नए साल पर शिमला मनाली जैसी भीड़ भाड़ वाली जगह कहां जा रहे हैं, पहुंचिए राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन

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नए साल पर शिमला मनाली जैसी भीड़ भाड़ वाली जगह कहां जा रहे हैं, पहुंचिए राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन
राजस्थान में माउंट आबू कहां हैराजस्थान के माउंट आबू के बारे मेंन्यू ईयर पर बनाएं माउंट आबू का प्लान

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित नक्की झील को यहां का दिल माना जाता है। यह झील प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, जहां पर्यटक शिकारा और पेडल बोटिंग का आनंद लेते हैं। झील के चारों ओर बना वॉकिंग ट्रैक सैर के लिए पसंद किया जाता है। पास ही टॉड रॉक, रघुनाथ मंदिर और हनीमून प्वाइंट जैसे दर्शनीय स्थल भी स्थित हैं, जो इसे खास बनाते...

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित नक्की झील को यहां का हृदय स्थल माना जाता है। यह झील राज्य की सबसे ऊंचाई पर बनी झीलों में से एक है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर्यटक शिकारा बोट और पेडल बोट के जरिए हरियाली से घिरी वादियों के बीच बोटिंग का मजा लेते हैं। झील के चारों ओर बना वॉकिंग ट्रैक सैर के लिए बेहद पसंद किया जाता है, जहां से कई खूबसूरत व्यू पॉइंट नजर आते हैं। नक्की झील से पैदल दूरी पर टॉड रॉक, रघुनाथ मंदिर और हनीमून प्वाइंट जैसे प्रमुख दर्शनीय स्थल भी स्थित हैं। शांत वातावरण और मनमोहक नजारों का यह संगम सैलानियों को बार-बार यहां आने के लिए आकर्षित करता है। चलिए जानते हैं इस जगह के बारे में।नक्की झील नक्की झील माउंट आबू का सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल मानी जाती है। यहां पर्यटक बोटिंग का आनंद लेने के साथ-साथ आसपास के बाजारों में खरीदारी भी कर सकते हैं। नक्की झील के पास स्थित बाजारों में कई यूनिक और एंटिक आइटम मिलते हैं, जो सैलानियों को खासा आकर्षित करते हैं। खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी यहां कई कैफे और स्ट्रीट फूड के विकल्प मौजूद हैं। नक्की लेक के परिक्रमा पथ पर बने दर्शनीय स्थल घूमने वालों को बेहद पसंद आते हैं, जिससे यह जगह और भी खास बन जाती है।अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी माउंट आबू से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान समुद्र तल से लगभग 1722 मीटर यानी 5650 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। यहां एक प्रसिद्ध व्यू प्वाइंट के साथ भगवान दत्तात्रेय का मंदिर भी स्थित है। इस ऊंचाई से अरावली पर्वतमाला के बेहद सुंदर और मनमोहक नजारे देखने को मिलते हैं। चारों ओर फैली पहाड़ियां और हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि यह स्थान माउंट आबू घूमने आने वाले सैलानियों की यात्रा का अहम हिस्सा माना जाता है।गुरुशिखर गुरुशिखर पर्यटन के साथ-साथ धार्मिक नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यहां आने के लिए पर्यटकों को किसी भी प्रकार की प्रवेश फीस नहीं देनी पड़ती और पूरे क्षेत्र में निशुल्क सैर कर सकते हैं। मान्यता है कि इसी स्थान पर ऋषि दत्तात्रेय ने वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। आज भी यहां भगवान दत्तात्रेय की गुफा है। इस पवित्र स्थल पर दर्शन के लिए हर वर्ष देशभर से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे गुरुशिखर की धार्मिक महत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है।सनसेट प्वाइंट माउंट आबू की नक्की लेक से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सनसेट प्वाइंट पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यहां शाम के समय परिवार और दोस्तों के साथ डूबते सूरज के मनमोहक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। प्रवेश के लिए मेन गेट पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से टिकट लेना होता है, जिसके बाद करीब 1 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इच्छुक पर्यटक घुड़सवारी करते हुए भी सनसेट प्वाइंट तक पहुंच सकते हैं। सनसेट रोड पर कई स्थानों पर घुड़सवारी की सुविधा उपलब्ध है, जो इस सैर को और भी रोमांचक बना देती है।देलवाड़ा क्षेत्र में स्थित जैन मंदिर माउंट आबू के देलवाड़ा क्षेत्र में स्थित जैन मंदिरों को राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है, क्योंकि इनकी स्थापत्य कला की तुलना ताजमहल से की जाती है। मंदिरों की बारीक नक्काशी और अद्भुत कलाकृतियां न केवल जैन समाज बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करती हैं। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर समूह का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ था। ये मंदिर शिल्पकला, ऐतिहासिक महत्व और गहरी धार्मिक आस्था का अनोखा संगम है। कैसे पहुंचे माउंट आबू माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है, जहां सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। माउंट आबू का पास का रेलवे स्टेशन आबू रोड है, जो लगभग 28 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां से टैक्सी और बस की सुविधा मिल जाती है। पास का हवाई अड्डा उदयपुर है, जो करीब 165 किलोमीटर दूर है। उदयपुर से माउंट आबू के लिए नियमित बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं। सड़क मार्ग से जयपुर, अहमदाबाद और जोधपुर जैसे शहरों से भी माउंट आबू आसानी से पहुंचा जा सकता है।.

राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में स्थित नक्की झील को यहां का हृदय स्थल माना जाता है। यह झील राज्य की सबसे ऊंचाई पर बनी झीलों में से एक है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहां पर्यटक शिकारा बोट और पेडल बोट के जरिए हरियाली से घिरी वादियों के बीच बोटिंग का मजा लेते हैं। झील के चारों ओर बना वॉकिंग ट्रैक सैर के लिए बेहद पसंद किया जाता है, जहां से कई खूबसूरत व्यू पॉइंट नजर आते हैं। नक्की झील से पैदल दूरी पर टॉड रॉक, रघुनाथ मंदिर और हनीमून प्वाइंट जैसे प्रमुख दर्शनीय स्थल भी स्थित हैं। शांत वातावरण और मनमोहक नजारों का यह संगम सैलानियों को बार-बार यहां आने के लिए आकर्षित करता है। चलिए जानते हैं इस जगह के बारे में।नक्की झील नक्की झील माउंट आबू का सबसे प्रमुख पर्यटन स्थल मानी जाती है। यहां पर्यटक बोटिंग का आनंद लेने के साथ-साथ आसपास के बाजारों में खरीदारी भी कर सकते हैं। नक्की झील के पास स्थित बाजारों में कई यूनिक और एंटिक आइटम मिलते हैं, जो सैलानियों को खासा आकर्षित करते हैं। खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी यहां कई कैफे और स्ट्रीट फूड के विकल्प मौजूद हैं। नक्की लेक के परिक्रमा पथ पर बने दर्शनीय स्थल घूमने वालों को बेहद पसंद आते हैं, जिससे यह जगह और भी खास बन जाती है।अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी माउंट आबू से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान समुद्र तल से लगभग 1722 मीटर यानी 5650 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। यहां एक प्रसिद्ध व्यू प्वाइंट के साथ भगवान दत्तात्रेय का मंदिर भी स्थित है। इस ऊंचाई से अरावली पर्वतमाला के बेहद सुंदर और मनमोहक नजारे देखने को मिलते हैं। चारों ओर फैली पहाड़ियां और हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि यह स्थान माउंट आबू घूमने आने वाले सैलानियों की यात्रा का अहम हिस्सा माना जाता है।गुरुशिखर गुरुशिखर पर्यटन के साथ-साथ धार्मिक नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यहां आने के लिए पर्यटकों को किसी भी प्रकार की प्रवेश फीस नहीं देनी पड़ती और पूरे क्षेत्र में निशुल्क सैर कर सकते हैं। मान्यता है कि इसी स्थान पर ऋषि दत्तात्रेय ने वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। आज भी यहां भगवान दत्तात्रेय की गुफा है। इस पवित्र स्थल पर दर्शन के लिए हर वर्ष देशभर से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे गुरुशिखर की धार्मिक महत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है।सनसेट प्वाइंट माउंट आबू की नक्की लेक से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सनसेट प्वाइंट पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। यहां शाम के समय परिवार और दोस्तों के साथ डूबते सूरज के मनमोहक नजारों का आनंद लिया जा सकता है। प्रवेश के लिए मेन गेट पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से टिकट लेना होता है, जिसके बाद करीब 1 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इच्छुक पर्यटक घुड़सवारी करते हुए भी सनसेट प्वाइंट तक पहुंच सकते हैं। सनसेट रोड पर कई स्थानों पर घुड़सवारी की सुविधा उपलब्ध है, जो इस सैर को और भी रोमांचक बना देती है।देलवाड़ा क्षेत्र में स्थित जैन मंदिर माउंट आबू के देलवाड़ा क्षेत्र में स्थित जैन मंदिरों को राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है, क्योंकि इनकी स्थापत्य कला की तुलना ताजमहल से की जाती है। मंदिरों की बारीक नक्काशी और अद्भुत कलाकृतियां न केवल जैन समाज बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करती हैं। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर समूह का निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ था। ये मंदिर शिल्पकला, ऐतिहासिक महत्व और गहरी धार्मिक आस्था का अनोखा संगम है। कैसे पहुंचे माउंट आबू माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन है, जहां सड़क, रेल और हवाई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। माउंट आबू का पास का रेलवे स्टेशन आबू रोड है, जो लगभग 28 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां से टैक्सी और बस की सुविधा मिल जाती है। पास का हवाई अड्डा उदयपुर है, जो करीब 165 किलोमीटर दूर है। उदयपुर से माउंट आबू के लिए नियमित बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं। सड़क मार्ग से जयपुर, अहमदाबाद और जोधपुर जैसे शहरों से भी माउंट आबू आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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