राजस्थान हाईकोर्ट ने कोचिंग संस्थानों में आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है और कोचिंग रेगुलेशन एक्ट लागू न होने पर सरकार की आलोचना की है। कोर्ट ने 2019 से लंबित कानून और केंद्र सरकार की गाइडलाइन को लागू करने में विफलता पर नाराजगी व्यक्त की है, जबकि पिछले पांच महीनों में 14 छात्रों ने आत्महत्या की...
जयपुर: राजस्थान के कोचिंग संस्थानों में सुसाइड के केस बढ़ने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की खंडपीठ ने कोचिंग रेगुलेशन एक्ट नहीं बनाए जाने पर तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार सिर्फ बातें कर रही है लेकिन कानून नहीं बना रही। वर्ष 2019 से रेगुलेशन एक्ट बनाने की बातें हो रही है। ना तो अब तक कानून बना है और ना ही कोई गाइडलाइन को लागू किया है। गौरतलब है कि पिछले पांच महीने में 14 कोचिंग स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की है।जानिए क्या है कोचिंग रेगुलेशन बिल की स्थितिकोचिंग सिटी कोटा क कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की आत्महत्या के केस काफी बढ गए हैं। हर वर्ष कई बच्चे मौत को गले लगा रहे हैं। वर्ष 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया। माननीय हाईकोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट कोचिंग संस्थानों को रेगुलेट करने की जरूरत बताई। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान कोचिंग रेगुलेशन बिल लाया गया था। सदन में पेश भी किया गया लेकिन विपक्ष सहित ज्यादातर सदस्यों के विरोध के बाद बिल को सिलेक्ट कमेटी में भेज दिया गया। बाद में सदन की कार्रवाई अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित हो गई और बिल अटक गया। वर्तमान सरकार ने भी पिछले विधानसभा सत्र में भी राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण विनियमन विधेयक, 2025 विधानसभा में पेश किया गया। इस बिल को फिर से विचार के लिए विधानसभा की प्रवर समिति को भेज दिया गया।केंद्र ने बनाई थी गाइडलाइन लेकिन लागू नहीं हुईछात्रों के द्वारा सुसाइड किए जाने के केस बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने एक गाइड लाइन जारी की थी लेकिन यह गाइडलाइन लागू नहीं की जा सकी है। गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी कोचिंग सेंटर अच्छे नंबर और रैंक की गारंटी नहीं दे सकते। ग्रेजुएट से कम योग्यता वाले टीचर्स नहीं रख सकेंगे। 16 साल से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग में इनरोलमेंट नहीं कर सकते। एनरोलमेंट सेकेंडरी एग्जाम के बाद ही किया जा सकेगा। कोचिंग सेंटर की फीस फिक्स करने और कोर्स के बीच में नहीं बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया। दी गई पूरी फीस की रसीद देना भी अनिवार्य किया गया। तय समय से पहले कोचिंग छोड़ने वाले स्टूडेंट को बकाया फीस वापस लौटाने का भी प्रावधान किया गया। बेहतरीन काउंसलिंग सिस्टम, मेंटल स्ट्रेस का ध्यान रखने और अच्छी परफॉर्मेंस का प्रेशर नहीं बनाए जाने की बातें भी गाइडलाइन में शामिल की गई लेकिन ये लागू नहीं हो सकी।.
जयपुर: राजस्थान के कोचिंग संस्थानों में सुसाइड के केस बढ़ने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की खंडपीठ ने कोचिंग रेगुलेशन एक्ट नहीं बनाए जाने पर तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार सिर्फ बातें कर रही है लेकिन कानून नहीं बना रही। वर्ष 2019 से रेगुलेशन एक्ट बनाने की बातें हो रही है। ना तो अब तक कानून बना है और ना ही कोई गाइडलाइन को लागू किया है। गौरतलब है कि पिछले पांच महीने में 14 कोचिंग स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की है।जानिए क्या है कोचिंग रेगुलेशन बिल की स्थितिकोचिंग सिटी कोटा क कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की आत्महत्या के केस काफी बढ गए हैं। हर वर्ष कई बच्चे मौत को गले लगा रहे हैं। वर्ष 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया। माननीय हाईकोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट कोचिंग संस्थानों को रेगुलेट करने की जरूरत बताई। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान कोचिंग रेगुलेशन बिल लाया गया था। सदन में पेश भी किया गया लेकिन विपक्ष सहित ज्यादातर सदस्यों के विरोध के बाद बिल को सिलेक्ट कमेटी में भेज दिया गया। बाद में सदन की कार्रवाई अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित हो गई और बिल अटक गया। वर्तमान सरकार ने भी पिछले विधानसभा सत्र में भी राजस्थान कोचिंग सेंटर नियंत्रण विनियमन विधेयक, 2025 विधानसभा में पेश किया गया। इस बिल को फिर से विचार के लिए विधानसभा की प्रवर समिति को भेज दिया गया।केंद्र ने बनाई थी गाइडलाइन लेकिन लागू नहीं हुईछात्रों के द्वारा सुसाइड किए जाने के केस बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने एक गाइड लाइन जारी की थी लेकिन यह गाइडलाइन लागू नहीं की जा सकी है। गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी कोचिंग सेंटर अच्छे नंबर और रैंक की गारंटी नहीं दे सकते। ग्रेजुएट से कम योग्यता वाले टीचर्स नहीं रख सकेंगे। 16 साल से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग में इनरोलमेंट नहीं कर सकते। एनरोलमेंट सेकेंडरी एग्जाम के बाद ही किया जा सकेगा। कोचिंग सेंटर की फीस फिक्स करने और कोर्स के बीच में नहीं बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया। दी गई पूरी फीस की रसीद देना भी अनिवार्य किया गया। तय समय से पहले कोचिंग छोड़ने वाले स्टूडेंट को बकाया फीस वापस लौटाने का भी प्रावधान किया गया। बेहतरीन काउंसलिंग सिस्टम, मेंटल स्ट्रेस का ध्यान रखने और अच्छी परफॉर्मेंस का प्रेशर नहीं बनाए जाने की बातें भी गाइडलाइन में शामिल की गई लेकिन ये लागू नहीं हो सकी।
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