पलनीस्वामी करीब 20 साल की उम्र में ही AIADMK से जुड़ गए थे. वह तेजी से उभरे और जयललिता के खास विश्वस्त लोगों में गिने जाने लगे
करुप्पा गौंदर पलनीसामी तमिलनाडु के मौजूदा मुख्यमंत्री हैं. उन्हें इदापद्दी के. पलनीस्वामी के नाम से भी जाना जाता है. वह AIADMK के प्रमुख नेता हैं और 16 फरवरी, 2017 को तमिलनाडु के सीएम बने.64 वर्षीय पलनीस्वामी का जन्म तमिलनाडु के सालेम जिले के छोटे से कस्बे इदापड्डी के पास एक गांव में 2 मार्च 1954 को हुआ था.
हुआ था. वह गौंदर समुदाय से हैं जिसका थेवर या मुक्कुलथोर समुदाय के साथ ही AIADMK में काफी प्रभाव है. उनका जन्म एक किसान परिवार में हुआ. उन्होंने इरोड के श्री वसवी कॉलेज में एडमिशन लिया था, लेकिन अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा है.वह करीब 20 साल की उम्र में ही AIADMK से जुड़ गए थे. वह तेजी से उभरे और जयललिता के खास विश्वस्त लोगों में गिने जाने लगे. पलनीस्वामी तमिलनाडु के इदापद्दी विधानसभा क्षेत्र से चार बार 1989, 1991, 2011 और 2016 में चुनाव जीत चुके हैं. 1998 में वह राज्य की तिरुचेंगोदे संसदीय क्षेत्र से सांसद भी चुने गए थे. वह मुख्यमंत्री बनने से पहले AIADMK सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. जयललिता के निधन और वीके शशिकला के आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी पाए जाने पर जेल हुआ तो तमिलनाडु में एक तरह का सत्ता संघर्ष छिड़ गया. करीब दो महीने के लिए पन्नीरसेल्वम राज्य के मुख्यमंत्री बने और उसके बाद समझौते के तहत 14 फरवरी, 2017 को पलनीस्वामी को राज्य का सीएम बनाया गया. वह राज्य के 13वें मुख्यमंत्री हैं. वह राज्य के हाईवे और माइनर पोर्ट मंत्री भी रह चुके हैं. वह साल 1974 में AIADMK से जुड़े. वह AIADMK के प्रमुख नेता और सह-समन्वयक भी हैं. जुलाई, 1985 में वह पार्टी के प्रचार सचिव बनाए गए. साल 2007 में वह पार्टी के संगठन सचिव बनाए गए. साल 1989 में वह पहली बार AIADMK के विधायक बने. साल 2011 से 2016 तक वह राज्य के राजमार्ग मंत्री रहे. 2016 में चैथी बार विधायक चुने जाने पर उन्हें पीडब्लूडी और हाइवे मंत्री बनाया गया. साल 1987 में जब AIADMK के संस्थापक एमजी रामचंद्रन की मौत के बाद पार्टी में सत्ता का संघर्ष शुरू हुआ तो तब वह जयललिता के साथ उसी तरह से खड़े थे, जैसे आज शशिकला के साथ हैं. पलनीस्वामी का पार्टी में काफी तेजी से उभार हुआ. गाउंदर समुदाय का 2016 के विधानसभा चुनाव में काफी महत्वपूर्ण भूमिका थी. जयललिता एंटी इनकम्बेंसी का सामना कर रही थीं, लेकिन पश्चिमी तमिलनाडु में गौंदर समुदाय के मजबूत समर्थन की वजह से उनकी नैया पार हो गई. खुद पलनीस्वामी के सालेम जिले की 11 विधानसभा सीटों में से 10 पर AIADMK कैंडिडेट विजयी हुए. हालांकि वह अपने पूरे करियर के दौरान लो प्रोफाइल नेता बने रहे. वह अम्मा यानी जयललिता के प्रसिद्ध नालवार अनी यानी चार लोगों की सेना के सदस्य माने जाते थे जिनकी सीधी अम्मा और उनके निवास पोएस गार्डन तक पहुंच थी. जयललिता के 40 साल के राजनीतिक करियर में वह उनकी छाया बनकर साथ रहे. जयललिता के निधन के बाद भी उन्होंने पोएस गार्डन के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखी और चिनम्मा यानी शशिकला का साथ दिया. इस वफादारी का उन्हें इनाम भी मिला और चिनम्मा ने अपनी तरफ से उन्हें मुख्यमंत्री कैंडिडेट घोषित किया.पलनीस्वामी के खिलाफ कोवाथुर थाने में आईपीसी की धारा 365 के तहत अपहरण का मामला दर्ज किया गया है. उनकी यह कहकर आलोचना की जाती है कि वह बहुत जानकार नहीं हैं और जयललिता जैसा एकाधिकारवादी रवैया अपनाते हैं.
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