न करें ऐसे चुनावी पोस्ट वरना फेसबुक-ट्विटर लेंगे ऐसे एक्शन– News18 हिंदी

United States News News

न करें ऐसे चुनावी पोस्ट वरना फेसबुक-ट्विटर लेंगे ऐसे एक्शन– News18 हिंदी
United States Latest News,United States Headlines
  • 📰 News18 India
  • ⏱ Reading Time:
  • 192 sec. here
  • 5 min. at publisher
  • 📊 Quality Score:
  • News: 80%
  • Publisher: 51%

चुनाव से जुड़े पोस्ट करने से पहले एक बार ठीक से सोच लें...

इस साल जनवरी में उप मुख्य चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग के 14 प्रतिनिधियों की टीम ने रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट के सेक्शन 126 में बदलाव के सुझाव दिए थे. इस सेक्शन में वोटिंग के दो दिन पहले से चुनाव प्रचार की मनाही की गई है.

इस टीम ने 'प्रचार थम जाने के बाद' सोशल मीडिया और न्यू मीडिया के प्रभाव का अध्ययन किया था और आचार संहिता में इसके अनुसार बदलाव के सुझाव दिए थे. वैसे अभी तक सोशल मीडिया और न्यू मीडिया सेक्शन 126 के अंतर्गत नहीं आते हैं. दो हफ्ते पहले, द इंटरनेट एंड मोबाइल एसोशिएसन ऑफ इंडिया , जो फेसबुक, ट्विटर, गूगल, वॉट्सऐप और शेयरचैट का भारत में प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है, वह इस मामले में निर्वाचन आयोग के सदस्यों के साथ बातचीत कर रही है. ये मिलकर एक कोड ऑफ एथिक्स बनाने का प्रयास कर रहे हैं. साथ ही यह निर्वाचन आयोग की शिकायतों को अपने समस्या समाधान के सिस्टम में तवज्जो देने के लिए राजी हो गए हैं. साथ ही ये चुनावों से जुड़े शैक्षणिक प्रोग्राम भी चलाएंगे. 9 मार्च को चुनाव आयोग ने कहा था कि पार्टियां और उम्मीदवार सैनिकों की तस्वीरों का चुनावी प्रचार के लिए प्रयोग नहीं करेंगे. जिसके बाद फेसबुक ने ऐसे सारे चुनावी पोस्टरों को हटाने का आदेश दिया था जिस पर विंग कमांडर अभिनंदन की तस्वीर बनी थी और उसे बीजेपी नेताओं ने शेयर किया था. शुक्रवार को निर्वाचन आयोग ने फेसबुक, वॉट्सऐप, ट्विटर, गूगल, शेयरचैट और टिक-टॉक को मंगलवार की मीटिंग के लिए आमंत्रित किया था. इसके जरिए निर्वाचन आयोग शिकायतों पर चर्चा करने के लिए एक प्रक्रिया बनाना चाहता है. इसके अलावा चुनाव आयोग का मकसद सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल को रोकना है. चुनाव आयोग इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ एक नोटिफिकेशन मैकेनिज्म भी बनाना चाहता है ताकि चुनाव आयोग प्रचार थम जाने के तुरंत बाद चुनावों के बारे में जागरुकता फैला सके और आचार संहिता के मामलों पर गौर कर सके.निर्वाचन आयोग ने हर राजनीतिक विज्ञापन इन प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए जाने से पहले, मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी से अनुमति लेने की बात कही थी. हालांकि IAMAI ने इसके लिए मना कर दिया था. उसका कहना था कि यह जिम्मेदारी प्रचारकर्ता की होनी चाहिए न कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की. IAMAI ने इस बाबत 2004 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया था, जिसमें कहा गया था कि पार्टियों और उम्मीदवारों को टीवी पर चुनाव प्रचार करने से पहले उसे चुनाव आयोग को दिखाना जरूरी है. और ऐसा करने के लिए उन्हें अपने लीगल सेफ हार्बल के नियमों को भी त्यागना होगा जिसके जरिए जब तक इन प्लेटफॉर्म्स के ध्यान में न लाया गया हो, वे खुद पर उपलब्ध कंटेंट के लिए जिम्मेदार नहीं होतीं. अपनी रिपोर्ट में IAMAI ने कहा था कि चुनावों के पहले 48 घंटे के वक्त में चुनाव प्रचार से संबंधित सामग्री को निर्वाचन आयोग की शिकायत के बाद 3 घंटों के अंदर हटाना होगा. और अगर तय समय में ऐसा नहीं होता तो उन्हें इसका जवाब देना होगा. 'राजनीतिक प्रचारक' किसे माना जाए. इस मसले पर भी बात हो सकती है. IAMAI के निर्वाचन आयोग को दिए जवाब में यह मसला भी नहीं सुलझा है कि 'राजनीतिक प्रचारक' किसे माना जाएगा? क्या उसे भी एक राजनीतिक प्रचारक माना जाएगा जो दूसरे के पोस्ट को बूस्ट या प्रमोट यानि शेयर करेगा? निर्वाचन आयोग को इन कंपनियों से भी साझा करनी होगी कानूनी समस्या. पिछले हफ्ते जब निर्वाचन आयोग ने फेसबुक से कुछ कंटेट हटाने को कहा था तो फेसबुक ने जवाब दिया था कि जरूरी कानूनी जानकारियां आयोग की तरफ से उसे नहीं दी गई हैं कि इस कंटेंट में क्या कानूनी समस्या है?2013 में निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया के बारे में बात करना शुरू किया था. लेकिन तबसे सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों की संख्या में बहुत बढ़ोत्तरी हो चुकी है. IAMAI के अनुसार भारत में इंटरनेट प्रयोग करने वालों की संख्या पिछली बार के मुकाबले बिल्कुल दोगुनी होकर भारत में अब करीब 50 करोड़ लोगों तक पहुंच चुकी है. राजनीतिक दलों ने भी ऑनलाइन प्रचार में बहुत बढ़ोत्तरी कर दी है. फेसबुक एडवरटीजमेंट पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार यहां पर राजनीतिक प्रचार के लिए दलों ने 24 फरवरी और 9 मार्च के बीच करीब 10 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही इस दौरान अपने सोशल मीडिया वालंटियर और एकाउंट्स में बहुत बढ़ोत्तरी कर ली है. इसके अलावा फेसबुक के मामले में कैम्ब्रिज एनलिटिका जैसी कंपनियों ने चुनावी प्रचार में सोशल मीडिया की भूमिका को और संदिग्ध बना दिया है. ऐसे में सोशल मीडिया के प्रतिनिधियों को जब अमेरिकी और यूरोपीय सरकारें पूछताछ के लिए बुला चुकी हैं, भारत सरकार भी इन कंपनियों से सवाल पूछना शुरू कर चुकी है. इसी साल की शुरुआत में ट्विटर भी दक्षिणपंथ विरोधी गतिविधियों के आरोपों का निशाना बन चुका है.

We have summarized this news so that you can read it quickly. If you are interested in the news, you can read the full text here. Read more:

News18 India /  🏆 21. in İN

 

United States Latest News, United States Headlines

Similar News:You can also read news stories similar to this one that we have collected from other news sources.

कांग्रेस की चुप्पी से केजरीवाल के बाद शिवपाल भी बेहाल, ऐसे बयां किया दर्दकांग्रेस की चुप्पी से केजरीवाल के बाद शिवपाल भी बेहाल, ऐसे बयां किया दर्दशिवपाल यादव ने बयान जारी कर अपनी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि हमने कांग्रेस का एक महीने तक इंतजार किया. कांग्रेस के नेता रोज मीटिंग करते रहे, लेकिन बीच में सूची जारी कर दी. कांग्रेसी नेता भी झूठे लोग हैं.
Read more »

सहवाग के एड से ऐसे तिलमिलाए कंगारू कि जीत ली टी-20 और वनडे सीरीजसहवाग के एड से ऐसे तिलमिलाए कंगारू कि जीत ली टी-20 और वनडे सीरीजअगर आप किसी का मजाक उड़ाए तो सामने वाला आपको हराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता ।कुछ ऐसा ही हुआ ऑस्ट्रेलिया के भारत दौरे पर INDvsAUS BCCI
Read more »

गोलीबारी से पहले हमलावर ने पोस्ट किया था नफरत से भरा 74 पेजों का नोटगोलीबारी से पहले हमलावर ने पोस्ट किया था नफरत से भरा 74 पेजों का नोटNew Zealand gunman published 74-page hate manifesto | हमलावर ने हमले का फेसबुक पर लाइव प्रसारण भी किया एक महीने पहले ही बनाया गया था संदिग्ध ट्विटर अकाउंट
Read more »

नरेंद्र मोदी के ऑफिशियल अकाउंट से हुए ऐसे ट्वीट कि करने पड़े डिलीट,हुए ट्रोलनरेंद्र मोदी के ऑफिशियल अकाउंट से हुए ऐसे ट्वीट कि करने पड़े डिलीट,हुए ट्रोलप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैं भी चौकीदार कैंपने शुरू कर एक बार फिर से खुद को चौकीदार बताया। शनिवार को ट्विटर परMainBhiChowkidar का हैश टैग ट्रेंड कर रहा था।
Read more »

RSS के ‘मुख्य शिक्षक’ से ऐसे BJP के संकट मोचक बने मनोहर पर्रिकरRSS के ‘मुख्य शिक्षक’ से ऐसे BJP के संकट मोचक बने मनोहर पर्रिकरफरवरी, 2018 के बाद से उनकी तबियत खराब रहने लगी. उन्हें तब अग्नाशय संबंधी बीमारी के उपचार के लिए मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया. वह मार्च के पहले सप्ताह में इलाज के लिए अमेरिका गए जहां वह जून तक अस्पताल में रहे.
Read more »

गोवा BJP चीफ बोले- अगले मुख्यमंत्री को लेकर दोपहर दो बजे तक फैसला, तीन बजे के बाद शपथग्रहण समारोहगोवा BJP चीफ बोले- अगले मुख्यमंत्री को लेकर दोपहर दो बजे तक फैसला, तीन बजे के बाद शपथग्रहण समारोहगोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर (Manohar Parrikar) के निधन के बाद से राज्य से भाजपा अपने सहयोगी दलों से बातचीत में लगी हुई हैं. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस (Congress पिछले 48 घंटे में सरकार बनाने के लिए दो बार दावा पेश कर चुकी है. केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन गडकरी ने नए मुख्यमंत्री का चयन करने के लिए सोमवार को पार्टी के नेताओं और गठबंधन के सहयोगी दल महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के साथ बातचीत की.
Read more »

सीमावर्ती देशों के सुरक्षाबल बीएसएफ से सीख रहे हैं जोखिम से निपटने के तरीकेसीमावर्ती देशों के सुरक्षाबल बीएसएफ से सीख रहे हैं जोखिम से निपटने के तरीकेम्यांमार पुलिस और बांग्‍लादेश बार्डर गार्ड को बीएसएफ दे चुकी है आपात परिस्थितियों में जोखिम से निपटने का प्रशिक्षण.
Read more »



Render Time: 2026-04-02 00:42:42