भारत-EU की डील से अमेरिका इतना भड़का क्यों है: मंत्री बोले- इसमें भारत का ज्यादा फायदा; क्या ट्रम्प का टैरि...

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भारत-EU की डील से अमेरिका इतना भड़का क्यों है: मंत्री बोले- इसमें भारत का ज्यादा फायदा; क्या ट्रम्प का टैरि...
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India EU Free Trade Agreement Deal Benefits And Impact On US Explained; आखिर भारत और यूरोप के बीच हुई ट्रेड डील से अमेरिका इतना परेशान क्यों है और क्या वाकई भारत को इस डील से ज्यादा फायदा होगा

मंत्री बोले- इसमें भारत का ज्यादा फायदा; क्या ट्रम्प का टैरिफ बेअसर हो जाएगाभारत और यूरोपीय यूनियन के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से अमेरिका भड़का हुआ है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यूरोप के लिए यूक्रेन युद्ध से ज्यादा जरूरी ट्रेड है। वह अपने खिलाफ युद्ध को फंड कर रहा है। बेसेंट ने कहा कि इस डील से भारत को ज्यादाभारत-EU की डील से अमेरिका इतना परेशान क्यों है, क्या वाकई भारत को इस डील से ज्यादा फायदा होगा और ट्रम्प के टैरिफ का असर घटेगा; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में…जब दो या ज्यादा देश आपस में ये तय कर लेते हैं कि वे एक-दूसरे के सामान और सेवाओं पर टैक्स, पाबंदियां और रुकावटें कम या खत्म कर देंगे, तो उसे फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो FTA व्यापार का ‘टोल फ्री हाईवे’ है। 77वें गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ EU के टॉप-2 लीडर उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंतोनियो लुईस सांटोस दा कोस्टा। भारत ने 27 जनवरी को यूरोपीय यूनियन के साथ FTA अनाउंस कर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय यूनियन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा है… EU 27 देशों का ग्रुप और दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक है। वहीं भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है। दोनों के साथ आने से 200 करोड़ लोगों का मार्केट बनेगा। साथ ही दुनिया की 25% GDP कवर होगी। भारत-EU ने पिछले साल 12.

5 लाख करोड़ रुपए का ट्रेड किया। FTA आने से भारत की बर्लिन, रोम, म्यूनिख जैसे यूरोपीय बाजारों में और यूरोप की दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे भारतीय बाजारों में पहुंच बन जाएगी। अनुमान है कि FTA होने से भारत-EU का व्यापार जल्द ही दोगुना हो जाएगा। मौजूदा वैश्विक उठापटक के बीच दुनिया अमेरिका और चीन का ऑप्शन खोज रही हैं। भारत-EU के बीच ये डील होने से ग्लोबल सप्लाई चेन का चेहरा बदल जाएगा। उम्मीद है कि चीन की जगह भारत तेजी से प्रोडक्शन हब बनेगा। EU से ट्रेड बढ़ेगा और ट्रम्प के टैरिफ को मात दी जाएगी। लंदन के इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की सीनियर एनालिस्ट सुमेधा दासगुप्ता के मुताबिक, ‘मौजूदा हालातों की वजह से व्यापार डगमगा रहा है। ऐसे में भारत और EU को भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर की जरूरत है। भारत अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करना चाहता है। जबकि EU चीन पर निर्भरता घटाना चाहता है, जिसे वह भरोसेमंद नहीं मानता।’अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने यूरोप के भारत के साथ ट्रेड डील करने को निराशाजनक बताया है। उन्होंने एक अमेरिकी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, 'यूरोप रूस-यूक्रेन युद्ध के फ्रंटलाइन में हैं। भारत ने रूस से सैंक्शन्ड कच्चा तेल खरीदना शुरू किया और रिफाइंड करके यूरोप को बेचने लगा। यूरोप खुद ही अपने खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहा है।' बेसेंट ने कहा कि हमने भारत को रूसी तेल खरीदने से रोकने के लिए 25% टैरिफ लगाया। यूरोप ने हमारा साथ देने के बजाय, भारत से जाकर ट्रेड डील कर ली। वो व्यापार को यूक्रेन के लोगों के आगे रखते हैं। अमेरिकी ट्रेड रिप्रजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर ने कहा है कि इस डील से भारत को ज्यादा फायदा है। उन्हें यूरोप के मार्केट में अपना सामान बेचने का ज्यादा मौका मिलेगा। ग्रीर ने यह भी संभावना जताई है कि EU की चेयरमैन वॉन डेर लेयेन ने यूरोप में भारतीय लेबर्स के आने-जाने पर बातचीत की है।भारत ने 2025 में यूरोप को 6.8 लाख करोड़ रुपए का सामान बेचा। वहीं EU से 5.5 लाख करोड़ रुपए का सामान खरीदा। यानी दोनों देशों के बीच हो रहे व्यापार में भारत के पास पहले से 1.3 लाख करोड़ रुपए की बढ़त है। इसे टेक्निकल भाषा में ट्रेड सरप्लस भी कहते हैं। इस डील के तहत भारत ने यूरोप से आने वाले करीब 96.6% चीजों से टैरिफ पूरी तरह हटा दिया है या बहुत कम कर दिया है। ऐसे ही यूरोप ने भी भारत से आने वाले 99.5% सामान पर टैरिफ खत्म कर दिया है या घटा दिया है। डील के बाद EU का भारत पर लगने वाला एवरेज टैरिफ 3.8% से घटकर 0.1% हो गया है। भारत-EU की ट्रेड डील से भारत के इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा फायदा होगा…भारत के कपड़े और चमड़े पर EU पहले 10% ड्यूटी लगात था। FTA के बाद यह खत्म हो गई है । इस डील के तहत भारत के 90.7% निर्यात पर तुरंत ड्यूटी खत्म कर दी जाएगी। इससे यूरोप में भारतीय कपड़े, जूते सस्ते होंगे और उनकी डिमांड बढ़ेगी। इससे भारत में गारमेंट्स, लेदर, फुटवियर जैसी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को सीधा फायदा होगा।FTA के बाद भारत से निर्यात होने वाले 97.5% केमिकल्स को कोई टैरिफ नहीं लगेगा। फार्मा सेक्टर में भी ड्यूटी घटा दी गई है। इस डील की वजह से फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स सेक्टर में भारत को हर साल 20-30% के ट्रेड का फायदा हो सकता है। रेगुलेटरी अप्रूवल आसान होने और स्टैंडर्ड एक जैसे होने से भारत में बनने वाली जेनेरिक दवाएं और स्पेशल मेडिसिन की यूरोपीय मार्केट में एंट्री आसान होगी।फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे EU देश भारत को एडवांस्ड वेपन बेचते हैं। 2024 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन डेढ़ लाख करोड़ रुपए रहा। वहीं डिफेंस एक्सपोर्ट 25 हजार करोड़ रुपए रहा। EU से FTA होने के बाद भारत को डिफेंस सप्लायर और मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के बनाया जा सकता है। इससे इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा भारत की हथियार कंपनियों को EU की डिफेंस जरूरतें पूरी करने वाले SAFE फंड्स की पहुंच मिल सकती है। ऐसा होने से यूरोप में भारतीय फैक्ट्रियां लग सकती है।इससे भारत की पहुंच EU के 100 बिलियन डॉलर के लेदर और फुटवेयर मार्केट में बढ़ेगी।27 जनवरी 2026 को EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-EU FTA साइन की। इसके अलावा भारत की हर तरह की ज्वेलरी पर लगने वाली ड्यूटी खत्म या बहुत कम हो जाएगी। भारत के लोगों को यूरोपियन शराब, यूरोपियन कारें और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे, क्योंकि इन पर लगने वाले प्रीमियम टैरिफ कम हो जाएंगे। इस डील से भारत को फायदा तो होता दिख रहा है लेकिन यह कहना कि भारत को ज्यादा फायदा होगा अभी जल्दबाजी होगी।अमेरिका को लग रहा है कि पूरी दुनिया उसके लॉजिक के हिसाब से चलेगी। इसमें भले ही उसके साझेदारों का नुकसान हो जाए। अब अमेरिका के साझेदार उसके हिसाब से नहीं चल रहे इसलिए वो ऐसे बयान दे रहा है।भारत ने EU से आयात होने वाली 49.6% चीजों पर तुरंत टैरिफ खत्म कर दिया है। बाकी की 39.5% चीजों पर 5 से 10 साल में टैरिफ खत्म हो जाएगा।भारत में यूरोपीय शराब और वाइन की खपत बढ़ेगी ट्रेड डील के बाद यूरोप से भारत में आने वाली वाइन, स्पिरिट्स और अन्य एल्कोहलिक ड्रिंक्स पर टैरिफ कम होगा। उदाहरण के लिए अभी वाइन पर 150% टैरिफ लगता है। अभी यह कम होकर 75% हो जाएगा। आगे इसे 20% तक कम किया जाएगा। इसके घटने से भारत में ये प्रोडक्ट सस्ते होंगे। यानी भारत में डिमांड बढ़ेगी, जिससे यूरोप में ज्यादा शराब बनेगी।यूरोपीय कार मैन्युफैक्चरर्स, खासकर प्रीमियम सेगमेंट की कंपनियां जैसे BMW, मर्सिडीज, वोल्क्सवैगन, पॉर्श वगैरह को भारत में एंट्री आसानी से मिलेगी।रॉयटर्स के मुताबिक, भारतीय सरकार ने कुछ चुनिंदा यूरोप में बनी कारों पर तुरंत टैरिफ घटाने पर सहमति जताई है। ये कारें 15,000 यूरो यानी करीब 16.3 लाख रुपए से ज्यादा कीमत की होंगी। इसके अलावा मशीनरी पर 44%, केमिकल्स पर 22% और फार्मा सेक्टर पर 11% लगने वाला टैरिफ भी आने वाले कुछ सालों में पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यूरोप के आईटी, इंजीनियरिंग, बिजनेस सर्विसेज और टेलिकॉम जैसे हाई-वैल्यू सर्विस सेक्टर को भी भारत में ज्यादा मौके मिलेंगे। क्योंकि इन सेक्टर में दूसरे देशों के मुकाबले टैरिफ कम लगेगा।ट्रम्प ने भारत के सामानों पर फिलहाल 50% टैरिफ लगा रखा है, जो उनके सत्ता में आने से पहले 10% से भी कम था। इससे भारत के एक्सपोर्ट पर बेहद नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव यानी GTRI के मुताबिक, नवंबर 2025 में भारत ने करीब 3 लाख करोड़ रूपए का सामान निर्यात किया। ये साल 2024 से 11% कम था। सिर्फ अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात में 28.5% की कमी आई। मई 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 80 हजार करोड़ रुपए का निर्यात किया था। अक्टूबर में ये घटकर 56 हजार करोड़ रूपए रह गया। GTRI के मुताबिक, भारत से अमेरिका को होने वाला निर्यात साल 2024–25 में 86.5 अरब डॉलर था। यह 2025–26 में घटकर करीब 50 अरब डॉलर रह सकता है। यानी भारतीय घरेलू बाजार को 3 लाख करोड़ रूपए का नुकसान होगा। सबसे ज्यादा असर टेक्सटाइल, ज्वेलरी, झींगा और कालीन के निर्यात पर पडे़गा। आशंका है कि इन सेक्टरों में निर्यात करीब 70% तक गिर जाएगा, जिससे लाखों नौकरियों पर खतरा मंडरा सकता है।दे दी है। इससे शिपमेंट्स बढ़ सकेंगी, खासकर ऐसे समय में जब कई प्रोड्यूसर्स को US के टैरिफ की वजह से दबाव झेलना पड़ रहा है। अमेरिका को होने वाले इस निर्यात पर बढ़े टैरिफ का असर जमीन पर दिखने लगा है। सूरत जैसे प्रमुख हब से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक हीरों के उत्पादन में कटौती शुरू हो चुकी है। सूरत की हीरा पॉलिशिंग इंडस्ट्री 12 लाख लोगों को रोजगार देती है। अर्थशास्त्री शरद कोहली कहते हैं कि ट्रेड डील से भारतीय सामान चीन जितना सस्ता हो सकता है, जिससे यूरोप में इसकी डिमांड बढ़ेगी। ट्रंप के टैरिफ की वजह से भारत को हीरों और जेम्स में जो नुकसान हुआ है, यूरोप से उसकी भरपाई हो सकती है। हालांकि, पूरी भरपाई के बारे में कहना संभव नहीं है। लेकिन 3 से 4 सालों में EU–भारत के बीच का व्यापार करीब 22 लाख करोड़ तक जा सकता है। 6 अगस्त 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर छूट सकता है अमेरिका और EU दुनिया के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर है। ग्लोबल गुड्स ट्रेड में इनकी हिस्सेदारी 30% और ग्लोबल सर्विस ट्रेड में 43% है। अभी अमेरिका EU का सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। 2024 में दोनों के बीच 150 लाख करोड़ से ज्यादा का व्यापार हुआ। EU अपना 17.3% ट्रेड अमेरिका के साथ करता है।भारत पर टैरिफ का दबाव बेअसर रूस से तेल खरीदने के चलते अमेरिका ने भारत पर टैरिफ बढ़ाकर 50% कर दिया था। इसके बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना कम भी किया लेकिन भारत-अमेरिका के बीच कोई ट्रेड डील नहीं हो पाई। ग्लोबल थिंक टैंक ORF में इकोनॉमी और ग्रोथ प्रोग्रा के डायरेक्टर सेंटर मिहिर शर्मा के मुताबिक,‘ट्रम्प ताकत का सम्मान करते हैं। यूरोप और ब्राजील के ऊपर उनका दबाव काम करता है, लेकिन चीन और रूस पर यह बेअसर है। उसी तरह भारत-EU ट्रेड डील US को यह मानने पर मजबूर करेगी कि भारत के पास ऑप्शंस हैं और वह उन पर काम भी कर सकता है।’भारत-EU के बीच FTA दो बड़े इकोनॉमिक प्लेयर्स का साथ आना है। यह अमेरिका के लिए सिग्नल है कि दोनों देश अपने एजेंडा पर आगे बढ़ने को तैयार हैं।मिहिर शर्मा के मुताबिक, 'ट्रम्प के टैरिफ की वजह से भारत और EU दोनों को ही काफी नुकसान हो चुका है। FTA की वजह से अमेरिका की अहमियत एक ट्रेड पार्टनर के रूप में कम हो सकती है।ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर बीजिंग 28 जनवरी को चीन यात्रा पर पहुंचे। 8 साल बाद कोई ब्रिटिश पीएम चीन की यात्रा पर गया है। उनके साथ दर्जनों ब्रिटिश बिजनेस एग्जिक्यूटिव्स भी होंगे यानी यात्रा का मकसद व्यापार ही है। बीते दिनों कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने भी ट्रम्प के टैरिफ का विरोध कर देश के लोगों से स्वदेशी सामान खरीदने की अपील की। अब वो खालिस्तान के मुद्दे पर भारत से खराब हुए रिश्तों को भी सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। मार्च में कार्नी भारत दौरे पर आएंगे।अंतरराष्ट्रीय मामलों में JNU के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, ‘इन घटनाओं ने EU को NATO से इतर साझेदारियां तलाशने की इच्छा को और मजबूत किया है। इसलिए EU-India FTA सिर्फ इकोनॉमिक स्ट्रेटजी तक सीमित न रहकर, अमेरिका के खिलाफ EU के लिए एक जियो-पॉलिटिकल इंश्योरेंस के रूप में सामने आता है।’4 करोड़ लाशों पर बैठा था यूरोप:76 साल पहले कैसे बना NATO, क्या अब बिखरना तय है; आखिरी कील ठोक रहे ट्रम्प तारीख- 4 मार्च 2025। वॉशिंगटन डीसी की एक शाम। अमेरिकी कांग्रेस का संयुक्त सत्र चल रहा था। ट्रम्प मंच पर खड़े बोल रहे थे। उन्होंने अचानक कहा कि अमेरिका को हर हाल में ग्रीनलैंड लेना पड़ेगा। बात इतनी बेहिचक थी कि संसद में बैठे सांसद हंस पड़े, लेकिन ट्रम्प मजाक नहीं कर रहे थे।हरियाणा के 16 जिलों में घना कोहराकानपुर में गलन बढ़ी, कोहरा भी छा सकता हैउज्जैन में ओलावृष्टि के बाद तेज हवाओं ने ठंड बढ़ाईकोटा में बादल छाए, बारिश के आसार

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