महाकुंभ नगर में सोमवार को पौष पूर्णिमा पर बुधादित्य योग में स्नान का आयोजन होगा।
प्रतीक्षा खत्म हुई। सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में घड़ियों की सुई जैसे ही 4.
32 पर पहुंची। महाकुंभ वैसे ही प्रारंभ हो गया। पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व का यही पुण्यकाल है लेकिन श्रद्धालुओं की यह व्यग्रता ही है कि उन्होंने आधी रात से ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम के साथ विभिन्न घाटों पर स्नान शुरू कर दिया। संगम क्षेत्र में सोमवार से ही माह भर का कल्पवास प्रारंभ हो गया है। मेले में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था मंगलवार को मकर संक्रांति पर अमृत स्नान पर्व का अनूठा संयोग जुड़ रहा है। दोनों ही स्नान पर्वों के एक साथ पड़ने से श्रद्धालुओं में उत्साह है। ठंड और बूंदाबांदी के बावजूद श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा हुआ है। संतों-महतों के शिविर जागृत हैं। पूरे मेला क्षेत्र में प्रवचन व वेद की ऋचाओं की गूंज है। मेला में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था है। हेलीकॉप्टर से होगी पुष्प वर्षा श्रद्धालुओं कई किलोमीटर पैदल चलकर मेला क्षेत्र में पहुंचे। पौष पूर्णिमा व मकर संक्रांति पर 12 किलोमीटर क्षेत्र में फैले सभी 44 घाटों पर स्नान के लिए आए संतों और श्रद्धालुओं पर सरकार की तरफ से हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराई जाएगी। रविवार सुबह से ही प्रयागराज की सड़कों पर वाहनों व पैदल यात्रियों का रेला दिखने लगा। दोपहर में बारिश होने से लोग इधर-उधर छांव तलाशते ठिठके जरूर लेकिन बूंदाबांदी थमते ही फिर सड़कों पर दिखे। इससे चहुंओर जाम की स्थिति रही। पुलिस पसीने-पसीने होती रही। 40 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद भीड़ का दवाब देखते हुए महाकुंभ क्षेत्र में कुछ पुलों पर आवागमन रोक दिया गया। यातायात प्रबंधन योजना में तात्कालिक तौर पर संशोधन किए गए। साथ ही चार हजार हेक्टेयर में विस्तारित महाकुंभ क्षेत्र में तैयारियों का रिहर्सल भी कर लिया गया। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि महाकुंभ में देश-विदेश से लगभग 40 करोड़ श्रद्धालु व पर्यटक आएंगे। माना जा रहा है कि महा आयोजन में प्रति व्यक्ति औसत खर्च 10 हजार रुपये तक भी बढ़ सकता है और कुल कारोबार चार लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बुधादित्य योग में लगेगी पौष पूर्णिमा की डुबकी इस बार पौष पूर्णिमा पर बुधादित्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। स्नान के बाद सकल कामना सिद्धि , जनकल्याण व राष्ट्र अभ्युदय के लिए यज्ञ-अनुष्ठान आरंभ हो जाएगा। देश-विदेश के संत व श्रद्धालु गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी (संगम) के पवित्र जल में डुबकी लगाकर भजन-पूजन में रम जाएंगे। धर्माचार्यों का मत है कि स्नान पर्वों पर संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर यथासंभव दान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी
MAHA KUMBH PIOUS BATH SNAN SAGAM BHADRADITYA YOGA
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