Tu-160 की टॉप स्पीड 2220 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह विमान 110,000 किलोग्राम के कुल वजन के साथ उड़ान भरने में सक्षम है। इसके पंखों का फैलाव 56 मीटर है। इसकी पहली उड़ान 16 दिसंबर 1981 में आयोजित की गई थी। यह लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के साथ परमाणु बम भी दागने में माहिर...
मॉस्को: भारत अपनी सैन्य शक्ति में इजाफा करने के लिए रूस से टीयू-160 ब्लैक जैक बमवर्षक विमान को खरीदने पर विचार कर रहा है। इसे व्हाइट स्वान के नाम से भी जाना जाता है। यह विमान रूसी न्यूक्लियर ट्रायड का हिस्सा है। यह विमान इतना शक्तिशाली है कि एक उड़ान में पूरी दुनिया का चक्कर लगा सकता है। इसी इसी रेंज और दुश्मन पर भारी बमों के साथ भीषण हमला करने की क्षमता इसे दूसरे देशों के बमवर्षक विमानों से अलग बनाती है। यह बॉम्बर इतना खतरनाक है कि इसकी उड़ान पर अमेरिका खासतौर पर सैटेलाइटों की मदद से नजर रखता है। टीयू-160 तकनीकी रूप से इतना अडवांस है कि रूस ने सिर्फ भारत को ही इसे खरीदने का ऑफर दिया है।टीयू-160 की खासियतें जानेंटुपोलेव टीयू-160 बमवर्षक की टॉप स्पीड 2220 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह विमान 110000 किलोग्राम के कुल वजन के साथ उड़ान भरने में सक्षम है, जिसमें बम भी शामिल हैं। इसके पंखों का फैलाव 56 मीटर है। टीयू-160 की पहली उड़ान 16 दिसंबर 1981 में आयोजित की गई थी। रूसी सेना में इस समय 17 टीयू-160 स्ट्रैटजिक बॉम्बर मौजूद हैं, जिन्हें लगातार अपग्रेड किया जा रहा है। रूस ने टीयू-160 को दोबारा क्यों तैनात कियारूस ने साल 1995 में टीयू-160 बमवर्षक को एक्टिव ड्यूटी से हटा दिया था। उस समय कारण बताया गया था कि इस बमवर्षक की परिचालन लागत काफी ज्यादा है, जिसे रूस विघटन के बाद के हालात के कारण वहन नहीं कर सकता है। हालांकि, 2015 में रूसी स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स की घटती फ्लीट को देखते हुए टीयू-160 को अपग्रेड कर दोबारा सर्विस में शामिल कर लिया गया। भारत कब से ले रहा टीयू-160 में दिलचस्पी2022 में तत्कालीन वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल अनूप राहा ने चाणक्या फाउंडेशन के आयोजित कार्यक्रम चाणक्या डॉयलाग्स में भारत के स्ट्रैटजिक बॉम्बर खरीद की ओर इशारा किया था। डिफेंस एनॉलिस्ट भरत कर्नाड के सवाल के जवाब में अनूप राहा ने कहा कि भारत रूस के टीयू-160 बॉम्बर में दिलचस्पी ले रहा है। इसी के बाद भारत के टीयू-160 को खरीदने की अटकलें लगाई जाने लगीं थी। भारत को क्यों है बमवर्षक की जरूरतभारत लंबे समय से बमवर्षक विमान की तलाश कर रहा है, इसका प्रमुख कारण एक साथ दो मोर्चों पर तनातनी है। भारत का चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद है और ये दोनों देश आपस में मित्र हैं। ऐसे में भारत एक ऐसा बमवर्षक ढूंढ रहा है, जो एक ही उड़ान में लंबी दूरी तक पहुंचकर बम गिरा सके और उसकी मेंटीनेंस और ऑपरेटिंग कॉस्ट भी कम हो। रूसी टीयू-160 इन सभी पैमानों पर खरा उतरता है।.
मॉस्को: भारत अपनी सैन्य शक्ति में इजाफा करने के लिए रूस से टीयू-160 ब्लैक जैक बमवर्षक विमान को खरीदने पर विचार कर रहा है। इसे व्हाइट स्वान के नाम से भी जाना जाता है। यह विमान रूसी न्यूक्लियर ट्रायड का हिस्सा है। यह विमान इतना शक्तिशाली है कि एक उड़ान में पूरी दुनिया का चक्कर लगा सकता है। इसी इसी रेंज और दुश्मन पर भारी बमों के साथ भीषण हमला करने की क्षमता इसे दूसरे देशों के बमवर्षक विमानों से अलग बनाती है। यह बॉम्बर इतना खतरनाक है कि इसकी उड़ान पर अमेरिका खासतौर पर सैटेलाइटों की मदद से नजर रखता है। टीयू-160 तकनीकी रूप से इतना अडवांस है कि रूस ने सिर्फ भारत को ही इसे खरीदने का ऑफर दिया है।टीयू-160 की खासियतें जानेंटुपोलेव टीयू-160 बमवर्षक की टॉप स्पीड 2220 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह विमान 110000 किलोग्राम के कुल वजन के साथ उड़ान भरने में सक्षम है, जिसमें बम भी शामिल हैं। इसके पंखों का फैलाव 56 मीटर है। टीयू-160 की पहली उड़ान 16 दिसंबर 1981 में आयोजित की गई थी। रूसी सेना में इस समय 17 टीयू-160 स्ट्रैटजिक बॉम्बर मौजूद हैं, जिन्हें लगातार अपग्रेड किया जा रहा है। रूस ने टीयू-160 को दोबारा क्यों तैनात कियारूस ने साल 1995 में टीयू-160 बमवर्षक को एक्टिव ड्यूटी से हटा दिया था। उस समय कारण बताया गया था कि इस बमवर्षक की परिचालन लागत काफी ज्यादा है, जिसे रूस विघटन के बाद के हालात के कारण वहन नहीं कर सकता है। हालांकि, 2015 में रूसी स्ट्रैटजिक बॉम्बर्स की घटती फ्लीट को देखते हुए टीयू-160 को अपग्रेड कर दोबारा सर्विस में शामिल कर लिया गया। भारत कब से ले रहा टीयू-160 में दिलचस्पी2022 में तत्कालीन वायु सेना प्रमुख एयर मार्शल अनूप राहा ने चाणक्या फाउंडेशन के आयोजित कार्यक्रम चाणक्या डॉयलाग्स में भारत के स्ट्रैटजिक बॉम्बर खरीद की ओर इशारा किया था। डिफेंस एनॉलिस्ट भरत कर्नाड के सवाल के जवाब में अनूप राहा ने कहा कि भारत रूस के टीयू-160 बॉम्बर में दिलचस्पी ले रहा है। इसी के बाद भारत के टीयू-160 को खरीदने की अटकलें लगाई जाने लगीं थी। भारत को क्यों है बमवर्षक की जरूरतभारत लंबे समय से बमवर्षक विमान की तलाश कर रहा है, इसका प्रमुख कारण एक साथ दो मोर्चों पर तनातनी है। भारत का चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद है और ये दोनों देश आपस में मित्र हैं। ऐसे में भारत एक ऐसा बमवर्षक ढूंढ रहा है, जो एक ही उड़ान में लंबी दूरी तक पहुंचकर बम गिरा सके और उसकी मेंटीनेंस और ऑपरेटिंग कॉस्ट भी कम हो। रूसी टीयू-160 इन सभी पैमानों पर खरा उतरता है।
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