अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस का साथ देने वाले देशों पर जुर्माना लगाने की घोषणा की है। इसी वजह से भारत को अमेरिका से बड़ा नुकसान उठाने पड़ सकता है।
नई दिल्ली. जिस व्यक्ति के लिए भारत में यज्ञ और हवन किए जा रहे थे और लोग व्रत और पूजन कर रहे थे, उसने कुर्सी मिलते ही पीठ में छुरा घोंप दिया. भारत और भारत ीय प्रधानमंत्री को अपना दोस्त बताने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार यह बता दिया कि अमेरिका किसी का सगा नहीं है. उन्होंने भारत से ट्रेड डील भी पूरी नहीं की और अब 1 अगस्त से टैरिफ भी लगा दिया. यहां तक तो गनीमत थी, लेकिन सबसे खराब बात तो यह है कि भारत और रूस की दशकों पुरानी दोस्ती पर भी ट्रंप ने सीधा हमला बोल दिया है.
उन्होंने दो टूक कहा है कि रूस का साथ देने वाले भारत पर 1 अगस्त से जुर्माना लगाया जाएगा. वैसे तो ट्रंप ने यह नहीं बताया है कि जुर्माना कितना होगा, लेकिन उनकी बातों का मतलब निकालें तो यह तय है कि ट्रंप के नए फैसले से भारतीय तेल कंपनियों को बड़ा नुकसान होने जा रहा है. डोनाल्ड ने पिछले दिनों कहा था कि रूस ने अगर यूक्रेन के साथ युद्ध बंद नहीं किया तो उस पर प्रतिबंधों का दूसरा दौर शुरू किया जाएगा. यूरोपीय यूनियन ने तो रूस पर दूसरे स्तर का प्रतिबंध लगा भी दिया है, जिसका असर भारत पर भी दिख रहा है. अब अमेरिका के इस कदम का कितना असर होगा, ये समय ही बताएगा. क्या है ट्रंप की मंशा अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले दिनों यूक्रेन के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए रूस को 50 दिन की डेडलाइन दी थी, लेकिन अब इस समय सीमा को घटाकर 15 से 20 दिन कर दिया है. इतना ही नहीं उन्होंने कहा है कि रूस से निर्यात होने वाले सामानों पर 100 फीसदी का टैरिफ लगाया जाएगा. इसके अलावा भारत सहित जो भी देश रूस से तेल अथवा रक्षा उपकरण खरीदते हैं, उन पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा. ट्रंप के दूसरे सैंक्शन का भारत पर बड़ा असर दिख सकता है, क्योंकि अभी भारतीय कंपनियां अपना ज्यादा तेल रूस से ही मंगाती हैं. भारत पर कितना असर होगा एक्सपर्ट की मानें तो भारतीय रिफाइनरियां जिनमें सरकारी और निजी दोनों शामिल हैं, अभी लगभग 40 फीसदी तेल रूस से खरीद रही हैं. इसकी वजह है कि यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद रूस डिस्काउंट पर तेल भारत को भेजता रहा है. मिडिल ईस्ट और अमेरिका से आने वाले क्रूड के मुकाबले रूस का क्रूड लगभग 8 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता होता है. साथ ही रूस से तेल मंगाना आसान भी है और लागत भी कम आती है. अगर इस पर प्रतिबंध लगता है तो निश्चित रूप से भारतीय रिफाइनरियों का मुनाफा घटेगा और इसका घरेलू बाजार पर भी बखूबी दिखाई देगा.रूस से कितना तेल खरीदता है भारत साल 2022 से पहले जहां भारत का रूस से क्रूड खरीदारी महज 0.2 फीसदी था, वहीं अब यह 40 फीसदी के आसपास पहुंच गया है. इसकी प्रमुख वजह सस्ते और आसान ढुलाई है. केंद्रीय तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पिछले दिनों कहा था कि भारत अपने तेल आयात को डाईवर्सिफाई कर रहा है और रूस से खरीदारी को यूक्रेन युद्ध की पूर्व स्थिति में ले जाने की तैयारी में है, लेकिन अभी इसमें समय लगेगा. उन्होंने कहा था कि भारत अभी 40 देशों से तेल खरीदता है, जो साल 2007 में महज 27 देशों से खरीदता था. क्योंकि भारत अपनी कुल जरूरत का 90 फीसदी तेल आयात करता है और इसका 40 फीसदी रूस से ही आ रहा है तो अमेरिका के प्रतिबंधों से निश्चित रूप से नुकसान होगा. कितना घातक है ट्रंप का नया आदेश अगर यह मान भी लें कि भारत 3 साल पहले रूस से ज्यादा तेल नहीं खरीदता था और सिर्फ़ सस्ते मिलने की वजह से ही तेल खरीद रहा है. उसके पास रूस से हटकर भी विकल्प हैं, जिन्हें अपनाकर अमेरिका की पेनाल्टी से बचा जा सकता तो भी भारत के लिए ट्रंप का नया आदेश पूरी तरह बेवजह और बेबुनियाद है. भारत और रूस लंबे समय से सामरिक साझेदार रहे हैं. रूस हमेशा से ही अपनी सैन्य तकनीक और उपकरण भारत को देता रहा है, जबकि यह पूरी तरह देश की सुरक्षा का मामला होता है. ऐसे में भारत को तेल का विकल्प मिल भी जाए तो रक्षा मामले में रूस जैसा भरोसेमंद साझेदार मिलना फिलहाल संभव नहीं लग रहा
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