयां कहते हैं कि वे 10 साल से सत्ता से दूर हैं, लेकिन फिर भी कुछ-कुछ काम कराते रहे। लोगों के मुद्दों पर बात करते हुए ललन राम कहते हैं, ‘कुछ सड़कें जर्जर हालत में हैं। कुछ लोगों के पक्के मकान नहीं बने। पानी की कहीं समस्या है, तो कहीं नल खराब हो गया। सबका सुधार हो जाएगा। नीतीश कुमार जी ने पेंशन 400 से बढ़ाकर 1,100 कर दी। गरीबों के लिए आवास योजना बहुत कारगर साबित हुई।’ ललन राम जन सुराज पर किसी तरह की टिप्पणी से इनकार करते हैं। वे कहते हैं कि हर पार्टी अलग-अलग है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबको लड़ने का अधिकार है।कुटुंबा से जन सुराज प्रत्याशी श्यामबली कहते हैं कि विधायक राजेश राम का विरोध हो रहा है। उनकी जनता से दूरी बढ़ी है। इसीलिए लोग नया विकल्प खोज रहे हैं। वे आगे कहते हैं, 'जो प्रतिनिधि बनते हैं, वे जनता के बीच नहीं रहते। राजेश राम लगातार दो बार विधायक रहे, लेकिन कभी जनता से न मिले। उनका विरोध हो रहा है। ललन सिंह 5 साल पार्षद-विधायक रहे, लेकिन 20 साल की सरकार में क्षेत्र बदहाल रहा है।’कुटुंबा में 22 साल से पत्रकारिता कर रहे ओम प्रकाश शर्मा सिंचाई और धीमे विकास को क्षेत्र की समस्या मानते हैं। वे कहते हैं कि कुटुंबा को नगर पंचायत का दर्जा मिलना चाहिए, ताकि विकास की गति पकड़े। यही मूल समस्या है। शर्मा ने सिंचाई में सबसे बड़ी बाधा उत्तर कोयल नहर का जिक्र किया, जो पलामू जिले के कुटकुट डैम से जुड़ी है। वे कहते हैं, ‘नहर का जीर्णोद्धार हो रहा है, लेकिन यह बरसाती नदी बनकर रह जाती है। इसे 12 महीने चलाने की जरूरत है, क्योंकि यह कृषि प्रधान क्षेत्र है और औरंगाबाद को धान का कटोरा कहा जाता है। धान की फसल तो हो जाती है, लेकिन बाकी जमीन साल भर खाली रहती है।’ वे कहते हैं कि डैम में पानी संग्रहित हो जाए तो औरंगाबाद-गया के किसानों को साल भर पानी की कमी न रहे। चुनाव पर बात करने पर शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस के दो बार के विधायक राजेश राम और एनडीए के ललन सिंह के बीच सीधा मुकाबला है।22 साल से ही कुटुंबा में रिपोर्टिंग कर रहे विश्वनाथ पांडे मानते हैं कि विधायक राजेश राम और ललन भुइयां के बीच कांटे की टक्कर हैं। वे कहते हैं, ‘दोनों अपने व्यक्तित्व पर टिके हैं। पलड़ा किसी का भारी नहीं।' विश्वनाथ पांडे कहते हैं, 'पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दिलकेश्वर राम के समय कुटुंबा में 26 स्वास्थ्य केंद्र और रेफरल अस्पताल बने। 1990-2015 तक कोई नया केंद्र न खुला, न जीर्णोद्धार हुआ। अब नए भवन और अस्पताल निर्माणाधीन हैं।’हरियाणा में कफ सिरप को लेकर चेतावनीउदयपुर में बढ़ी सर्दी, न्यूनताम तापमान 12 डिग्री तक पहुंचान्यूनतम तापमान सामान्य से 1.6 डिग्री कम, रातें हुईं ठंडीजैसलमेर में दिन-रात के तापमान में 18 डिग्री का फर्कझारखंड में मौसम रहेगा शुष्क, छाएगा कोहरा

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