यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोपीय संघ ने रूस पर 18वां प्रतिबंध पैकेज लगाया है, जिसका असर भारत के लिए सस्ते तेल का रास्ता खोल सकता है। रूसी तेल पर मूल्य सीमा घटने से भारत को और भी कम कीमत पर तेल मिलने की संभावना है। कारण है कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश...
नई दिल्ली: यूरोपीय संघ के देशों ने यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर 18वां प्रतिबंध पैकेज लगाया है। इसका मकसद रूस के तेल और ऊर्जा उद्योग को और नुकसान पहुंचाना है। इस पैकेज के केंद्र में रूसी तेल पर मूल्य सीमा में कमी करना है। यह वैश्विक बाजारों को बाधित किए बिना मॉस्को के ऊर्जा राजस्व को कम कर देगा। जबकि ये प्रतिबंध रूस को निशाना बनाते हैं। अप्रत्यक्ष रूप से इनके कारण भारत के लिए सस्ते तेल तक पहुंच का नया अवसर पैदा हो सकता है। बेशक, भारत रूस का पक्का दोस्त है। लेकिन, उसके सामने बंपर छूट का फायदा उठाने का मौका है। प्रतिबंधों के इस पैकेज का सबसे अहम हिस्सा है रूसी तेल पर लगने वाली नई मूल्य सीमा। ईयू रूसी कच्चे तेल पर बाजार मूल्य से 15% कम की सीमा लगाएगा। वहां के राजनयिकों के अनुसार, यह सीमा लगभग 47.
60 डॉलर प्रति बैरल होगी। यह G7 देशों की ओर से दिसंबर 2022 से लगाए गए 60 डॉलर प्रति बैरल की अधिकतम सीमा से काफी कम है। भारत के पास आयात बिल घटाने का मौका यह मूल्य सीमा रूस को अपने तेल को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर करेगी। चूंकि भारत रूस के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और उसकी लगभग 40% तेल आयात की जरूरतें रूस से पूरी होती हैं। ऐसे में यह कम मूल्य सीमा भारत के आयात बिल को और कम करने में मदद कर सकती है।रूस पहले से ही भारत को रियायती दरों पर तेल उपलब्ध करा रहा था। इसमें अक्सर परिवहन और बीमा लागत विक्रेता की ओर से वहन की जाती थी। नई, कम मूल्य सीमा से रूस पर और अधिक रियायतें देने का दबाव बढ़ेगा। इससे भारत को संभावित रूप से और भी सस्ते सौदे मिल सकते हैं।सस्ते रूसी तेल के साथ चुनौतियां भीहालांकि, सस्ते तेल का अवसर है तो कुछ चुनौतियां भी हैं। ईयू ने पहली बार रूस की रोसनेफ्ट से जुड़ी एक भारतीय तेल रिफाइनरी नैयरा एनर्जी पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इसका मतलब है कि नैयरा अब यूरोप को पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात नहीं कर पाएगी। इससे भारत के घरेलू डाउनस्ट्रीम क्षेत्र को संभावित रूप से रणनीतिक झटका लग सकता है। अन्य भारतीय रिफाइनरियों के लिए लागत बढ़ सकती है।ईयू ने रूसी तेल ले जाने वाले पुराने तेल टैंकरों के 'शैडो फ्लीट' पर भी नकेल कसने का प्रयास किया है। इससे इन जहाजों की पहुंच और उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। अगर इन 'शैडो फ्लीट' जहाजों पर प्रतिबंध प्रभावी होते हैं तो रूसी तेल के परिवहन की लागत बढ़ सकती है, जो सस्ते तेल के फायदे को कुछ हद तक कम कर सकती है।अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी सैंक्शंस की धमकी दी है। खासकर अगर रूस यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए सहमत नहीं होता है। हालांकि, भारत ने इन धमकियों को खारिज किया है। फिर भी यह भविष्य में भारत के लिए एक अनिश्चितता का फैक्टर बना हुआ है।
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