राजनीति की भाषा

United States News News

राजनीति की भाषा
United States Latest News,United States Headlines
  • 📰 Jansatta
  • ⏱ Reading Time:
  • 141 sec. here
  • 4 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 60%
  • Publisher: 63%

संपादकीय: राजनीति की भाषा

संपादकीय: राजनीति की भाषा जनसत्ता March 9, 2019 2:56 AM सार्वजनिक जीवन में नेता का आचरण काफी मायने रखता है। राजनीतिक दलों का एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और व्यंग्य बाण चलाना कोई नई बात नहीं है। लोकतंत्र में असहमति बड़ा गुण माना जाता है, पर कई बार जब राजनेता दुर्भावनावश या घृणाभाव से अपने प्रतिपक्षी के प्रति अशोभन भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो स्वाभाविक ही उनके आचरण पर अंगुलियां उठने लगती हैं। चुनाव के वक्त राजनेताओं की भाषा अक्सर तल्ख हो उठती है, पर पिछले कुछ सालों से इसमें जिस तरह की तल्खी देखी जा रही है, वह लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं कही जा सकती। सार्वजनिक जीवन में नेता का आचरण काफी मायने रखता है। बहुत सारे लोग उससे प्रेरणा लेते और फिर उसके आचरण को समाज के निचले स्तर पर प्रसारित करते हैं। मगर अफसोस कि कई राजनेता अपने विपक्षी पर वार करने की धुन में अपने पद की गरिमा और मर्यादा का भी ध्यान नहीं रख पाते। इस बार आसन्न चुनाव के मद्देनजर यह प्रवृत्ति कुछ अधिक उभर कर आई दिखती है। इस पर उचित ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डीपी त्रिपाठी ने एतराज जताया है। हालांकि उनका आरोप सत्तापक्ष पर ऐसी भाषा के उपयोग को लेकर है, पर ध्यान देने की बात है कि इस मामले में शायद ही कोई राजनीतिक दल पीछे है। जब पड़ोसी देश पर टिप्पणी करनी हो तो जैसे सबकी पौ-बारह हो जाती है। हमारे यहां ज्यादातर क्षेत्रीय दलों का जनाधार जाति, धर्म, क्षेत्रीय अस्मिता पर टिका हुआ है। वे उन्हीं की राजनीति करते हैं। इसलिए केंद्र या राज्य में अपने प्रतिद्वंद्वी दल की सरकार पर अक्सर उनका तल्खी भरा बयान ही सुनने को मिलता है। उत्तर प्रदेश, बिहार के क्षेत्रीय दल इस मामले में ज्यादा मुखर नजर आते हैं। चाहे सपा-बसपा-राजद हों या दूसरे दल, उनके नेता कड़वी भाषा का इस्तेमाल करके ही अपने मतदाताओं को रिझाने का प्रयास करते हैं। इस तरह यह परिपाटी-सी बनती गई कि अपने प्रतिपक्षी पर प्रहार करना है, तो कड़वी और अशोभन भाषा का उपयोग करना ही चाहिए। ऐसी भाषा जब छुटभैए नेता ग्रहण करते हैं, तो उसे और विकृत करते हैं। विवेकहीन तरीके से तथ्यों को पेश करते, मतदाताओं को बरगलाने का प्रयास करते और कई बार गाली-गलौज तक की भाषा बोलने लगते हैं। यह लोकतंत्र की गरिमा को चोट पहुंचाने वाली प्रवृत्ति है। मगर हैरानी की बात कि कोई भी राजनीतिक दल अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं को भाषा के मामले में संयम और शालीनता बरतने की सीख नहीं देता। कई बार ऐसे नेता अपने वरिष्ठों से पुरस्कृत होते देखे जाते हैं, जो अपने विपक्षी के खिलाफ तल्ख और अशोभन भाषा का उपयोग करते हैं। आम जनजीवन की भाषा को बनाना अच्छी बात है, पर उसकी मर्यादा का ध्यान न रखना असंवैधानिक है। मगर शायद हमारे राजनेताओं ने मान लिया है कि मतदाताओं को वही भाषा पसंद आती है, उसी भाषा में दिए बयान उन्हें प्रभावित करते हैं, जिसमें कुछ अशोभन और तल्ख शब्दों का समावेश हो। नहीं तो कोई और कारण नहीं हो सकता कि सत्ता के शीर्ष नेतृत्व की भाषा में भी संयम नहीं दिखाई देता। भाषा में भड़काऊपन, आक्रामकता और अशालीनता कहीं न कहीं राजनीति को कमजोर करते हैं। Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App.

संपादकीय: राजनीति की भाषा जनसत्ता March 9, 2019 2:56 AM सार्वजनिक जीवन में नेता का आचरण काफी मायने रखता है। राजनीतिक दलों का एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप और व्यंग्य बाण चलाना कोई नई बात नहीं है। लोकतंत्र में असहमति बड़ा गुण माना जाता है, पर कई बार जब राजनेता दुर्भावनावश या घृणाभाव से अपने प्रतिपक्षी के प्रति अशोभन भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो स्वाभाविक ही उनके आचरण पर अंगुलियां उठने लगती हैं। चुनाव के वक्त राजनेताओं की भाषा अक्सर तल्ख हो उठती है, पर पिछले कुछ सालों से इसमें जिस तरह की तल्खी देखी जा रही है, वह लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं कही जा सकती। सार्वजनिक जीवन में नेता का आचरण काफी मायने रखता है। बहुत सारे लोग उससे प्रेरणा लेते और फिर उसके आचरण को समाज के निचले स्तर पर प्रसारित करते हैं। मगर अफसोस कि कई राजनेता अपने विपक्षी पर वार करने की धुन में अपने पद की गरिमा और मर्यादा का भी ध्यान नहीं रख पाते। इस बार आसन्न चुनाव के मद्देनजर यह प्रवृत्ति कुछ अधिक उभर कर आई दिखती है। इस पर उचित ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डीपी त्रिपाठी ने एतराज जताया है। हालांकि उनका आरोप सत्तापक्ष पर ऐसी भाषा के उपयोग को लेकर है, पर ध्यान देने की बात है कि इस मामले में शायद ही कोई राजनीतिक दल पीछे है। जब पड़ोसी देश पर टिप्पणी करनी हो तो जैसे सबकी पौ-बारह हो जाती है। हमारे यहां ज्यादातर क्षेत्रीय दलों का जनाधार जाति, धर्म, क्षेत्रीय अस्मिता पर टिका हुआ है। वे उन्हीं की राजनीति करते हैं। इसलिए केंद्र या राज्य में अपने प्रतिद्वंद्वी दल की सरकार पर अक्सर उनका तल्खी भरा बयान ही सुनने को मिलता है। उत्तर प्रदेश, बिहार के क्षेत्रीय दल इस मामले में ज्यादा मुखर नजर आते हैं। चाहे सपा-बसपा-राजद हों या दूसरे दल, उनके नेता कड़वी भाषा का इस्तेमाल करके ही अपने मतदाताओं को रिझाने का प्रयास करते हैं। इस तरह यह परिपाटी-सी बनती गई कि अपने प्रतिपक्षी पर प्रहार करना है, तो कड़वी और अशोभन भाषा का उपयोग करना ही चाहिए। ऐसी भाषा जब छुटभैए नेता ग्रहण करते हैं, तो उसे और विकृत करते हैं। विवेकहीन तरीके से तथ्यों को पेश करते, मतदाताओं को बरगलाने का प्रयास करते और कई बार गाली-गलौज तक की भाषा बोलने लगते हैं। यह लोकतंत्र की गरिमा को चोट पहुंचाने वाली प्रवृत्ति है। मगर हैरानी की बात कि कोई भी राजनीतिक दल अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं को भाषा के मामले में संयम और शालीनता बरतने की सीख नहीं देता। कई बार ऐसे नेता अपने वरिष्ठों से पुरस्कृत होते देखे जाते हैं, जो अपने विपक्षी के खिलाफ तल्ख और अशोभन भाषा का उपयोग करते हैं। आम जनजीवन की भाषा को बनाना अच्छी बात है, पर उसकी मर्यादा का ध्यान न रखना असंवैधानिक है। मगर शायद हमारे राजनेताओं ने मान लिया है कि मतदाताओं को वही भाषा पसंद आती है, उसी भाषा में दिए बयान उन्हें प्रभावित करते हैं, जिसमें कुछ अशोभन और तल्ख शब्दों का समावेश हो। नहीं तो कोई और कारण नहीं हो सकता कि सत्ता के शीर्ष नेतृत्व की भाषा में भी संयम नहीं दिखाई देता। भाषा में भड़काऊपन, आक्रामकता और अशालीनता कहीं न कहीं राजनीति को कमजोर करते हैं। Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

Jansatta /  🏆 4. in İN

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

LIVE:देश में ऐसे जज हैं जिन्हें झुकाया जा सकता है: चेलमेश्वरLIVE:देश में ऐसे जज हैं जिन्हें झुकाया जा सकता है: चेलमेश्वरLetsConclave19 में जगन रेड्डी आंध्र की राजनीति और कांग्रेस के बारे में क्या कहा
Read more »

गंगा सफाई और हाईवे निर्माण को लेकर चिदम्बरम ने की NDA की तारीफगंगा सफाई और हाईवे निर्माण को लेकर चिदम्बरम ने की NDA की तारीफउन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यक्रम को ‘‘सफलता‘‘ मिली है अैर यूपीए सरकार के समय आधार जैसी पहल को और मजबूत बनाया गया.
Read more »

कोहली ने धोनी और जाधव की बल्लेबाजी को बताया शानदार, ऐसे की तारीफ– News18 हिंदीकोहली ने धोनी और जाधव की बल्लेबाजी को बताया शानदार, ऐसे की तारीफ– News18 हिंदीभारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में खेले गए पहले एकदविसीय मैच में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 6 विकेट से मात दी. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने 237 रनों का लक्ष्य रखा था.
Read more »

इस भारतीय क्रिकेटर की पत्नी ने की राजनीति में एंट्री, थामा बीजेपी का दामन- Amarujalaइस भारतीय क्रिकेटर की पत्नी ने की राजनीति में एंट्री, थामा बीजेपी का दामन- Amarujalaटीम इंडिया के क्रिकेटर रविंद्र जडेजा की पत्नी रीवा जडेजा ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं।
Read more »

तमिलनाडुः AIADMK और DMDK में सीटों को लेकर फंसा पेंच, मोदी की रैली आजतमिलनाडुः AIADMK और DMDK में सीटों को लेकर फंसा पेंच, मोदी की रैली आजतमिलनाडु की राजनीति में लगातार उठापठक की स्थिति बनी हुई है. राज्य के उपमुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम ने ऐलान किया है कि लोकसभा चुनाव को लेकर ऑल इंडिया अन्ना द्रविड मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) और डीएमडीके के बीच गठबंधन को लेकर समझौता हो चुका है. उन्होंने उम्मीद जताई कि डीएमडीके नेतृत्व जल्द ही इस पर अपना फैसला कर लेगा. लेकिन अभी इस पर सहमति नहीं बनी है.
Read more »

कुशल राजनीति के लिए विदेशों में जानी जाती हैं, भारतीय राजनीति की ये 8 महिलाएंकुशल राजनीति के लिए विदेशों में जानी जाती हैं, भारतीय राजनीति की ये 8 महिलाएंदुनिया में ऐसा कोई विषय नहीं, जो महिलाओं की उपस्थिति से वंचित हो। घर से लेकर व्यवसाय और शिक्षा से लेकर राजनीति तक महिलाओं की दमदार उपस्थिति का इतिहास साक्षी रहा है। प्राचीन काल से लेकर अब तक राजनीति में भी महिलाओं ने यह साबित किया है कि वे ग्रहकार्य एवं जिम्मेदारियों को निभाने में जितनी निपुण हैं, राजनीति के क्षेत्र में भी उतनी ही कुशल भी।
Read more »

PM मोदी ने की नागपुर मेट्रो की शुरुआत, कहा- शिलान्यास किया और उद्घाटन भीPM मोदी ने की नागपुर मेट्रो की शुरुआत, कहा- शिलान्यास किया और उद्घाटन भीरधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज नागपुर उन शहरों में शामिल हो गया है, जहां लोगों को आनेजाने के लिए मेट्रो की सुविधा है.
Read more »

बालाकोट के बाद की चुनौतियां: सेना को अत्याधुनिक हथियारों और आधुनिकीकरण की जरूरत हैबालाकोट के बाद की चुनौतियां: सेना को अत्याधुनिक हथियारों और आधुनिकीकरण की जरूरत हैबालाकोट हमले की आखिरी कड़ी विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की सकुशल स्वदेश वापसी से जुड़ी हुई है। इस मुद्दे पर पूरे देश में भावनाओं का ज्वार उमड़ आया।
Read more »



Render Time: 2026-04-02 17:00:05