Anti Naxal Operations: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लगभग पूरी तरह से खत्म हो गया है। ऐसा दावा किया जा रहा है। बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे का श्रेय अमित शाह ने सुरक्षाबल के जवानों को दिया है।
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लगभग खत्म हो गया है। सुरक्षाबल के जवानों ने डेडलाइन 31 मार्च 2026 से पहले ही नक्सलियों के कई टॉप लीडरों का एनकाउंटर किया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में नक्सलियों के सरेंडर के कारण जवानों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल कैंप की स्थापना से जवानों को इस मिशन में बड़ी मदद मिली है। नवभारत टाइम्स डॉट कॉम से बात करते हुए बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में स्थानीय लोगों का साथ मिला। इसके साथ ही रणनीति बनाई गई थी कि फोर्स की पहुंच उन इलाकों में होनी चाहिए जो हार्डकोर नक्सली माने जाते हैं। जिसके बाद सुरक्षा कैंप की स्थापना पर फोकस किया गया। कैंप की स्थापना से स्थानीय लोगों से संवाद आसान हुआ इसके साथ की नक्सलियों की गतिविधियों पर सीधी नजर रखी गई। जिस कारण से नक्सलवाद के खिलाफ जीत मिली है। हार्डकोर नक्सली इलाके में फोर्स की पहुंचबस्तर संभाग में 2025 में नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ क्षेत्र की जनता से संवाद के मकसद से 58 नवीन सुरक्षा कैम्प की स्थापना की गई। इसके साथ ही 22 मार्च 2026 तक 15 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए। जिसमें नारायणपुर जिले के हार्डकोर नक्सली इलाका माने जाने वाले जटवर, मदौड़ा, वाड़ापेंदा, कुरूषकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर, दिवालूर, तुमनार। बीजापुर जिले के आदवाड़ा, मुक्कावेली, गुण्डेपुरी, पालसेगुड़ी, सेन्ड्रा, बड़ेगुण्डेम जैसे स्थान पर सुरक्षा कैंप की स्थापना की गई।ग्रामीणों तक योजनाओं का पहुंचा लाभबस्तर संभाग के सुरक्षा कैम्पों की स्थापना के साथ-साथ विकास कार्य को भी प्राथमिकता दी गई। नक्सली इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बिजली, बैंक, आंगनबाड़ी केन्द्र एवं अन्य सुविधायें उपलब्ध कराया गया। जिस कारण से नक्सल प्रभावित क्षेत्रवासियों में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाने लगा। नक्सलियों के सरेंडर से संगठन कमजोरबस्तर संभाग में नक्सलवाद के खात्मे के लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी कैडरों को सरेंडर के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए 'पूना मारगेम' अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत 2025 में 1573 और 2026 में 373 माओवादियों ने सरेंडर किया है। जिस कारण से नक्सली संगठन को झटका लगा। वहीं, 2024 में 792 माओवादियों ने हिंसा त्यागकर सरकार की नीतियों का साथ दिया और समाज की मुख्यधारा में लौटे हैं। बड़े नक्सलियों का एनकाउंटर नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने टॉप नक्सली लीडरों को टारगेट किया। नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने बसवाराजू, माड़वी हिडमा जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया। जिसके बाद से नक्सली संगठन कमजोर होता गया। नक्सल संबंधी घटनाओं का विवरण साल 2024 साल 2025 साल 2026 मुठभेड़ में मारे गए नक्सली 217 256 26 गिरफ्तार नक्सली 929 898 94 नक्सलियों द्वारा बरामद हथियार 286 677 237 सरेंडर करने वाले नक्सली 792 1573 373 बरामद किए गए आईईडी विस्फोटक 308 894 220 हथियार के साथ सरेंडर से झटकामाओवादी संगठनों को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब नक्सलियों ने अपने हथियारों के साथ सरेंडर किया। बस्तर संभाग में पुलिस ने नक्सली मुठभेड़, माओवादियों द्वारा डम्प किये गये हथियार एवं पूना मारगेम के तहत सशस्त्र माओवादियों द्वारा हिंसा त्यागकर समाज के मुख्यधारा में शामिल होनों से नक्सली संगठन को झटका लगा।.
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद लगभग खत्म हो गया है। सुरक्षाबल के जवानों ने डेडलाइन 31 मार्च 2026 से पहले ही नक्सलियों के कई टॉप लीडरों का एनकाउंटर किया। इसके साथ ही बड़ी संख्या में नक्सलियों के सरेंडर के कारण जवानों को बड़ी सफलता मिली है। नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबल कैंप की स्थापना से जवानों को इस मिशन में बड़ी मदद मिली है। नवभारत टाइम्स डॉट कॉम से बात करते हुए बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में स्थानीय लोगों का साथ मिला। इसके साथ ही रणनीति बनाई गई थी कि फोर्स की पहुंच उन इलाकों में होनी चाहिए जो हार्डकोर नक्सली माने जाते हैं। जिसके बाद सुरक्षा कैंप की स्थापना पर फोकस किया गया। कैंप की स्थापना से स्थानीय लोगों से संवाद आसान हुआ इसके साथ की नक्सलियों की गतिविधियों पर सीधी नजर रखी गई। जिस कारण से नक्सलवाद के खिलाफ जीत मिली है। हार्डकोर नक्सली इलाके में फोर्स की पहुंचबस्तर संभाग में 2025 में नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ क्षेत्र की जनता से संवाद के मकसद से 58 नवीन सुरक्षा कैम्प की स्थापना की गई। इसके साथ ही 22 मार्च 2026 तक 15 नवीन सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए। जिसमें नारायणपुर जिले के हार्डकोर नक्सली इलाका माने जाने वाले जटवर, मदौड़ा, वाड़ापेंदा, कुरूषकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर, दिवालूर, तुमनार। बीजापुर जिले के आदवाड़ा, मुक्कावेली, गुण्डेपुरी, पालसेगुड़ी, सेन्ड्रा, बड़ेगुण्डेम जैसे स्थान पर सुरक्षा कैंप की स्थापना की गई।ग्रामीणों तक योजनाओं का पहुंचा लाभबस्तर संभाग के सुरक्षा कैम्पों की स्थापना के साथ-साथ विकास कार्य को भी प्राथमिकता दी गई। नक्सली इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, बिजली, बैंक, आंगनबाड़ी केन्द्र एवं अन्य सुविधायें उपलब्ध कराया गया। जिस कारण से नक्सल प्रभावित क्षेत्रवासियों में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाने लगा। नक्सलियों के सरेंडर से संगठन कमजोरबस्तर संभाग में नक्सलवाद के खात्मे के लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी कैडरों को सरेंडर के लिए प्रेरित किया गया। इसके लिए 'पूना मारगेम' अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत 2025 में 1573 और 2026 में 373 माओवादियों ने सरेंडर किया है। जिस कारण से नक्सली संगठन को झटका लगा। वहीं, 2024 में 792 माओवादियों ने हिंसा त्यागकर सरकार की नीतियों का साथ दिया और समाज की मुख्यधारा में लौटे हैं। बड़े नक्सलियों का एनकाउंटरनक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने टॉप नक्सली लीडरों को टारगेट किया। नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबल के जवानों ने बसवाराजू, माड़वी हिडमा जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया। जिसके बाद से नक्सली संगठन कमजोर होता गया। नक्सल संबंधी घटनाओं का विवरण साल 2024 साल 2025 साल 2026 मुठभेड़ में मारे गए नक्सली 217 256 26 गिरफ्तार नक्सली 929 898 94 नक्सलियों द्वारा बरामद हथियार 286 677 237 सरेंडर करने वाले नक्सली 792 1573 373 बरामद किए गए आईईडी विस्फोटक 308 894 220 हथियार के साथ सरेंडर से झटकामाओवादी संगठनों को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा जब नक्सलियों ने अपने हथियारों के साथ सरेंडर किया। बस्तर संभाग में पुलिस ने नक्सली मुठभेड़, माओवादियों द्वारा डम्प किये गये हथियार एवं पूना मारगेम के तहत सशस्त्र माओवादियों द्वारा हिंसा त्यागकर समाज के मुख्यधारा में शामिल होनों से नक्सली संगठन को झटका लगा।
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