Shashi Tharoor: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एच-1बी वीजा पर बड़ा बयान दिया है. उनका कहना है कि 1 लाख डॉलर का फीस कुछ लोगों और कंपनियों को थोड़े वक्त के लिए नुकसान पहुंचा सकता है. लेकिन लंबे समय में यह भारत को मजबूत बना सकता है. उन्होंने कहा कि हमें इसे अलग नजरिए से नहीं देखना चाहिए.
अमेरिका में काम करने वाले हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए H-1B वीजा पर ट्रंप सरकार की भारी फीस को लेकर चिंता जताई जा रही है. लेकिन कांग्रेस के सीनियर नेता शशि थरूर की राय इसपर मुख्तलिफ है. कांग्रेस सांसद का मानना है कि यह फैसला भारत के लिए लंबे वक्त में फायदेमंद साबित हो सकता है.
शशि थरूर ने एक इंटरव्यू में कहा कि, इस H-1B मामले को लेकर हमें हताश नहीं होना चाहिए. यह झटका है. यह अप्रत्याशित था और शॉर्ट टर्म में कुछ लोगों व कंपनियों को नुकसान होगा. लेकिन मध्यम अवधि में इसका ऐसा असर भी हो सकता है जो हमारे पक्ष को मजबूत कर सकते हैं. मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके थरूर ने कहा कि हमें बार-बार खुद को पीड़ित समझने की बजाय इस फैसले को मौके की तरह देखना चाहिए, क्योंकि इससे भारत के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं. कांग्रेस नेता शशि थरूर का रुख उनकी पार्टी से कुछ नरम नजर आया. जहां राहुल गांधी ने H-1B वीजा, बड़े व्यापारिक टैक्स और अन्य मसलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कमजोर पीएम कहा. वहीं, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी पर विदेश नीति को सिर्फ गले लगाने तक सीमित करने का आरोप लगाया. हालांकि, थरूर ने जोर देकर कहा कि डोनाल्ड ट्रंप का स्वभाव अस्थिर और अप्रत्याशित है. उन्होंने कहा, अगर इस साल की शुरुआत में ट्रंप हमारे लिए नकारात्मक रूप से अप्रत्याशित रहे हैं, तो आने वाले महीनों और सालों में वे हमारे लिए सकारात्मक रूप से भी अप्रत्याशित साबित हो सकते हैं. H-1B फीस झटके का असर: शशि थरूर का नजरिया शशि थरूर का कहना है कि H-1B वीजा पर भारी फीस लगाने का आखिरी नतीजा भारत के हक में जाएगा।. कई जानकार मानते हैं कि इस फैसले से वीजा प्रोग्राम करीब खत्म हो जाएगा. थरूर ने कहा, अमेरिका के पास पर्याप्त इंजीनियरिंग ग्रेजुएट और सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल नहीं हैं. नतीजा यह होगा कि जो काम अभी अमेरिका में हो रहा है, वह इंग्लैंड, आयरलैंड, फ्रांस, जर्मनी और सबसे ज्यादा भारत की कंपनियों को आउटसोर्स किया जाएगा. वहीं, सत्ताधारी बीजेपी इसे छिपा हुआ वरदान बता रही है. उनका कहना है कि भारतीय इंजीनियर अब अपने देश लौटकर यहां की प्रगति में और योगदान देंगे. थरूर ने इस फैसले को ट्रंप के MAGA मूवमेंट की सोच का नतीजा भी बताया. उन्होंने कहा कि ट्रंप को नस्लवादी कहना सही नहीं होगा, क्योंकि उनके सभी जातियों के दोस्त रहे हैं, लेकिन MAGA समर्थकों में आप्रवासी विरोधी पूर्वाग्रह साफ दिखता है. लोकसभा सदस्य ने यह भी माना कि 2025 में भारत-अमेरिका रिश्तों को मिले-जुले और विरोधाभासी संकेतों की वजह से दोनों देशों के समीकरण पर असर पड़ा है. अब तक सरकार की प्रतिक्रिया समझदारी भरी शशि थरूर ने मोदी सरकार की अब तक की प्रतिक्रिया को काफी संतुलित और समझदारी भरी बताया. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि साथ ही हमें कड़े रुख की भी जरूरत है, जैसे रूस से तेल खरीदने का अधिकार. इसी मुद्दे को आधार बनाकर अमेरिका ने 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे टोटल फीस अगस्त के आखिर से 50% हो गया. थरूर ने ट्रंप के उस बयान को अपमानजनक कहा जिसमें उन्होंने कहा था कि टभारतीय अर्थव्यवस्था मर चुकी है. जबकि, ट्रंप के इस बयान पर राहुल गांधी भी सहमत दिखे थे. हालांकि, थरूर ने कहा, फिर अचानक ट्रंप कहते हैं कि हमारा रिश्ता अच्छा है, मोदी मेरे दोस्त हैं. वे उन्हें जन्मदिन पर फोन करते हैं और ट्रेड डील की बातचीत भी फिर से शुरू हो जाती है. ऐसे विरोधाभासी संकेतों की वजह से यह कहना आसान नहीं है कि भारत-अमेरिका रिश्ते किस स्थिति में हैं. उन्होंने तुलना करते हुए कहा, शॉर्ट टर्म में हम मानो एक ऐसे जहाज की तरह हैं जो तूफानी और उथल-पुथल भरे मौसम से गुजर रहा है. लेकिन लंबे वक्त और बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें तो अब भी कई बुनियादी चीजें हमारे पक्ष में हैं. थरूर बोले: ट्रंप को शायद सिर्फ मिसेज ट्रंप ही समझ सकती हैं शशि थरूर ने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जानबूझकर भारत को निशाना बना रहे हैं या नहीं. उन्होंने कहा, ट्रंप अपने ही नियमों से चलते हैं, जो भी यह दावा करता है कि वह ट्रंप को पूरी तरह समझ सकता है या उनके अगले कदम का अंदाजा लगा सकता है, वह अभी पैदा नहीं हुआ है, सिवाय उनकी पत्नी के. मुझे सच कहूं तो मेलानिया ट्रंप के अलावा और कोई ऐसा नहीं दिखता, जिसने उनके साथ इतना लंबा रिश्ता निभाया हो. थरूर ने कहा, साथ ही, मोदी को किया गया ट्रंप का फोन यह दिखाता है कि वे दोनों के बीच कुछ महीनों पहले खत्म हुई दोस्ती को फिर से जीवित करने की कोशिश कर सकते हैं. लेकिन विडंबना यह है कि उसी फोन कॉल के थोड़े समय बाद उन्होंने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की भारी फीस लगा दी. उन्होंने आगे कहा, माफ कीजिए अगर मेरी भाषा थोड़ी बच-बचाकर बोलने जैसी लग रही है, लेकिन सच यह है कि हालात इतने अनिश्चित हैं कि कोई सीधा और आसान जवाब देना मुमकिन नहीं है. यही वजह है कि मैं बार-बार कह रहा हूं कि हमें चीजों को लंबे नजरिए से देखना चाहिए.
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