मुज़फ़्फ़रपुर में नरकंकाल पर कोहराम, क्या कहती है जाँच रिपोर्ट?
अस्पताल अधीक्षक डॉ एसके शाही ने नरकंकालों के मसले पर कुछ भी बोलने से यह कहकर इनकार कर दिया कि पोस्टमार्टम संबंधी काम कॉलेज का है, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. इसलिए कॉलेज के प्रिंसिपल से इस पर जवाब लिया जाए.
हमनें श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ विकास कुमार से भी बात की. उन्होंने भी इस तरह के किसी रिपोर्ट के आने से इनकार कर दिया.वो कहते हैं "इस मामले में एक नहीं बल्कि दो जांच कमेटी का गठन किया गया था. एक तो विभाग द्वारा किया ही गया था, दूसरा कॉलेज प्रबंधन ने अपनी एक आंतरिक कमिटी भी बनाई है. दोनों में से किसी की जांच अभी तक पूरी नहीं हो पायी है. रिपोर्ट आनी अभी शेष है" हालांकि, डॉ विकास ने अखबारों में छपी खबरों की तर्ज पर ही यह जरूर कहा कि," हमारे अभी तक कि जांच में यह निकल कर आया है कि पिछले तीन सालों से उस जगह पर अंत्येष्टि का काम किया जाता था. कोई उन नरकंकालों को गिन कैसे सकता है! सब जल चुके हैं. जो बचे हैं उन्हें आप अवशेष कह सकते हैं."इसमें कोई दो राय नहीं कि अस्पताल के बगल से नरकंकाल मिलने के मामले में कोई आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहा है. अखबार के पन्नों में 70 नरमुंडो के मिलने की सुर्खियां छपी हैं, लेकिन प्रबंधन और प्रशासन सही नंबर बताने से बच रहे हैं. जैसा कि अखबार लिखते हैं और अस्पताल प्रबंधन दावा करता है कि उस जगह पर पिछले तीन सालों से लावारिस लाशें जलायी जा रही हैं? लेकिन एक बार भी प्रबंधन ने इसे लेकर कार्रवाई नहीं की!कॉलेज के प्राचार्य डॉ विकास उस जमीन को अस्पताल का परिसर मानने से ही इनकार करते हैं. वो कहते हैं,"वो जमीन अब टाटा कैंसर इंस्टिट्यूट को हस्तांरित की जा चुकी है. इसके कागज भी हैं और पहले भी वो ज़मीन अस्पताल परिसर के अंतर्गत नहीं आता था, कॉलेज परिसर के वन क्षेत्र का हिस्सा है." साफ है कि अस्पताल के बगल से नरकंकालों की बरामदगी के मसले पर अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं.लेकिन दो-तीन दिनों में जैसा कि प्रिंसिपल डॉ विकास भी कहते हैं मामले की जांच रिपोर्ट आ जाएगी तब तस्वीर साफ होगी कि आखिर कितने नरकंकालों की बरामदगी हुई है और ऐसी जगह पर शवों को जलाने वालों पर क्या कार्रवाई होती है. बहरहाल मामला और भी गंभीर बनता जा रहा है. क्योंकि इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन द्वारा पिछले दिनों अस्पताल में किए दौरों से से भी जोड़ कर देखा जाने लगा है. विपक्षी नेता यह कहकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के दौरों को देखते हुए लाशों को आनन फानन में इसलिए जला दिया गया ताकि अस्पताल की बदहाली सामने न आए. जब पकड़े गए तो बाद में उन्हें लावारिस बताकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है.
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