पटना में 10 सर्कुलर रोड और 39 हार्डिंग रोड के बंगले को लेकर जारी विवाद राजनीतिक रंग ले रहा है। यह मामला प्रतिष्ठा का विषय बन गया है, जिसमें सरकार पर अन्यायपूर्ण रवैया अपनाने और लालू प्रसाद यादव का सम्मान न करने का आरोप लग रहा है। वहीं, सरकार न्यायालय के फैसले का सम्मान करने की बात कह रही है। लेख में दोनों बंगलों की सुविधाओं और बनावट की तुलना की गई है।
पटना ः 10 सर्कुलर रोड बनाम 39 हार्डिंग रोड बंगला विवाद आकार का नहीं बल्कि एक प्रेस्टीज इशू की लड़ाई बन गई है। और इस लड़ाई को राजनीति क रंग देने की भी कोशिश की जा रही है। इस कोशिश की जड़ में यह साबित करना है कि यह सरकार निर्दयी है। अन्याय की राह पर है। इस सरकार को सामाजिक न्याय के मसीहा लालू प्रसाद यादव को लेकर कोई सम्मान का भाव भी नहीं है। और न ही विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष की गरिमा का ख्याल है। दूसरी तरफ वर्तमान सरकार इस बात पर फोकस कर रही है कि वो न्यायालय के निर्णय का सम्मान कर रही है। और इस फैसले के जिम्मेदार भी तेजस्वी यादव ही हैं। चलिए जानते है कि 10 सर्कुलर रोड और 39 स्ट्रैंड रोड की समानता-असमानता है।कैसा है 10 सर्कुलर रोड ?सरकारी फाइलों से निकल कर कोई जानकारी तो नहीं पर वहां जाते आते रहे ठेकेदार बताते हैं कि 10 सर्कुलर रोड तकरीबन एक एकड़ जमीन की घेराबंदी के भीतर बनी हुई है। इस आवास में कुल सात कमरे हैं। ऊपर में चार और नीचे में तीन कमरे हैं। इस मूल कंस्ट्रक्शन के अलावा पिछले कुछ वर्षों में कई स्ट्रक्चर खड़े किए गए है। इसमें मीटिंग हॉल। कांफ्रेंस हॉल बनाए गए। मीडिया वार रूम भी बनाया गया। इंटरेक्शन मीटिंग के लिए हॉल भी बनाया गया। साथ इसके छोटे-छोटे कंस्ट्रक्शन। साथ ही छोटी-छोटी या फिर वन टू वन बात करने के लिए हॉल हैं। इसके अलावा खाली जगह के एक हिस्से में किचन गार्डन और मॉर्निंग वॉक के लिए पार्क भी है। 39 हार्डिंग रोड कुछ कम बड़ा नहीं 39 हार्डिंग रोड भी कुछ कम बड़ा नहीं। इससे बड़ा बंगला तो एक ही है। और वो है 40 स्ट्रैंड रोड। 39 स्ट्रैंड रोड आवास की बात करें तो यह भी बड़ा कैंपस वाला बंगला है। बड़े लॉन हैं, बड़े बगीचे हैं। ये गार्डन खास लाइट से सुसज्जित है। इसके अलावा भीं यह बंगला कई सुविधाओं से लैस है। नेता विरोधी दल के लिए चिह्नित सरकारी इस आवास में रूम की संख्या छह हैं। हर कारण बेडरूम की सारी सुविधाओं से लैस है। इसके अलावा एक बड़ा सा ड्रॉइंग रूम, डाइनिंग रूम और एक बड़ा सा हॉल भी है। भवन के अंदर प्रवेश द्वार के पास ही एक मेहमान खाना भी है। इस बंगले का इंटीरियर काफी मॉडर्न है। कुछ साल पहले ही इंटीरियर डेकोरेशन को रेनोवेट किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से कैंपस सीसीटीवी कैमरे से लैस है। इसके अलावा अन्य स्टाफ और सुरक्षा गार्ड के लिए अलग से कमरे बने हैं। मुख्य प्रवेश द्वार के पास भी गार्ड रूम बनाया गया है जहां 24 घंटे अलग अलग शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।मुश्किलें कहां हैं?मुश्किल आकार प्रकार को हो ऐसा लगता नहीं। मुश्किल यह है कि वर्षों वर्ष इस भवन में रहने के कारण यहां के हर स्ट्रक्चर से ये वाकिफ हैं। अपनी सुविधा के हिसाब ने आवास के अंदर कुछ स्ट्रक्चर खड़ा किए गए होंगे। किसी भी बैठक के प्रति सबकुछ सेट होगा कि किस कमरे में कौन बैठक करनी होगी। ये एक मनोवैज्ञानिक मसला है कि सामान्य आदमी भी घर से विस्थापित होता है तो नए मकान में एडजस्ट करने में समय लगता है। और यहां तो एक पूरी राजनीति क व्यवस्था को ही शिफ्ट करना है। राजनीति क लड़ाई के लिए स्थापित वार रूम को भी शिफ्ट करना होगा। एक तरह से अपने पूरे लाइफ स्टाइल को शिफ्ट करना होगा। और यह इतना आसान भी नहीं। अब देखना है कि रास्ता राजनीति क लड़ाई से निकलती है या फिर सरकार के बदले नियम से।.
पटनाः 10 सर्कुलर रोड बनाम 39 हार्डिंग रोड बंगला विवाद आकार का नहीं बल्कि एक प्रेस्टीज इशू की लड़ाई बन गई है। और इस लड़ाई को राजनीतिक रंग देने की भी कोशिश की जा रही है। इस कोशिश की जड़ में यह साबित करना है कि यह सरकार निर्दयी है। अन्याय की राह पर है। इस सरकार को सामाजिक न्याय के मसीहा लालू प्रसाद यादव को लेकर कोई सम्मान का भाव भी नहीं है। और न ही विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष की गरिमा का ख्याल है। दूसरी तरफ वर्तमान सरकार इस बात पर फोकस कर रही है कि वो न्यायालय के निर्णय का सम्मान कर रही है। और इस फैसले के जिम्मेदार भी तेजस्वी यादव ही हैं। चलिए जानते है कि 10 सर्कुलर रोड और 39 स्ट्रैंड रोड की समानता-असमानता है।कैसा है 10 सर्कुलर रोड?सरकारी फाइलों से निकल कर कोई जानकारी तो नहीं पर वहां जाते आते रहे ठेकेदार बताते हैं कि 10 सर्कुलर रोड तकरीबन एक एकड़ जमीन की घेराबंदी के भीतर बनी हुई है। इस आवास में कुल सात कमरे हैं। ऊपर में चार और नीचे में तीन कमरे हैं। इस मूल कंस्ट्रक्शन के अलावा पिछले कुछ वर्षों में कई स्ट्रक्चर खड़े किए गए है। इसमें मीटिंग हॉल। कांफ्रेंस हॉल बनाए गए। मीडिया वार रूम भी बनाया गया। इंटरेक्शन मीटिंग के लिए हॉल भी बनाया गया। साथ इसके छोटे-छोटे कंस्ट्रक्शन। साथ ही छोटी-छोटी या फिर वन टू वन बात करने के लिए हॉल हैं। इसके अलावा खाली जगह के एक हिस्से में किचन गार्डन और मॉर्निंग वॉक के लिए पार्क भी है।39 हार्डिंग रोड कुछ कम बड़ा नहीं39 हार्डिंग रोड भी कुछ कम बड़ा नहीं। इससे बड़ा बंगला तो एक ही है। और वो है 40 स्ट्रैंड रोड। 39 स्ट्रैंड रोड आवास की बात करें तो यह भी बड़ा कैंपस वाला बंगला है। बड़े लॉन हैं, बड़े बगीचे हैं। ये गार्डन खास लाइट से सुसज्जित है। इसके अलावा भीं यह बंगला कई सुविधाओं से लैस है। नेता विरोधी दल के लिए चिह्नित सरकारी इस आवास में रूम की संख्या छह हैं। हर कारण बेडरूम की सारी सुविधाओं से लैस है। इसके अलावा एक बड़ा सा ड्रॉइंग रूम, डाइनिंग रूम और एक बड़ा सा हॉल भी है। भवन के अंदर प्रवेश द्वार के पास ही एक मेहमान खाना भी है। इस बंगले का इंटीरियर काफी मॉडर्न है। कुछ साल पहले ही इंटीरियर डेकोरेशन को रेनोवेट किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से कैंपस सीसीटीवी कैमरे से लैस है। इसके अलावा अन्य स्टाफ और सुरक्षा गार्ड के लिए अलग से कमरे बने हैं। मुख्य प्रवेश द्वार के पास भी गार्ड रूम बनाया गया है जहां 24 घंटे अलग अलग शिफ्ट में सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।मुश्किलें कहां हैं?मुश्किल आकार प्रकार को हो ऐसा लगता नहीं। मुश्किल यह है कि वर्षों वर्ष इस भवन में रहने के कारण यहां के हर स्ट्रक्चर से ये वाकिफ हैं। अपनी सुविधा के हिसाब ने आवास के अंदर कुछ स्ट्रक्चर खड़ा किए गए होंगे। किसी भी बैठक के प्रति सबकुछ सेट होगा कि किस कमरे में कौन बैठक करनी होगी। ये एक मनोवैज्ञानिक मसला है कि सामान्य आदमी भी घर से विस्थापित होता है तो नए मकान में एडजस्ट करने में समय लगता है। और यहां तो एक पूरी राजनीतिक व्यवस्था को ही शिफ्ट करना है। राजनीतिक लड़ाई के लिए स्थापित वार रूम को भी शिफ्ट करना होगा। एक तरह से अपने पूरे लाइफ स्टाइल को शिफ्ट करना होगा। और यह इतना आसान भी नहीं। अब देखना है कि रास्ता राजनीतिक लड़ाई से निकलती है या फिर सरकार के बदले नियम से।
पटना बंगला विवाद 10 सर्कुलर रोड 39 हार्डिंग रोड लालू प्रसाद यादव
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