सूरज बड़जात्या की नई सीरीज 'बड़ा नाम करेंगे' रिश्तों, परिवार और संस्कारों की कहानी है। रतलाम के राठी परिवार के छोटे बेटे ऋषभ और उज्जैन की सुरभि के बीच प्यार और विवाह की कहानी इस सीरीज में बिखेर रही है।
'बड़ा नाम करेंगे' की कहानी'पंछी जब ऊंचा उड़ता है ना, तो सबसे ज्यादा नाज़ उस साख को होता है, जहां से उसने उड़ान भरी थी।' सीरीज बड़ा नाम करेंगे के सबसे सीनियर किरदार आनंद राठी एक सीन में यह पते की सीख देते हैं। यही शो का सार भी है कि इंसान चाहे जितना आगे निकल जाए, उसे अपनी जड़ें नहीं भूलनी चाहिए। बड़े पर्दे पर मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन, हम साथ-साथ है और विवाह जैसी फिल्मों से परिवार और रिश्तों की डोर मजबूत करते रहे फिल्ममेकर सूरज बड़जात्या ने इस सीरीज से ओटीटी पर दस्तक दी है। खास बात यह है कि अमूमन हिंसा और गालियों से भरे क्राइम, थ्रिलर शोज के लिए चर्चित ओटीटी पर भी सूरज का यह शो प्यार और परिवार, आदर्शों और संस्कारों की चमक ही बिखेर रहा है।'बड़ा नाम करेंगे' का ट्रेलर 'बड़ा नाम करेंगे' का रिव्यूकहानी सूरज बड़जात्या मार्का फिल्मों सी ही है। रतलाम का राठी परिवार है, जिनके संस्कार और मिष्ठान भंडार की मिठाइयों का स्वाद दूर दूर तक मशहूर है। परिवार का छोटा बेटा ऋषभ यह सोचकर मुंबई में एमबीए कर रहा है कि परिवार और व्यापार का और 'बड़ा नाम करेंगे'। मगर घर के बड़ों काे ऋषभ के लिए मुंबई में ही पढ़ने वाली उज्जैन की सुरभि के रूप में एक बढ़िया रिश्ता मिल जाता है और सभी इस 'विवाह' की खुशी में डूबने उतराने लगते हैं। सुरभि के मिडिल क्लास शिक्षक पिता ललित गुप्ता अपनी बेटी पर आंख मूंदकर नाज करते हैं। मगर कहानी में ट्विस्ट यह है कि सुरभि और ऋषभ की अरेंज्ड मैरिज कराने निकले परिवार वालों को यह नहीं पता कि दोनों के बीच 'मैंने प्यार किया' वाला सीन भी घट चुका है। दोनों लॉकडाउन के चलते मुंबई में साथ रह चुके हैं। जबकि, उज्जैन और रतलाम जैसे छोटे शहर वालों, खासकर ऋषभ के रूढ़िवादी परिवार के लिए एक लड़की और एक लड़के का साथ रहना बहुत बड़ी बात है। ऐसे में, जब यह खुलासा होता है तो इनकी प्रेम कहानी और विवाह पर क्या असर पड़ता है? यह जानने के लिए आपको सीरीज देखनी होगी।लेखकों एस मनस्वी और विदित त्रिपाठी ने निश्चित तौर पर सूरज बड़जात्या के बैनर की परंपरा और प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर ही यह कहानी लिखी है, जिसमें उनकी मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन और विवाह जैसी सभी फिल्मों की झलक मिलती है। वहीं, गुल्लक फेम निर्देशक पलाश वासवानी ने इस शो में भी रिश्तों की डोर को उसी प्यार से पिरोया है। शो की सबसे बड़ी खूबी इसका सहज-सरल अंदाज है। किरदारों में आपको अपने ताऊ जी, ताई जी, फूफा जी का अक्स भी दिखता है। साथ ही अमृता प्रीतम से लेकर काका हाथरसी तक की मौजूदगी सुहाती है। मगर, स्क्रीनप्ले की लंबाई के चलते गुल्लक वाली कसावट की कमी महसूस होती है। साथ ही, आज के समय के हिसाब से कई चीजें रियलिस्टिक नहीं लगतीं। जैसे, सुरभि का अपने इतने सपोर्टिव परिवार से झूठ बोलना। उसकी मां कहती भी है कि तुमने अपने परिवार से ज्यादा एक अनजान लड़के पर भरोसा कर लिया। वह भी जिसे वह उसे इतना नापसंद करती थी, पर इसके बिना कहानी की नींव ही नहीं पड़ती। महलनुमा घर में बड़े भाई, छोटे भाई, जेठानी, देवरानी, बेटा-बहू जिस हम साथ-साथ हैं वाले अंदाज में रहते हैं और ताऊ जी-ताई जी के आगे सांस नहीं लेते, यह बात अब छोटे शहरों में भी नहीं दिखती।ऐक्टिंग की बात करें, तो टीवी शो ये उन दिनों की बात है से मशहूर हुईं आयशा अपनी मासूमियत और नैचरल अदाकारी से फिर दिल जीत लेती हैं। वहीं, रितिक घनशानी ने ऋषभ के रूप में सूरज बड़जात्या के नए प्रेम की जिम्मेदारी बखूबी उठाई है। उनकी ऐक्टिंग में भरपूर आत्मविश्वास है। जबकि, ताऊ जी के रूप में कंवलजीत सिंह, ताई जी अलका अमीन, फूफा बने राजेश तैलंग, सुरभि के पापा जमील खान जैसे ऐक्टर्स ने अपने कद के अनुरूप सीरीज को मजबूती दी है। जमील खान को देखकर लगता है कि काश हर बेटी को ऐसे पिता मिलें। हां, अंजना सुखानी के ट्रैक की इतनी अहमियत होने के बावजूद उनके सीन कम हैं। अनुराग सैकिया का संगीत सुकून भरा है। वहीं, तकनीकी पक्ष में सिनेमैटोग्राफर शिव प्रकाश राठौर और प्रोडक्शन डिजाइनर तर्पण श्रीवास्तव की भी तारीफ बनती है। कुल मिलाकर, धीमी आंच पर पकती रिश्तों की यह कहानी आप पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं।क्यों देखें: नई पीढ़ी के सपनों और पुरानी पीढ़ी के संस्कारों के बीच गुथी यह सीरीज पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती है।.
'बड़ा नाम करेंगे' की कहानी'पंछी जब ऊंचा उड़ता है ना, तो सबसे ज्यादा नाज़ उस साख को होता है, जहां से उसने उड़ान भरी थी।' सीरीज बड़ा नाम करेंगे के सबसे सीनियर किरदार आनंद राठी एक सीन में यह पते की सीख देते हैं। यही शो का सार भी है कि इंसान चाहे जितना आगे निकल जाए, उसे अपनी जड़ें नहीं भूलनी चाहिए। बड़े पर्दे पर मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन, हम साथ-साथ है और विवाह जैसी फिल्मों से परिवार और रिश्तों की डोर मजबूत करते रहे फिल्ममेकर सूरज बड़जात्या ने इस सीरीज से ओटीटी पर दस्तक दी है। खास बात यह है कि अमूमन हिंसा और गालियों से भरे क्राइम, थ्रिलर शोज के लिए चर्चित ओटीटी पर भी सूरज का यह शो प्यार और परिवार, आदर्शों और संस्कारों की चमक ही बिखेर रहा है।'बड़ा नाम करेंगे' का ट्रेलर 'बड़ा नाम करेंगे' का रिव्यूकहानी सूरज बड़जात्या मार्का फिल्मों सी ही है। रतलाम का राठी परिवार है, जिनके संस्कार और मिष्ठान भंडार की मिठाइयों का स्वाद दूर दूर तक मशहूर है। परिवार का छोटा बेटा ऋषभ यह सोचकर मुंबई में एमबीए कर रहा है कि परिवार और व्यापार का और 'बड़ा नाम करेंगे'। मगर घर के बड़ों काे ऋषभ के लिए मुंबई में ही पढ़ने वाली उज्जैन की सुरभि के रूप में एक बढ़िया रिश्ता मिल जाता है और सभी इस 'विवाह' की खुशी में डूबने उतराने लगते हैं। सुरभि के मिडिल क्लास शिक्षक पिता ललित गुप्ता अपनी बेटी पर आंख मूंदकर नाज करते हैं। मगर कहानी में ट्विस्ट यह है कि सुरभि और ऋषभ की अरेंज्ड मैरिज कराने निकले परिवार वालों को यह नहीं पता कि दोनों के बीच 'मैंने प्यार किया' वाला सीन भी घट चुका है। दोनों लॉकडाउन के चलते मुंबई में साथ रह चुके हैं। जबकि, उज्जैन और रतलाम जैसे छोटे शहर वालों, खासकर ऋषभ के रूढ़िवादी परिवार के लिए एक लड़की और एक लड़के का साथ रहना बहुत बड़ी बात है। ऐसे में, जब यह खुलासा होता है तो इनकी प्रेम कहानी और विवाह पर क्या असर पड़ता है? यह जानने के लिए आपको सीरीज देखनी होगी।लेखकों एस मनस्वी और विदित त्रिपाठी ने निश्चित तौर पर सूरज बड़जात्या के बैनर की परंपरा और प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर ही यह कहानी लिखी है, जिसमें उनकी मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन और विवाह जैसी सभी फिल्मों की झलक मिलती है। वहीं, गुल्लक फेम निर्देशक पलाश वासवानी ने इस शो में भी रिश्तों की डोर को उसी प्यार से पिरोया है। शो की सबसे बड़ी खूबी इसका सहज-सरल अंदाज है। किरदारों में आपको अपने ताऊ जी, ताई जी, फूफा जी का अक्स भी दिखता है। साथ ही अमृता प्रीतम से लेकर काका हाथरसी तक की मौजूदगी सुहाती है। मगर, स्क्रीनप्ले की लंबाई के चलते गुल्लक वाली कसावट की कमी महसूस होती है। साथ ही, आज के समय के हिसाब से कई चीजें रियलिस्टिक नहीं लगतीं। जैसे, सुरभि का अपने इतने सपोर्टिव परिवार से झूठ बोलना। उसकी मां कहती भी है कि तुमने अपने परिवार से ज्यादा एक अनजान लड़के पर भरोसा कर लिया। वह भी जिसे वह उसे इतना नापसंद करती थी, पर इसके बिना कहानी की नींव ही नहीं पड़ती। महलनुमा घर में बड़े भाई, छोटे भाई, जेठानी, देवरानी, बेटा-बहू जिस हम साथ-साथ हैं वाले अंदाज में रहते हैं और ताऊ जी-ताई जी के आगे सांस नहीं लेते, यह बात अब छोटे शहरों में भी नहीं दिखती।ऐक्टिंग की बात करें, तो टीवी शो ये उन दिनों की बात है से मशहूर हुईं आयशा अपनी मासूमियत और नैचरल अदाकारी से फिर दिल जीत लेती हैं। वहीं, रितिक घनशानी ने ऋषभ के रूप में सूरज बड़जात्या के नए प्रेम की जिम्मेदारी बखूबी उठाई है। उनकी ऐक्टिंग में भरपूर आत्मविश्वास है। जबकि, ताऊ जी के रूप में कंवलजीत सिंह, ताई जी अलका अमीन, फूफा बने राजेश तैलंग, सुरभि के पापा जमील खान जैसे ऐक्टर्स ने अपने कद के अनुरूप सीरीज को मजबूती दी है। जमील खान को देखकर लगता है कि काश हर बेटी को ऐसे पिता मिलें। हां, अंजना सुखानी के ट्रैक की इतनी अहमियत होने के बावजूद उनके सीन कम हैं। अनुराग सैकिया का संगीत सुकून भरा है। वहीं, तकनीकी पक्ष में सिनेमैटोग्राफर शिव प्रकाश राठौर और प्रोडक्शन डिजाइनर तर्पण श्रीवास्तव की भी तारीफ बनती है। कुल मिलाकर, धीमी आंच पर पकती रिश्तों की यह कहानी आप पूरे परिवार के साथ देख सकते हैं।क्यों देखें: नई पीढ़ी के सपनों और पुरानी पीढ़ी के संस्कारों के बीच गुथी यह सीरीज पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती है।
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