IIT गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने परमाणु बिजली घरों को विकिरण से सुरक्षित रखने के लिए एक स्वदेशी सीमेंट मोर्टार विकसित किया है। यह मोर्टार अधिक मजबूत, टिकाऊ है और हानिकारक विकिरण को बेहतर ढंग से रोकता है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्वदेशी सीमेंट मोर्टार परमाणु बिजली घरों से होने वाले रेडिएशन से बचाएगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने परमाणु संयंत्रों को विकिरण से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से सीमेंट मोर्टार को अधिक मजबूत, टिकाऊ और हानिकारक विकिरण को बेहतर ढंग से रोकने का तरीका विकसित किया है। अधिकारियों के अनुसार इस पद्धति का मुख्य उद्देश्य मोर्टार के भौतिक गुणों में सुधार करना है ताकि यह मजबूती देने के साथ ही विकिरण को भी रोक सके। मोर्टार की संरचना में बदलाव करके, उन्होंने इसके घनत्व और स्थायित्व को बढ़ाने पर जोर दिया, जिससे विकिरण को सीमित करने में मदद मिल सके। इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित पत्रिका ''मटेरियल्स एंड स्ट्रक्चर्स'' में प्रकाशित हुए हैं। कंक्रीट विकिरण रिसाव के जोखिम को कम करने में सक्षम IIT गुवाहाटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर हृषिकेश शर्मा के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया कि इस उन्नत मोर्टार का उपयोग करके बनाया गया कंक्रीट विकिरण रिसाव के जोखिम को कम करने में सक्षम है। इससे उन क्षेत्रों में अधिक विश्वसनीय सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने में मदद मिल सकती है जहां विकिरण को सख्ती से नियंत्रित करने की जरूरी है। इससे परमाणु बिजलीघरों की दीर्घकालिक सुरक्षा में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, इस शोध के माध्यम से हमने यह प्रदर्शित किया है कि सावधानीपूर्वक निर्मित सूक्ष्म कण-संशोधित सीमेंट मोर्टार की मजबूती और विकिरण- रोकने की क्षमता दोनों को बढ़ा सकता है। 1986 में चेर्नोबिल आपदा और 2011 में फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना जैसी परमाणु आपदाओं के मद्देनजर परमाणु ऊर्जा प्रणालियों में विकिरण से सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह किसी विद्युत संयंत्र के निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों की मजबूती पर निर्भर करता है। विकिरण रिसाव को रोकने के लिए डिजाइन परमाणु अवरोधक संरचनाएं सुरक्षात्मक अवरोध के रूप में कार्य करती हैं, जिन्हें भूकंप, विस्फोट या तापमान में तीव्र परिवर्तन जैसी घटनाओं के दौरान विकिरण रिसाव को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा, जिस तरह से दुनिया बिजली की बढ़ती मांग और जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा के विस्तार की ओर बढ़ रही है, परमाणु बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हैं। हम विकसित सीमेंट मोर्टार की शक्ति, कार्यक्षमता, स्थायित्व और विकिरण रोकने की क्षमता के बीच संतुलन प्राप्त करने के लिए सूक्ष्म कणों की मात्रा को अनुकूलित करने पर काम कर रहे हैं। इस तकनीक को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के लिए हम परमाणु ऊर्जा एजेंसियों, निर्माण सामग्री निर्माताओं और परमाणु केंद्र बनाने में शामिल कंपनियों के साथ सहयोग करना चाहते हैं।.
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्वदेशी सीमेंट मोर्टार परमाणु बिजली घरों से होने वाले रेडिएशन से बचाएगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी के शोधकर्ताओं ने परमाणु संयंत्रों को विकिरण से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से सीमेंट मोर्टार को अधिक मजबूत, टिकाऊ और हानिकारक विकिरण को बेहतर ढंग से रोकने का तरीका विकसित किया है। अधिकारियों के अनुसार इस पद्धति का मुख्य उद्देश्य मोर्टार के भौतिक गुणों में सुधार करना है ताकि यह मजबूती देने के साथ ही विकिरण को भी रोक सके। मोर्टार की संरचना में बदलाव करके, उन्होंने इसके घनत्व और स्थायित्व को बढ़ाने पर जोर दिया, जिससे विकिरण को सीमित करने में मदद मिल सके। इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित पत्रिका ''मटेरियल्स एंड स्ट्रक्चर्स'' में प्रकाशित हुए हैं। कंक्रीट विकिरण रिसाव के जोखिम को कम करने में सक्षम IIT गुवाहाटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर हृषिकेश शर्मा के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया कि इस उन्नत मोर्टार का उपयोग करके बनाया गया कंक्रीट विकिरण रिसाव के जोखिम को कम करने में सक्षम है। इससे उन क्षेत्रों में अधिक विश्वसनीय सुरक्षात्मक संरचनाएं बनाने में मदद मिल सकती है जहां विकिरण को सख्ती से नियंत्रित करने की जरूरी है। इससे परमाणु बिजलीघरों की दीर्घकालिक सुरक्षा में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, इस शोध के माध्यम से हमने यह प्रदर्शित किया है कि सावधानीपूर्वक निर्मित सूक्ष्म कण-संशोधित सीमेंट मोर्टार की मजबूती और विकिरण- रोकने की क्षमता दोनों को बढ़ा सकता है। 1986 में चेर्नोबिल आपदा और 2011 में फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना जैसी परमाणु आपदाओं के मद्देनजर परमाणु ऊर्जा प्रणालियों में विकिरण से सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह किसी विद्युत संयंत्र के निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों की मजबूती पर निर्भर करता है। विकिरण रिसाव को रोकने के लिए डिजाइन परमाणु अवरोधक संरचनाएं सुरक्षात्मक अवरोध के रूप में कार्य करती हैं, जिन्हें भूकंप, विस्फोट या तापमान में तीव्र परिवर्तन जैसी घटनाओं के दौरान विकिरण रिसाव को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा, जिस तरह से दुनिया बिजली की बढ़ती मांग और जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा के विस्तार की ओर बढ़ रही है, परमाणु बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हैं। हम विकसित सीमेंट मोर्टार की शक्ति, कार्यक्षमता, स्थायित्व और विकिरण रोकने की क्षमता के बीच संतुलन प्राप्त करने के लिए सूक्ष्म कणों की मात्रा को अनुकूलित करने पर काम कर रहे हैं। इस तकनीक को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के लिए हम परमाणु ऊर्जा एजेंसियों, निर्माण सामग्री निर्माताओं और परमाणु केंद्र बनाने में शामिल कंपनियों के साथ सहयोग करना चाहते हैं।
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