पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI, अमेरिका के CIA और इजरायल के मोसाद के बारे में तो सभी जानते हैं. वहीं जब बात बांग्लादेश जैसे देश की आती है तो कम ही लोगों को इनकी इंटेलिजेंस एजेंसियों के बारे में पता होता है. जबकि, आज जो बांग्लादेश के हालात हैं, उसके लिए कहीं न कहीं वहां की इंटेलिजेंस एजेंसी को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है.
भारत का पड़ोसी बांग्लादेश को कई बार नेशनल क्राइसिस या राष्ट्रीय आपातकाल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा है. चाहे पिछले साल हुए हिंसक आंदोलन की बात हो, जिसमें प्रधानमंत्री शेख हसीना को भागना पड़ा था या फिर पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान और जियाउर रहमान की हत्याएं.
इन सबके लिए कहीं न कहीं वहां की खुफिया तंत्र की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया जाता है. .stroy-870 .read-more-content ~ div {display: none;} .stroy-870 .read-more-content #tab-link-wrapper-plugin {display: none;} .stroy-870 .read-more-content #live-tv-ico {display: none;}.story-with-main-sec .read-more-content p.edpara {display: none;}और पढ़ेंबांग्लादेश एक ऐसा राष्ट्र है, जहां सीक्रेट सर्विस और इंटेलिजेंस इकट्ठा करने के लिए एक दो नहीं बल्कि दर्जन भर खुफिया एजेंसियां हैं. फिर, इनमें से एक का भी नाम दुनिया के दूसरे देश के लोग तो दूर, भारत के नागरिकों को भी पता नहीं होगा. क्योंकि यहां की खुफिया एजेंसिया कई मौके पर काफी कमजोर और नाकाम साबित हुई है. बांग्लादेश के राष्ट्रीय संकट के लिए जिम्मेदार रही हैं खुफिया एजेंसियांन्यू एज की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक अशरफुल हुदा ने हाल में ही कहा था कि खुफिया विफलताएं बांग्लादेश के कुछ सबसे गंभीर राष्ट्रीय संकटों के लिए जिम्मेदार थीं. इनमें पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान और जियाउर रहमान की हत्याएं भी शामिल हैं. साथ ही 21 अगस्त 2004 को ढाका में अवामी लीग की रैली पर हुआ घातक ग्रेनेड हमला शामिल है. Advertisement शेख हसीना से जुड़ा संकट वहीं पिछले साल हिंसक आंदोलन के बाद इस्तीफा देकर देश से भागने को मजबूर हुई शेख हसीन के इस हालात के पीछे भी वहां की खुफिया तंत्र की विफलता को वजह माना जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, शेख हसीना के 15 साल के कार्यकाल में बांग्लादेश की इंटेलिजेंस एंजेंसियां पूरी तरह से नाकाम साबित हुई.रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़ा क्राइसिसइसके अलावा 2017 में आए रोहिंग्या संकट के पीछे भी बांग्लादेश के खुफियातंत्र की विफलता को जिम्मेदार माना जाता है. खुफिया एजेंसियों ने पड़ोसी म्यांमार की स्थिति का गलत आकलन किया था. यही वजह है कि 2017 में रोहिंग्या शरणार्थियों का एक बड़ा प्रवाह देश में घुस आया और वहां के हालात अचानक से चरमरा गए. एक दर्जन से ज्यादा हैं एजेंसियांबांग्लादेश में कम से कम एक दर्जन खुफिया एजेंसियां हैं. इनमें से, चार एजेंसियां प्रमुख हैं - विशेष शाखा , राष्ट्रीय सुरक्षा खुफिया , सेना खुफिया महानिदेशालय और राष्ट्रीय दूरसंचार एवं निगरानी केंद्र . बांग्लादेश में आंतरिक मामलों और बाहर के हालात पर निगरानी रखने वाली इन एजेंसियों के बीच हमेशा से तालमेल की कमी और प्रतिद्वंदता रही है. ऐसे में जानते हैं कि बांग्लादेश में कौन-कौन सी खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं और इनके कार्यक्षेत्र क्या हैं. ढाका ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, यहां कुछ समानताओं के बावजूद, प्रत्येक खुफिया संगठन के विशिष्ट कर्तव्य हैं. बांग्लादेश में अनेक घरेलू खुफिया एजेंसियां, सरकारी और स्वतंत्र दोनों तरह से काम करती हैं. Advertisement डीजीएफआई और एनएसआई सेना खुफिया महानिदेशालय और राष्ट्रीय सुरक्षा खुफिया देश की सबसे प्रसिद्ध खुफिया एजेंसियों में से हैं. ये दोनों संगठन खुफिया जानकारी इकट्ठा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए काम करते हैं.डीजीएफआई का मुख्य कार्य राष्ट्रीय रक्षा से संबंधित खुफिया जानकारी एकत्र करना और देश की संप्रभुता की रक्षा करना है. डीजीएफआई के अधीन कई अन्य इकाइयां भी काम करती हैं- जैसे कि खुफिया ब्यूरो और प्रति-खुफिया विभाग.दूसरी ओर, एनएसआई घरेलू और विदेशी, दोनों माध्यमों से प्राप्त खुफिया जानकारी एकत्र करता है और उसका विश्लेषण करता है. इस संगठन का मुख्य कार्य जासूसी है.एसबी और सीआईडीपुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार, विशेष शाखा बांग्लादेश पुलिस की मुख्य खुफिया एजेंसी है. एजेंसी की सबसे बड़ी और सबसे सक्रिय इकाई सिटी-एसबी है.सिटी-एसबी राजधानी ढाका से संबंधित खुफिया जानकारी एकत्र करने और खुफिया विश्लेषण के आधार पर उचित कार्रवाई की सिफारिश करने पर केंद्रित है. प्रत्येक जिले में डी-एसबी नामक एक विशेष इकाई भी होती है, जो जिला पुलिस अधीक्षक के अधीन कार्य करती है.आपराधिक जांच विभाग बांग्लादेश पुलिस की एक विशेष शाखा है. यह इकाई खुफिया जानकारी एकत्र करती है और सनसनीखेज हत्याओं, आतंकवाद, उग्रवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण, धन शोधन और संगठित अपराध सहित गंभीर अपराधों की जांच करती है. Advertisement आरएबी रैपिड एक्शन बटालियन बांग्लादेश पुलिस की एक विशिष्ट अपराध-विरोधी और आतंकवाद-विरोधी इकाई है. इसमें पुलिस, सेना, नौसेना, वायु सेना और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के सदस्य शामिल होते हैं.यह संगठन ख़ुफ़िया जानकारी इकट्ठा करता है और देश भर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय रूप से योगदान देता है. आरएबी अन्य कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को खुफिया रिपोर्ट उपलब्ध कराकर उनकी सहायता भी करता है.सीटीटीसी आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध निरोधक नामक एक अन्य पुलिस इकाई, देश और विदेश में उग्रवाद और आतंकवाद पर अंकुश लगाने के एकमात्र उद्देश्य से कार्य करती है. इसी उद्देश्य से हाल ही में आतंकवाद-रोधी इकाई नामक एक अन्य पुलिस इकाई का गठन किया गया है. हालांकि, यह अभी तक पूरी क्षमता से काम करना शुरू नहीं कर पाई है.पीबीआई बांग्लादेश की प्रमुख पुलिस खुफिया इकाइयों में से एक पुलिस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन है. इस इकाई का संगठनात्मक ढांचा संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार के संघीय जांच ब्यूरो के समान है. पीबीआई उन कठिन मामलों की जांच करती है जिनमें स्पष्ट सुराग या उद्देश्य का अभाव होता है.नौसेना पुलिस, पर्यटक पुलिस और औद्योगिक पुलिस की अपनी खुफिया इकाइयां भी हैं जो क्रमशः जलमार्गों, पर्यटन स्थलों और औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम करती हैं.---- समाप्त ----
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