अगर कोई व्यक्ति आपकी अनुमति के बिना फोन बातचीत रिकॉर्ड करता है, तो यह निजता का उल्लंघन है. BNS की धारा 77, 79, 351 और 356 के तहत ऐसा करना अपराध माना जाएगा. खासकर अगर रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल धमकी, ब्लैकमेल या बदनामी के लिए किया गया हो, तो सजा तीन से सात साल तक हो सकती है. ऐसे मामलों में पीड़ित साइबर पुलिस या ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकता है.
नई दिल्ली. अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या बॉयफ्रेंड से फोन पर बात कर रहे हों. आपकी इजाजत के बिना सामने वाला पक्ष अगर बातचीत को रिकॉर्ड कर ले तो क्या यह अपराध होगा या नहीं. आपकी सहमति के बिना यह फोन रिकॉर्ड किया गया.
इस तरह की चीजों पर कानून क्या कहता है.? क्या आप इसे लेकर शिकायत कर सकते हैं या नहीं. चलिए हम आपको कानून के नजरिए से इस बारे में विस्तार में जानकारी देते हैं. दरअसल, अगर आप खुद इस तरह की बातचीत का हिस्सा हैं तो यह नैतिक रूप से तो गलत है लेकिन कानूनन आप सीधे तौर पर कुछ नहीं कर सकते लेकिन इसके बावजूद आपके पास काफी अधिकार अभी भी है. अगर आप खुद बातचीत में शामिल हैं तो तकनीकी रूप से रिकॉर्डिंग अवैध नहीं मानी जा सकती लेकिन अगर सामने वाली पार्टी ने अनुमति के बिना बाद में इसे आपको नुकसान पहुंचाने या बदनाम करने के लिए इस्तेमाल किया तो यह अपराध की श्रेणी में आएगा. अदालतें ऐसे मामलों में इरादे को अहम मानती हैं. अगर आपके साथ ऐसा हो तो क्या करें? • सबसे पहले नजदीकी साइबर थाने या पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें. • साथ में कॉल रिकॉर्डिंग, चैट, स्क्रीनशॉट आदि साक्ष्य के रूप में दें. • आप नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत भी कर सकते हैं. किस कानून के तहत आपको मिलेगा न्याय? कॉल रिकॉर्डिंग और निजता उल्लंघन पर नए कानून की धाराएं 1. आईटी एक्ट 2000 की धारा 66E — किसी की निजी बातचीत, फोटो या वीडियो को बिना अनुमति रिकॉर्ड या साझा करना तीन साल की जेल या दो लाख रुपये तक जुर्माने से दंडनीय है. 2. महिलाओं की निजता भंग करने पर: ➤ BNS की धारा 77 – अगर कोई व्यक्ति किसी महिला की अनुमति के बिना उसकी निजी गतिविधियों को रिकॉर्ड, प्रसारित या शेयर करता है, तो यह अपराध है. पहली बार अपराध पर – 3 साल तक की सजा और जुर्माना. दोबारा अपराध पर – 7 साल तक की सजा और जुर्माना. ➤ BNS की धारा 79 – किसी महिला की इज्जत को ठेस पहुंचाने वाला कोई शब्द, इशारा या कृत्य करने पर 3 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों. 3. ब्लैकमेल, धमकी या बदनाम करने के मामलों में: ➤ BNS की धारा 351 – किसी को डराने, धमकाने या नुकसान पहुंचाने की मंशा से रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करना अपराध है. सजा: 2 साल तक की कैद, और अगर यह किसी महिला या कमजोर वर्ग के खिलाफ है तो 7 साल तक की कैद भी हो सकती है. ➤ BNS की धारा 356 – किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री साझा करने पर 2 साल तक की कैद या जुर्माना. सी भी रिश्ते में भरोसा अहम है, लेकिन तकनीक के दौर में रिकॉर्ड बटन’ दबाने से पहले जरा सोचिए. यह आपके लिए कानूनी जाल भी बन सकता है. निजता सिर्फ अधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी भी है.
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