मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बाहर निकलते ही कूड़े के ढेर का सामना करना पड़ता है, जिससे शहर की छवि खराब होती है। रेलवे और कैंट बोर्ड के अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्टेशन के बाहर कचरा जमा रहता है। स्वच्छ भारत मिशन के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। कैंट बोर्ड ने सफाई और सुंदरीकरण का आश्वासन दिया है, जबकि स्टेशन पर प्रतिदिन...
जागरण संवाददाता, मेरठ। संगम एक्सप्रेस से बुलंदशहर निवासी अमित सुबह मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन पर उतरे। स्टेशन के बाहर आते ही पहले गेट पर ई-रिक्शा वालों की घेराबंदी और फिर रेलवे गेस्ट हाउस के सामने सड़क पर फैले कचरे की दुर्गंध ने बेहाल कर दिया। वह यह कहते हुए आगे खड़े रिश्तेदार के साथ बाइक पर बैठकर निकल गए कि यहां तो बहुत गंदगी है। इसी ट्रेन से परिवार के साथ आए लाला का बाजार निवासी रमेश गोयल का दर्द कचरे की गंदगी देख छलक पड़ा। बोले, रेलवे रोड सुधर गई लेकिन स्टेशन के बाहर कूड़ा डलना नहीं बदं हुआ। ये दो यात्रियों का दर्द नहीं, ये स्टेशन आने और जाने वाले हर यात्री की पीड़ा है। रेलवे अफसरों और कैंट बोर्ड के अधिकारियों की उदासीनता के चलते कचरे की गंदगी यहां हर वक्त यात्रियों का स्वागत कर रही है। हैरानी की बात तो ये है कि जहां गंदगी पड़ी है, वहां पर अधिकारी विश्राम गृह का बोर्ड भी लगा है और सड़क के दूसरी तरफ सामने भवन स्थित है।रेलवे स्टेशन किसी भी शहर की पहचान से जुड़ा होता है। यह शहर का प्रवेश द्वार होता है। यात्रियों के लिए पहला पड़ाव होता है। यात्री जब शहर में आते हैं, तो रेलवे स्टेशन से ही उनका परिचय होता है। जो शहर के बारे में पहली छाप बनाता है। मेरठ के सिटी रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्री जब स्टेशन के बाहर आते हैं तो उनका मुख्य रोड पर लगे कचरे के ढेर से सामना होता है। यह कचरे का ढेर शहर की छवि धूमिल कर रहा है। मन-मस्तिष्क में गंदगी वाले शहर की छाप छोड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छ सर्वेक्षण जैसे कार्यक्रम केंद्र और राज्य सरकार चला रही हैं। कैंट बोर्ड की स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग गिरने के कारणों में साफ-सफाई में कमी बड़ा कारण रही। बावजूद इसके कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन के बाहर रेलवे रोड के खत्ते समाप्त करने पर कोई काम नहीं किया। यहां सरकारी क्वार्ट्स हैं। रेलवे स्टेशन के बाहर कैंट बोर्ड की दुकानें हैं। रेलवे रोड पर फैला कचरे में 70 प्रतिशत सूखा कचरा यानि पालीथिन, पैकैट, थर्माकोल - प्लास्टिक गिलास, चाय के कप हैं। ऐसा कूड़ा चाय, खानपान की दुकानों से ही निकलता है। रेलवे स्टेशन के अंदर हो या बाहर ऐसी ही दुकाने हैं। रेलवे परिसर में उत्सर्जित कूड़े के उठान, सफाई की जिम्मेदारी रेलवे की है। लेकिन रेलवे परिसर के बाहर कूड़े का उठान और सफाई कैंट बोर्ड करता है। लेकिन इस मामले में दोनों ही विभाग गंभीर नहीं है। कूड़े के ढेर मंशा देवी वाले मार्ग पर भी हैं और रेलवे रोड पुलिस चेकपोस्ट के पास भी हैं।कूड़ा न डले। इसके लिए कैंट बोर्ड उचित कार्रवाई करेगा। दुकानदारों को डस्टबिन रखकर उसी में कूड़ा डालने के लिए कहा जाएगा। खत्ते काे समाप्त करके सुंदरीकरण किया जाएगा। सफाई अधीक्षक व सफाई निरीक्षक को भेजकर सफाई करवायी जाएगी। स्वयं भी निरीक्षण करेंगे। -जाकिर हुसैन, सीईओ, कैंट बोर्ड । स्टेशन पर निकलता है पांच क्विंटल कूड़ास्थानीय रेल अधिकारियों के अनुसार सिटी रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन सेंटर के पास कूड़ा घर बना है। यहां पर स्टेशन से निकलने वाला प्रतिदिन पांच से छह क्विंटल कूड़ा डंप किया जाता है। जिसे कैंट बोर्ड का वाहन उठाकर ले जाता है। हालांकि दावे से हकीकत बिल्कुल अलग है। रेलवे स्टेशन के अंदर से लेकर बाहर तक गंदगी पसरी रहती है। साफ-सफाई को लेकर रेलवे के अधिकारी गंभीर नहीं है।.
जागरण संवाददाता, मेरठ। संगम एक्सप्रेस से बुलंदशहर निवासी अमित सुबह मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन पर उतरे। स्टेशन के बाहर आते ही पहले गेट पर ई-रिक्शा वालों की घेराबंदी और फिर रेलवे गेस्ट हाउस के सामने सड़क पर फैले कचरे की दुर्गंध ने बेहाल कर दिया। वह यह कहते हुए आगे खड़े रिश्तेदार के साथ बाइक पर बैठकर निकल गए कि यहां तो बहुत गंदगी है। इसी ट्रेन से परिवार के साथ आए लाला का बाजार निवासी रमेश गोयल का दर्द कचरे की गंदगी देख छलक पड़ा। बोले, रेलवे रोड सुधर गई लेकिन स्टेशन के बाहर कूड़ा डलना नहीं बदं हुआ। ये दो यात्रियों का दर्द नहीं, ये स्टेशन आने और जाने वाले हर यात्री की पीड़ा है। रेलवे अफसरों और कैंट बोर्ड के अधिकारियों की उदासीनता के चलते कचरे की गंदगी यहां हर वक्त यात्रियों का स्वागत कर रही है। हैरानी की बात तो ये है कि जहां गंदगी पड़ी है, वहां पर अधिकारी विश्राम गृह का बोर्ड भी लगा है और सड़क के दूसरी तरफ सामने भवन स्थित है।रेलवे स्टेशन किसी भी शहर की पहचान से जुड़ा होता है। यह शहर का प्रवेश द्वार होता है। यात्रियों के लिए पहला पड़ाव होता है। यात्री जब शहर में आते हैं, तो रेलवे स्टेशन से ही उनका परिचय होता है। जो शहर के बारे में पहली छाप बनाता है। मेरठ के सिटी रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्री जब स्टेशन के बाहर आते हैं तो उनका मुख्य रोड पर लगे कचरे के ढेर से सामना होता है। यह कचरे का ढेर शहर की छवि धूमिल कर रहा है। मन-मस्तिष्क में गंदगी वाले शहर की छाप छोड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के दावे किए जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छ सर्वेक्षण जैसे कार्यक्रम केंद्र और राज्य सरकार चला रही हैं। कैंट बोर्ड की स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग गिरने के कारणों में साफ-सफाई में कमी बड़ा कारण रही। बावजूद इसके कैंट बोर्ड के अधिकारियों ने रेलवे स्टेशन के बाहर रेलवे रोड के खत्ते समाप्त करने पर कोई काम नहीं किया। यहां सरकारी क्वार्ट्स हैं। रेलवे स्टेशन के बाहर कैंट बोर्ड की दुकानें हैं। रेलवे रोड पर फैला कचरे में 70 प्रतिशत सूखा कचरा यानि पालीथिन, पैकैट, थर्माकोल - प्लास्टिक गिलास, चाय के कप हैं। ऐसा कूड़ा चाय, खानपान की दुकानों से ही निकलता है। रेलवे स्टेशन के अंदर हो या बाहर ऐसी ही दुकाने हैं। रेलवे परिसर में उत्सर्जित कूड़े के उठान, सफाई की जिम्मेदारी रेलवे की है। लेकिन रेलवे परिसर के बाहर कूड़े का उठान और सफाई कैंट बोर्ड करता है। लेकिन इस मामले में दोनों ही विभाग गंभीर नहीं है। कूड़े के ढेर मंशा देवी वाले मार्ग पर भी हैं और रेलवे रोड पुलिस चेकपोस्ट के पास भी हैं।कूड़ा न डले। इसके लिए कैंट बोर्ड उचित कार्रवाई करेगा। दुकानदारों को डस्टबिन रखकर उसी में कूड़ा डालने के लिए कहा जाएगा। खत्ते काे समाप्त करके सुंदरीकरण किया जाएगा। सफाई अधीक्षक व सफाई निरीक्षक को भेजकर सफाई करवायी जाएगी। स्वयं भी निरीक्षण करेंगे। -जाकिर हुसैन, सीईओ, कैंट बोर्ड । स्टेशन पर निकलता है पांच क्विंटल कूड़ास्थानीय रेल अधिकारियों के अनुसार सिटी रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन सेंटर के पास कूड़ा घर बना है। यहां पर स्टेशन से निकलने वाला प्रतिदिन पांच से छह क्विंटल कूड़ा डंप किया जाता है। जिसे कैंट बोर्ड का वाहन उठाकर ले जाता है। हालांकि दावे से हकीकत बिल्कुल अलग है। रेलवे स्टेशन के अंदर से लेकर बाहर तक गंदगी पसरी रहती है। साफ-सफाई को लेकर रेलवे के अधिकारी गंभीर नहीं है।
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