पानीपत के जवान सत्यजीत का अंतिम संस्कार बिना राजकीय सम्मान के

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पानीपत के जवान सत्यजीत का अंतिम संस्कार बिना राजकीय सम्मान के
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हरियाणा के पानीपत के जवान सत्यजीत (25) का अंतिम संस्कार बिना राजकीय सम्मान के कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में तैनात जवान सत्यजीत की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई थी।

हरियाणा में पानीपत के जवान सत्यजीत का अंतिम संस्कार बिना राजकीय सम्मान के कर दिया गया। मतलौडा के पैतृक गांव शेरा में निकाली गई उनकी अंतिम यात्रा में कोई सैन्य अधिकारी शामिल नहीं हुआ, और न ही उन्हें सेना की ओर से सलामी दी गई।हालांकि, अंतिम यात्रा में शामिल होने बाद कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर लिखा- सत्यजीत श्रीनगर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए। सरकार शहीद के परिजनों के साथ है। हर मदद करेंगे।बता दें कि जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में तैनात जवान सत्यजीत की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई थी। उसकी करीब 2 महीने बाद 5 अप्रैल को शादी होनी थी। इसे लेकर घर में तैयारियां चल रहीं थी। वह खुद भी इसकी तैयारियों में जुटे हुए थे। 3 दिन पहले ही वह शादी की शॉपिंग कर ड्यूटी पर लौटे थे। सत्यजीत शूटिंग में नेशनल लेवल के खिलाड़ी थे। उन्होंने गोल्ड मेडल भी जीता था। स्पोर्ट्स कोटे से ही वह आर्मी में भर्ती हुए थे। अभी उनका परिवार मतलौडा में रहता है।मतलौडा में आवास पर पहुंचने के बाद जवान के शव को सेना की एम्बुलेंस से उतारते परिजन।जवान की मौत की सूचना मिलने के बाद उसके घर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं।जवान को श्रद्धांजलि देने पहुंचे कैबिनेट मिनिस्टर कृष्ण लाल पंवार।गांव शेरा के श्मशान में जवान के शव को रख नारेबाजी करते परिजन और लोग।गांव शेरा के श्मशान में जवान का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके छोटे भाई ने उसे मुखाग्नि दी।जवान का शव मंगलवार को श्रीनगर से हेलिकॉप्टर के जरिए दिल्ली भेजा गया था। इसके बाद आज दिल्ली से इसे सेना की एम्बुलेंस से घर पहुंचाया गया। यहां कुछ समय के लिए शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके दर्शन के लिए परिजनों के साथ बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद दोबारा शव को एम्बुलेंस में रखा गया और श्मशान ले जाया गया। जवान की शवयात्रा में बड़ी संख्या में लोग ट्रैक्टरों, बाइकों, कारों में सवार होकर शामिल हुए। जब शव श्मशान पहुंचा तो लोगों ने जमा होकर जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इसके बाद बिना सेना की सलामी के जवान के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। शव को जवान के छोटे भाई अर्पित ने मुखाग्नि दी।पिता सज्जन सिंह ने बताया है कि सत्यजीत 6 साल पहले स्पोर्ट्स कोटे से सेना की राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। वह 2 साल पहले हवलदार के पद पर पदोन्नत हुए थे। भर्ती होने से पहले उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी कई मेडल जीते थे। उन्हें हाल में ही आर्मी कमांडर पत्र से भी नवाजा गया था। पिता बताते हैं कि 2 महीने बाद सत्यजीत की शादी थी, इसलिए वह शॉपिंग के लिए छुट्टी पर घर आए थे। शादी के वक्त ज्यादा काम बाकी न रहे, इसलिए कपड़े तैयार करवा लिए थे। 9 फरवरी को ही वह छुट्टियां खत्म कर ड्यूटी पर लौटे थे।सज्जन सिंह बताते हैं कि 10 तारीख को उनके पास फोन आया कि सत्यजीत को गोली लगी है। ये सूचना मिलते ही पूरा परिवार चिंतित हो गया। परिवार बेटे के स्वस्थ होने की कामना कर ही रहा था कि 11 फरवरी को दोबारा फोन आया और बताया गया कि सत्यजीत की मौत हो गई है। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। हालांकि, परिवार को यह नहीं पता लगा कि गोली किस तरह लगी है।मोबाइल से खुलेगा जवान सत्यजीत की मौत का राज सत्यजीत की मौत एक हादसा है या आत्महत्या है, इसका राज उसके मोबाइल फोन से खुलेगा। दरअसल, घटनास्थल की एक फोटो सामने आई है। जिस फोटो को देखकर जानकारों ने बताया कि उसकी डेडबॉडी के पास एक मोबाइल रखा है, जोकि सत्यजीत का ही है। संभावना है कि आखिरी बार वह किसी के साथ फोन पर या वीडियो कॉल पर बात कर रहा होगा। अगर जवान ड्यूटी पर होता तो उसके पास मोबाइल नहीं होता और उसके सिर पर हेलमेट जरूर होता। इसके अलावा जिस अवस्था में शव था, उससे यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि जवान ने बैठे हुए घुटने पर AK-47 रखकर माथे पर स्टीक निशाना लगाकर गोली चलाई है। इसके बाद एकदम झटके से वह पीछे की ओर गिरा, जिसके बाद हाथ से AK-47 भी पीछे की ओर गिर गई।सत्यजीत के पिता सज्जन सिंह खुद सेना से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हैं। करीब 8 साल पहले वह सेना से रिटायर हुए थे। सत्यजीत अपने पिता सज्जन सिंह से काफी प्रभावित थे। वह हमेशा से ही अपने पिता की तरह देश की सेवा करना चाहते थे। यही कारण था कि स्पोर्ट्स में अच्छा करने के बावजूद उन्होंने सेना में जाना चुना।सिरसा का जवान आतंकी हमले में शहीद , 8 साल पहले हुए थे सेना में भर्ती; 2 बेटियों के पिता सिरसा के जवान जीवन सिंह जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हो गए। 2016 में राजपूताना राइफल में भर्ती हुए थे। उनकी शादी 5 साल पहले हुई थी। जवान की 2 बेटियां हैं। जीवन की तैनाती जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में थी।भिंड के तापमान में उछालसवाई माधोपुर में 30 डिग्री पहुंचा तापमानयूपी में आज से सुबह-शाम मौसम होगा गर्म.

हरियाणा में पानीपत के जवान सत्यजीत का अंतिम संस्कार बिना राजकीय सम्मान के कर दिया गया। मतलौडा के पैतृक गांव शेरा में निकाली गई उनकी अंतिम यात्रा में कोई सैन्य अधिकारी शामिल नहीं हुआ, और न ही उन्हें सेना की ओर से सलामी दी गई।हालांकि, अंतिम यात्रा में शामिल होने बाद कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर लिखा- सत्यजीत श्रीनगर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए। सरकार शहीद के परिजनों के साथ है। हर मदद करेंगे।बता दें कि जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में तैनात जवान सत्यजीत की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई थी। उसकी करीब 2 महीने बाद 5 अप्रैल को शादी होनी थी। इसे लेकर घर में तैयारियां चल रहीं थी। वह खुद भी इसकी तैयारियों में जुटे हुए थे। 3 दिन पहले ही वह शादी की शॉपिंग कर ड्यूटी पर लौटे थे। सत्यजीत शूटिंग में नेशनल लेवल के खिलाड़ी थे। उन्होंने गोल्ड मेडल भी जीता था। स्पोर्ट्स कोटे से ही वह आर्मी में भर्ती हुए थे। अभी उनका परिवार मतलौडा में रहता है।मतलौडा में आवास पर पहुंचने के बाद जवान के शव को सेना की एम्बुलेंस से उतारते परिजन।जवान की मौत की सूचना मिलने के बाद उसके घर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं।जवान को श्रद्धांजलि देने पहुंचे कैबिनेट मिनिस्टर कृष्ण लाल पंवार।गांव शेरा के श्मशान में जवान के शव को रख नारेबाजी करते परिजन और लोग।गांव शेरा के श्मशान में जवान का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उसके छोटे भाई ने उसे मुखाग्नि दी।जवान का शव मंगलवार को श्रीनगर से हेलिकॉप्टर के जरिए दिल्ली भेजा गया था। इसके बाद आज दिल्ली से इसे सेना की एम्बुलेंस से घर पहुंचाया गया। यहां कुछ समय के लिए शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके दर्शन के लिए परिजनों के साथ बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इसके बाद दोबारा शव को एम्बुलेंस में रखा गया और श्मशान ले जाया गया। जवान की शवयात्रा में बड़ी संख्या में लोग ट्रैक्टरों, बाइकों, कारों में सवार होकर शामिल हुए। जब शव श्मशान पहुंचा तो लोगों ने जमा होकर जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इसके बाद बिना सेना की सलामी के जवान के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। शव को जवान के छोटे भाई अर्पित ने मुखाग्नि दी।पिता सज्जन सिंह ने बताया है कि सत्यजीत 6 साल पहले स्पोर्ट्स कोटे से सेना की राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। वह 2 साल पहले हवलदार के पद पर पदोन्नत हुए थे। भर्ती होने से पहले उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी कई मेडल जीते थे। उन्हें हाल में ही आर्मी कमांडर पत्र से भी नवाजा गया था। पिता बताते हैं कि 2 महीने बाद सत्यजीत की शादी थी, इसलिए वह शॉपिंग के लिए छुट्टी पर घर आए थे। शादी के वक्त ज्यादा काम बाकी न रहे, इसलिए कपड़े तैयार करवा लिए थे। 9 फरवरी को ही वह छुट्टियां खत्म कर ड्यूटी पर लौटे थे।सज्जन सिंह बताते हैं कि 10 तारीख को उनके पास फोन आया कि सत्यजीत को गोली लगी है। ये सूचना मिलते ही पूरा परिवार चिंतित हो गया। परिवार बेटे के स्वस्थ होने की कामना कर ही रहा था कि 11 फरवरी को दोबारा फोन आया और बताया गया कि सत्यजीत की मौत हो गई है। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। हालांकि, परिवार को यह नहीं पता लगा कि गोली किस तरह लगी है।मोबाइल से खुलेगा जवान सत्यजीत की मौत का राज सत्यजीत की मौत एक हादसा है या आत्महत्या है, इसका राज उसके मोबाइल फोन से खुलेगा। दरअसल, घटनास्थल की एक फोटो सामने आई है। जिस फोटो को देखकर जानकारों ने बताया कि उसकी डेडबॉडी के पास एक मोबाइल रखा है, जोकि सत्यजीत का ही है। संभावना है कि आखिरी बार वह किसी के साथ फोन पर या वीडियो कॉल पर बात कर रहा होगा। अगर जवान ड्यूटी पर होता तो उसके पास मोबाइल नहीं होता और उसके सिर पर हेलमेट जरूर होता। इसके अलावा जिस अवस्था में शव था, उससे यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि जवान ने बैठे हुए घुटने पर AK-47 रखकर माथे पर स्टीक निशाना लगाकर गोली चलाई है। इसके बाद एकदम झटके से वह पीछे की ओर गिरा, जिसके बाद हाथ से AK-47 भी पीछे की ओर गिर गई।सत्यजीत के पिता सज्जन सिंह खुद सेना से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हैं। करीब 8 साल पहले वह सेना से रिटायर हुए थे। सत्यजीत अपने पिता सज्जन सिंह से काफी प्रभावित थे। वह हमेशा से ही अपने पिता की तरह देश की सेवा करना चाहते थे। यही कारण था कि स्पोर्ट्स में अच्छा करने के बावजूद उन्होंने सेना में जाना चुना।सिरसा का जवान आतंकी हमले में शहीद, 8 साल पहले हुए थे सेना में भर्ती; 2 बेटियों के पिता सिरसा के जवान जीवन सिंह जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हो गए। 2016 में राजपूताना राइफल में भर्ती हुए थे। उनकी शादी 5 साल पहले हुई थी। जवान की 2 बेटियां हैं। जीवन की तैनाती जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में थी।भिंड के तापमान में उछालसवाई माधोपुर में 30 डिग्री पहुंचा तापमानयूपी में आज से सुबह-शाम मौसम होगा गर्म

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सेना शहीद पानीपत जम्मू कश्मीर श्रीनगर अंतिम संस्कार गोली मारकर हत्या स्पोर्ट्स आत्महत्या

 

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