अगर आप जीवन में खराब समय को बदलना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने मन को स्थिर, शांत और सकारात्मक बनाइए, क्योंकि जैसे आपके मन की दशा होती है, वैसी ही आपके जीवन की दिशा बन जाती है। मन यदि विचलित हो, तो समय भी विपरीत हो जाता है, लेकिन जब मन स्थिर और सम्यक हो, तो वही समय अनुकूल बन जाता...
आप अपने मन को बदल सकते हैं और जब मन बदलता है तो परिस्थितियां बदलती हैं। बाहरी परिस्थितियों में परिवर्तन लाने के लिए ग्रह स्थिति के साथ-साथ मनःस्थिति में अनुकूलता आवश्यक है। ग्रहों का उपाय तभी लाभ लाभदायक रहता है, जब उपाय के साथ-साथ मनःस्थिति भी संशय मुक्त होकर सफलता की अभिलाषा करें। जब हम भीतर से उलझे रहते हैं तो बाहर की दुनिया भी बिखरी-बिखरी सी लगती है। जैसे ही मन स्पष्ट और शांत होता है, हमारे निर्णय बेहतर होने लगते हैं, संबंध सुधरते हैं और अवसर अपने आप मिलने लगते हैं। किसी ने सही ही कहा है कि समय केवल घड़ी में नहीं चलता, समय मन में भी चलता है। जन्मकुंडली में दशा और गोचर बाहर के योग दिखाते हैं, लेकिन उनका फल व्यक्ति की आंतरिक ग्रह स्थिति यानी उसके मन के अनुसार घटित होता है।बाहर कुछ नहीं बदलता जब तक भीतर से आप न बदलें एक व्यक्ति रोज शिकायत करता था कि दुनिया बहुत खराब है, लोग काफी स्वार्थी हैं, रिश्ते खोखले हो गए हैं और किस्मत भी उसका साथ नहीं देती। एक दिन एक साधु ने उससे मुस्कराकर कहा, ‘दर्पण को कोसने से चेहरा सुंदर नहीं होता, खुद को भीतर से निखारो, फिर दुनिया भी सुंदर लगेगी।’ उस दिन के बाद से उसने अपने भीतर झांकना शुरू किया और सच में उसकी दुनिया बदलने लगी। जब तक आप अपने भीतर बदलाव नहीं लाते, तब तक बाहरी दुनिया भी वैसी ही बनी रहती है। भीतर की रोशनी जलाओ, तभी बाहर का अंधकार दूर होगा। ज्योतिषीय शोध के दौरान अनेक लोगों की जन्मपत्री एवं उनकी ग्रह दशा को देखने के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि जब तक आप अपने विचारों, भावनाओं और दृष्टिकोण को नहीं बदलते, तब तक बाहरी परिस्थितियाँ भी वैसी ही बनी रहती हैं। परिवर्तन की शुरुआत भीतर से होती है, वही परिवर्तन धीरे-धीरे आपके जीवन के हर क्षेत्र में झलकने लगता है। इसलिए जब भी आप पूजा-पाठ अथवा कोई भी ज्योतिषीय उपाय करें तो अपनी मनःस्थिति पर भी ध्यान रखें ताकि आपको पूर्ण शुभ फल प्राप्त हो सके।.
आप अपने मन को बदल सकते हैं और जब मन बदलता है तो परिस्थितियां बदलती हैं। बाहरी परिस्थितियों में परिवर्तन लाने के लिए ग्रह स्थिति के साथ-साथ मनःस्थिति में अनुकूलता आवश्यक है। ग्रहों का उपाय तभी लाभ लाभदायक रहता है, जब उपाय के साथ-साथ मनःस्थिति भी संशय मुक्त होकर सफलता की अभिलाषा करें। जब हम भीतर से उलझे रहते हैं तो बाहर की दुनिया भी बिखरी-बिखरी सी लगती है। जैसे ही मन स्पष्ट और शांत होता है, हमारे निर्णय बेहतर होने लगते हैं, संबंध सुधरते हैं और अवसर अपने आप मिलने लगते हैं। किसी ने सही ही कहा है कि समय केवल घड़ी में नहीं चलता, समय मन में भी चलता है। जन्मकुंडली में दशा और गोचर बाहर के योग दिखाते हैं, लेकिन उनका फल व्यक्ति की आंतरिक ग्रह स्थिति यानी उसके मन के अनुसार घटित होता है।बाहर कुछ नहीं बदलता जब तक भीतर से आप न बदलें एक व्यक्ति रोज शिकायत करता था कि दुनिया बहुत खराब है, लोग काफी स्वार्थी हैं, रिश्ते खोखले हो गए हैं और किस्मत भी उसका साथ नहीं देती। एक दिन एक साधु ने उससे मुस्कराकर कहा, ‘दर्पण को कोसने से चेहरा सुंदर नहीं होता, खुद को भीतर से निखारो, फिर दुनिया भी सुंदर लगेगी।’ उस दिन के बाद से उसने अपने भीतर झांकना शुरू किया और सच में उसकी दुनिया बदलने लगी। जब तक आप अपने भीतर बदलाव नहीं लाते, तब तक बाहरी दुनिया भी वैसी ही बनी रहती है। भीतर की रोशनी जलाओ, तभी बाहर का अंधकार दूर होगा। ज्योतिषीय शोध के दौरान अनेक लोगों की जन्मपत्री एवं उनकी ग्रह दशा को देखने के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि जब तक आप अपने विचारों, भावनाओं और दृष्टिकोण को नहीं बदलते, तब तक बाहरी परिस्थितियाँ भी वैसी ही बनी रहती हैं। परिवर्तन की शुरुआत भीतर से होती है, वही परिवर्तन धीरे-धीरे आपके जीवन के हर क्षेत्र में झलकने लगता है। इसलिए जब भी आप पूजा-पाठ अथवा कोई भी ज्योतिषीय उपाय करें तो अपनी मनःस्थिति पर भी ध्यान रखें ताकि आपको पूर्ण शुभ फल प्राप्त हो सके।
Direction Life Change जीवन परिवर्तन संकल्प शक्ति Self-Growth Inner Self
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