गृह मंत्रालय की समिति ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि डिजिटल अरेस्टिंग के मामलों में बैंक और टेलीकॉम कंपनियों की लापरवाही होने पर उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। समिति ने पीड़ितों को मुआवजा देने और सिम लेने के नियमों को सख्त करने पर भी चर्चा की। सुप्रीम कोर्ट से सुझाव देने के लिए एक महीने का समय मांगा गया है।
नई दिल्ली: डिजिटल अरेस्टिंग के मामलों में गृह मंत्रालय की कमिटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अगर बैंक ों या टेलिकॉम कंपनियों की लापरवाही के कारण पीड़ित का नुकसान हुआ तो उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत के आदेश पर बनाई गई मंत्रालय की इंटरनल हाई लेवल कमिटी की बैठक में यह नतीजा निकलकर सामने आया। डिजिटल अरेस्ट रोकने के लिए सिम लेने के नियम कड़े करने पर भी बात हुई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि यह कमिटी गृह मंत्रालय में विशेष सचिव की अध्यक्षता में काम करेगी।बैठक में कमिटी ने पीड़ित मुआवजे से संबंधित एमिकस की सिफारिशों पर भी विचार किया। यह भी देखा गया कि पीड़ितों को सिस्टम फेल्योर या अन्य कारणों से नुकसान नहीं उठाना चाहिए। कमिटी के अध्यक्ष ने मुआवजे के मौजूदा तंत्र की समीक्षा कर उसमें सुधार और बदलाव सुझाने का निर्देश दिया। गृह मंत्रालय ने समिति को आगे विचार-विमर्श कर सुझाव देने के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक महीने का समय मांगा है। अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।एक तय सीमा के बाद CBI करेगी जांचकोर्ट को बताया गया कि कमिटी की बैठक हर दो सप्ताह में होगी और अटॉर्नी जनरल आर.
वेंकटरमणि भी शामिल होंगे। गृह मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, कमिटी की पहली बैठक 29 दिसंबर को हुई थी। इसमें CBI ने डिजिटल अरेस्ट के मामलों के लिए एक मौद्रिक सीमा निर्धारित करने का सुझाव दिया। इस सीमा से ऊपर के मामलों की जांच CBI कर सकती है। इससे नीचे के मामलों को राज्य की एजेसिया, गृह मंत्रालय की सहायता से देख सकती है।सिम कार्ड फर्जीवाड़े पर कसेगा शिकंजाबैठक में RBI ने बताया कि फ्रॉड का पता लगाने के लिए बैकों को एआई-बेस्ड उपकरणों के उपयोग संबंधी परामर्श जारी किया गया है। संदिग्ध लेनदेन में शामिल खातों को फ्रीज करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत ड्राफ्ट रूल तैयार है और वे हित धारकों से परामर्श के चरण में है। अधिसूचित होने के बाद ये नियम सिम कार्ड जारी करने मे लापरवाही, एक शख्स को कई सिम जारी करने जैसी समस्याओं को एड्रेस करेगा। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने बताया कि तत्काल फ्रीजिंग, डी-फ्रीजिंग, धन वसूली और पीड़ितों को राशि लौटाने से संबंधित SOPs विचाराधीन है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के पुनर्गठन पर भी विचार हो रहा है।
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