मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी टेक कंपनियों को हमले की चेतावनी दी है, साथ ही परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों से स्थिति और गंभीर हो गई है। युद्ध के कारण क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है।
पश्चिम एशिया में एक महीने से चल रही जंग अब आसमान, जमीन और सीधे तकनीक तक पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों के बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने 18 अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर हमले की चेतावनी जारी की है, जिनमें टेस्ला, माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। ईरान ने मध्य पूर्व में इन अमेरिकी कंपनियों के कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि अपनी जान बचाने के लिए इस क्षेत्र को छोड़ दें। आईआरजीसी ने माइक्रोसॉफ्ट और एप्पल के
साथ-साथ गूगल, इंटेल, बोइंग, एस्पायर, आईबीएम, मेटा, एचपी, एनवीडिया जैसी बड़ी टेक कंपनियों को भी चेतावनी दी है। आईआरजीसी का कहना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों के जवाब में इन कंपनियों को वैध लक्ष्य माना जाएगा। आईआरजीसी ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी आईटी और एआई (AI) कंपनियां हत्याओं की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।\आईआरजीसी ने अपनी चेतावनी में यह भी कहा कि ईरान में आतंकवाद के बदले में इन कंपनियों से जुड़े परिसरों पर हमला किया जाएगा। चेतावनी के अनुसार, कर्मचारियों और आसपास के निवासियों को एक किलोमीटर के दायरे से बाहर निकलने की सलाह दी गई है। बताया जा रहा है कि ईरान का यह हमला 1 अप्रैल 2026 को तेहरान के समय अनुसार रात 8 बजे शुरू होने वाला है। आईआरजीसी द्वारा चेतावनी प्राप्त अमेरिकी कंपनियों की सूची में सिस्को, एचपी, इंटेल, ओरेकल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, गूगल, मेटा, आईबीएम, डेल, पलान्टिर, एनवीडिया, जे पी मॉर्गन, टेस्ला, जीई, स्पायर सॉल्यूशंस, जी42 और बोइंग जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। इससे कुछ दिन पहले, ईरान की एक हैकिंग वेबसाइट ने अमेरिकी एफबीआई निदेशक काश पटेल के व्यक्तिगत जीमेल अकाउंट को हैक कर लिया था और उनकी सभी जानकारी सोशल मीडिया पर जारी कर दी थी।\अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच मंगलवार तड़के, अमेरिकी हमले में ईरान के इस्फहान शहर में स्थित एक परमाणु स्थल को निशाना बनाया गया, जबकि तेहरान ने जवाबी कार्रवाई में दुबई तट के पास एक कुवैती तेल टैंकर पर हमला किया। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है। इस्फहान में हुए हमले के बाद आसमान में आग फैली हुई दिखाई दी। यह वही क्षेत्र है जहां पिछले साल जून में भी अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की थी। अमेरिकी कार्रवाई के बावजूद, इस्फहान में ईरान के संवर्धित यूरेनियम के संग्रहीत होने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि संघर्ष विराम के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। इस बीच, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में हमलों को तेज करते हुए दुबई के जलक्षेत्र में एक कुवैती तेल टैंकर को ड्रोन से निशाना बनाया, जिससे उसमें आग लग गई। हालांकि बाद में आग पर काबू पा लिया गया। इस घटना में दुबई में चार लोग घायल भी हुए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान केवल अमेरिकी बलों को निशाना बना रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिकी बलों को क्षेत्र से बाहर किया जाना चाहिए।\वहीं, क्षेत्रीय तनाव के बीच बहरीन में सायरन बजने लगे, जबकि सऊदी अरब ने राजधानी रियाद की ओर दागी गई तीन बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया। ड्रोन के मलबे से छह घरों को मामूली नुकसान पहुंचा। यरुशलम में भी सायरन सुनाई दिए और इजरायल ने ईरान की ओर से मिसाइल हमलों की चेतावनी जारी की। इसके अलावा, लेबनान में जारी सैन्य अभियान के दौरान इजरायल के चार सैनिकों और दो संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की मौत की भी खबर है, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक आपात बैठक बुलाई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है और प्रमुख समुद्री मार्गों पर असर जारी रहता है, तो इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है
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