रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। उन्होंने 1980 से 2000 तक ग्रुप का नेतृत्व किया, फिर कमान बेटे गौतम को सौंपी।
नई दिल्ली। रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का कल मुंबई में 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे 1980 से सन 2000 तक रेमंड ग्रुप के चेयरमैन रहे। इसके बाद उन्होंने रेमंड की कमान अपने बेटे गौतम सिंघानिया कौ सौंप दी। मगर कई वजहों से पिता और पुत्र के बीच विवाद रहा। विवाद यहां तक बढ़ा कि गौतम पर विजयपत ने परिवार के घर JK House में जगह न देने तक का आरोप लगाया और उन्हें मजबूरी में किराए के मकान में रहना पड़ा। सबसे अमीर उद्योगपतियों में से एक अपने करियर के शिखर पर, विजयपत सिंघानिया भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों में से एक थे। साल 2012 के आस-पास, उनकी कुल दौलत लगभग 1.
4 बिलियन डॉलर आंकी गई थी। यह संपत्ति रेमंड और रियल एस्टेट के साथ-साथ अन्य निवेशों के चलते बनी थी। 2015 से बदले हालात 2015 में हालात बदलने लगे, और उस साल ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। सबसे पहले, उनकी पत्नी माधुरी से उनका तलाक हुआ, जिसके निपटारे के तौर पर उन्हें लगभग 400 मिलियन डॉलर देने पड़े।इसके बाद, उन्होंने रेमंड में अपने 37 प्रतिशत शेयर अपने बेटे गौतम के नाम कर दिए। इस कदम के साथ ही, कंपनी का पूरा नियंत्रण उनके बेटे के हाथों में चला गया। उस समय, यह सब कुछ एक फैमिली बिजनेस ट्रांसिजन जैसा लग रहा था। लेकिन समय बीतने के साथ, इस फैसले का नतीजा कुछ ऐसा निकला जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। किराए के मकान में रहे जीवन के आखिरी सालों वर्षों में देखा गया कि विजयपत के लाइफस्टाइल में एक बड़ा बदलाव आया। रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाँ एक ओर उनके पास लगभग 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति मौजूद थी, वहीं दूसरी ओर वे अब परिवार के आलीशान घर में नहीं रह रहे थे। इसके बजाय, उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष एक किराए के मकान में बिताए।उनकी पिछली दौलत और बाद के जीवन के बीच का यह विरोधाभास अक्सर लोगों का ध्यान खींचता था। शेयरों का ट्रांसफर क्यों हुआ? 2015 में शेयर ट्रांसफर के बाद विजयपत सिंघानिया और गौतम सिंघानिया के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे। बाद में विजयपत ने कहा कि शेयरों का ट्रांसफर पूरी तरह से उनकी मर्जी से नहीं हुआ था। उनका मानना था कि यह भावनात्मक दबाव में हुआ था।स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उन्होंने मुंबई में परिवार के जाने-माने घर, JK हाउस में एक डुप्लेक्स अपार्टमेंट देने के वादे को लेकर चिंता जताई। विजयपत ने दावा किया कि वह घर में दाखिल नहीं हो सकते क्योंकि उनके लिए घर में जाना मना है।इस विवाद के चलते कानूनी कार्रवाई शुरू हुई, जो आखिरकार अदालत तक जा पहुंची। इस विवाद में शामिल पक्षों को अपने झगड़े को सुलझाने के लिए सिर्फ संपत्ति के अधिकारों से कहीं अधिक जटिल मामले सुलझाने थे। जारी रहा विवाद मार्च 2024 में साथ में खींची गई एक तस्वीर से अटकलें लगीं कि गौतम और उनके पिता विजयपत सिंघानिया के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद सुलझ गया है। मगर विजयपत ने कहा कि यह मुलाकात सुलह के लिए नहीं थी। उन्होंने कहा था कि संपत्ति और शेयरों को लेकर विवाद अभी भी जारी है। कानपुर में हुआ था जन्म विजयपत सिंघानिया का जन्म 4 अक्टूबर, 1938 को कानपुर में हुआ था। वे JK Group परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो भारतीय व्यापार जगत में पहले से ही एक जाना-माना नाम है। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने करियर की शुरुआत कर दी थी, क्योंकि उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें बिजनेस वर्क्स तक सीधी पहुँच रही।उनके कारोबारी ज्ञान का डेवलपमेंट मुंबई के सिडेनहम कॉलेज में उनकी पढ़ाई के दौरान हुआ, जहाँ उन्होंने कॉमर्स की शिक्षा प्राप्त की। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने अपने पारिवारिक बिजनेस में काम किया, जहाँ वे धीरे-धीरे कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते रहे। ये भी पढ़ें - सिंघानिया परिवार के पास भारत का दूसरा सबसे महंगा घर, इस मामले में एंटीलिया भी पीछे; मगर इसलिए रहा बाप-बेटे में विवाद
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