इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल, बोर्ड या नगर निगम के प्रमाणपत्र उपलब्ध होने पर नाबालिग की उम्र तय करने के लिए मेडिकल परीक्षण कराना कानून के विरुद्ध है।
विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम आदेश में कहा है कि जब स्कूल, बोर्ड, नगर निगम, म्यूनिसिपलिटी अथवा पंचायत के प्रमाणपत्र उपलब्ध हों तब किसी नाबालिग की उम्र निर्धारण के लिए मेडिकल परीक्षण कराना कानून के विरुद्ध है। यह कहते हुए कोर्ट ने इस मामले में किशोर न्याय बोर्ड और विशेष पाक्सो अदालत के आदेशों को निरस्त करते हुए नाबालिग को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। यह आदेश जस्टिस मनीश कुमार की पीठ ने एक नाबालिग की ओर से दाखिल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। मामला प्रतापगढ़ जिले का है जहां 11 मार्च, 2025 को लीलापुर थाने में दर्ज एफआइआर में एक नाबालिग पर पाक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि उसने 15 वर्षीय किशोरी के साथ छेड़छाड़ की और उसे धमकी दी। याचिका में नाबालिग याची की ओर से दलील दी गई कि घटना के समय उसकी उम्र 16 वर्ष से कम थी। हाईस्कूल प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 1 जनवरी, 2010 दर्ज है जबकि प्राथमिक विद्यालय के अभिलेख में 13 मई, 2009 अंकित है। इसके बावजूद किशोर न्याय बोर्ड ने उम्र तय करने के लिए मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दे दिया जिसे विशेष जज पाक्सो एक्ट की अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा। यह भी पढ़ें- मुरादाबाद के पशु तस्कर बाप-बेटे पर गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा, गोरखपुर समेत कई जिलों में दर्ज है FIR इन्हीं दोनों आदेशों को हाई कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल करके चुनौती दी गई थी। नगर निगम, म्यूनिसिपलिटी अथवा पंचायत से जारी जन्म प्रमाणपत्र भी अहमः रिवीजन याचिका मंजूर करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 94 के अनुसार उम्र निर्धारण के लिए सबसे पहले स्कूल या बोर्ड के प्रमाणपत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उसके बाद नगर निगम, म्यूनिसिपलिटी अथवा पंचायत के द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र को देखना चाहिए। केवल इन दस्तावेज के अभाव में ही मेडिकल परीक्षण कराया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि दोनों उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार भी आरोपित याची नाबालिग ही है। ऐसे में मेडिकल परीक्षण का आदेश देना कानून के विपरीत था।.
विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक अहम आदेश में कहा है कि जब स्कूल, बोर्ड, नगर निगम, म्यूनिसिपलिटी अथवा पंचायत के प्रमाणपत्र उपलब्ध हों तब किसी नाबालिग की उम्र निर्धारण के लिए मेडिकल परीक्षण कराना कानून के विरुद्ध है। यह कहते हुए कोर्ट ने इस मामले में किशोर न्याय बोर्ड और विशेष पाक्सो अदालत के आदेशों को निरस्त करते हुए नाबालिग को जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। यह आदेश जस्टिस मनीश कुमार की पीठ ने एक नाबालिग की ओर से दाखिल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। मामला प्रतापगढ़ जिले का है जहां 11 मार्च, 2025 को लीलापुर थाने में दर्ज एफआइआर में एक नाबालिग पर पाक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि उसने 15 वर्षीय किशोरी के साथ छेड़छाड़ की और उसे धमकी दी। याचिका में नाबालिग याची की ओर से दलील दी गई कि घटना के समय उसकी उम्र 16 वर्ष से कम थी। हाईस्कूल प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 1 जनवरी, 2010 दर्ज है जबकि प्राथमिक विद्यालय के अभिलेख में 13 मई, 2009 अंकित है। इसके बावजूद किशोर न्याय बोर्ड ने उम्र तय करने के लिए मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दे दिया जिसे विशेष जज पाक्सो एक्ट की अपीलीय अदालत ने भी बरकरार रखा। यह भी पढ़ें- मुरादाबाद के पशु तस्कर बाप-बेटे पर गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा, गोरखपुर समेत कई जिलों में दर्ज है FIR इन्हीं दोनों आदेशों को हाई कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल करके चुनौती दी गई थी। नगर निगम, म्यूनिसिपलिटी अथवा पंचायत से जारी जन्म प्रमाणपत्र भी अहमः रिवीजन याचिका मंजूर करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 94 के अनुसार उम्र निर्धारण के लिए सबसे पहले स्कूल या बोर्ड के प्रमाणपत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उसके बाद नगर निगम, म्यूनिसिपलिटी अथवा पंचायत के द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र को देखना चाहिए। केवल इन दस्तावेज के अभाव में ही मेडिकल परीक्षण कराया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि दोनों उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार भी आरोपित याची नाबालिग ही है। ऐसे में मेडिकल परीक्षण का आदेश देना कानून के विपरीत था।
Lucknow Bench Minor Age Determination Medical Test Ossification Test Juvenile Justice Act 2015 POCSO Act School Certificate Birth Certificate Pratapgarh Lucknow News Lucknow Latest News Lucknow News In Hindi Lucknow Samachar
