पिछले नौ दिन में क्या-क्या हुआ? ना-ना करते कैसे माना पाकिस्तान? पूरे वर्ल्ड कप ड्रामे की टाइमलाइन
नई दिल्ली. भारत बनाम पाकिस्तान के बीच खेले जाने वाले आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप मुकाबले को लेकर बवाल आखिरकार खत्म हो गया है. 1 फरवरी को पाकिस्तान सरकार की तरफ से भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करने की खबर सामने आई और 9 फरवरी तक आते आते मामला निपटने की खबर सामने आई.
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने रविवार को लाहौर में हुई तीन पक्षीय बैठक में पीसीबी और बीसीबी की कुछ मांगें मान ली हैं. इससे 2026 टी20 वर्ल्ड कप के लिए हफ्तों से चल रही अटकलों और असमंजस का अंत हो गया है. अब भारत-पाकिस्तान का यह बड़ा मुकाबला सिर्फ औपचारिक घोषणा का इंतजार कर रहा है. आईसीसी के डिप्टी चेयरमैन और सिंगापुर के प्रतिनिधि इमरान ख्वाजा को बोर्ड ने इस विवादास्पद मुद्दे पर मध्यस्थ चुना था. वे आईसीसी में प्रभावशाली हस्ती माने जाते हैं और बोर्ड में एसोसिएट मेंबर डायरेक्टर के तौर पर वोटिंग राइट्स रखते हैं. पीसीबी की ओर से मोहसिन नकवी और बांग्लादेश की ओर से पूर्व खिलाड़ी अमीनुल इस्लाम ने बैठक में हिस्सा लिया. तीनों ने मिलकर इस गतिरोध का समाधान निकाला और हफ्तों से चली आ रही अनिश्चितता को खत्म किया. 9 दिन में कैसे सुलझा मामला सोमवार देर शाम आईसीसी ने पीसीबी चीफ नकवी और उनके बांग्लादेशी समकक्ष के साथ हुई बैठक की आधिकारिक जानकारी साझा की. आईसीसी की प्रेस रिलीज में कहा बांग्लादेश टीम के T20 वर्ल्ड कप न खेल पाने पर अफसोस है. BCB अब भी ICC का महत्वपूर्ण सदस्य बना रहेगा. बांग्लादेश में क्रिकेट बहुत लोकप्रिय है , और ICC वहां क्रिकेट को बढ़ाने का काम जारी रखेगा. टीम के इस बार न खेलने से भविष्य में क्रिकेट पर कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा. आईसीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि बीसीबी पर कोई सजा नहीं होगी और भविष्य में किसी आईसीसी इवेंट की मेजबानी का अधिकार बांग्लादेश को दिया जाएगा. बीसीबी चाहे तो इस मामले में आईसीसी की विवाद समाधान समिति से संपर्क कर सकता है. पाकिस्तान ने रखी थी कितनी शर्तें ICC और PCB की लंबी मीटिंग हुई जिसमें BCB के बॉस भी मौजूद थे. PCB ने भारत से टी20 वर्ल्ड कप मैच खेलने को लेकर 5 शर्तें रखीं लेकिन ICC ने सिर्फ 2 मानीं. पाकिस्तान ने कहा कि भारत से दोबारा घरेलू-विदेशी मैच होने चाहिए या तीनों की ट्राई-सीरीज होनी चाहिए. ICC ने कहा ये हमारे बस की बात नहीं. BCCI और सरकारें तय करेंगी. पाकिस्तान कैसे बहिष्कार वापस लेने को हुआ मजबूर आईसीसी ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास मैच का बहिष्कार करने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि मेंबर्स पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट और दिसंबर 2024 में हुए समझौते के तहत जब भी भारत या पाकिस्तान आईसीसी इवेंट की मेजबानी करेगा, हाइब्रिड होस्टिंग मॉडल लागू होगा. पीसीबी पर बीसीबी और श्रीलंका व अमीरात के समकक्षों का दबाव भी बढ़ा, जिन्होंने पाकिस्तान से भारत के खिलाफ मैच से हटने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की. बढ़ते दबाव के चलते नकवी के पास प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बहिष्कार के फैसले को वापस लेने की गुजारिश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. दोनों के बीच सोमवार को लंबी बैठक हुई. भारत के मैच का बहिष्कार करने का कब हुआ फैसला पीसीबी चेयरमैन नकवी ने 26 जनवरी को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ बोर्ड के रुख पर विस्तृत चर्चा की थी. टीम के श्रीलंका रवाना होने से कुछ दिन पहले पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर सलमान अली आगा की अगुवाई वाली टीम को टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति दी, लेकिन साफ कर दिया कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ मैदान में नहीं उतरेगा. शरीफ ने इस हफ्ते इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इस रुख को दोहराया, जिससे बहिष्कार की पुष्टि हो गई. श्रीलंका बोर्ड ने पाकिस्तान को पत्र में क्या लिखा पीसीबी के भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार का फैसला श्रीलंका क्रिकेट को पसंद नहीं आया. श्रीलंकाई बोर्ड ने नकवी को पत्र लिखकर फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की. चेतावनी दी कि इससे सह-मेजबान देश को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है. पीसीबी ने शुरुआत में अपने फैसले पर अडिग रहने का फैसला किया. टूर्नामेंट शुरू होने से कुछ दिन पहले पीसीबी ने आईसीसी को औपचारिक पत्र लिखकर ‘फोर्स मेज्योर’ क्लॉज लागू कर भारत के खिलाफ ग्रुप ए मैच छोड़ने की मांग की. आईसीसी ने इस पर असहमति जताई और विस्तार से स्पष्टीकरण मांगा कि यह क्लॉज इस मामले में कैसे लागू होता है. आखिरी में पीसीबी को झुकना पड़ा.
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