जानें, आखिर क्यों पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़नेवालों के पर्चे थोक में खारिज हुए via NavbharatTimes ElectionsWithTimes
हाइलाइट्स:वाराणसी लोकसभा सीट पर 102 उम्मीदवारों ने भरे पर्चे, 70 से ज्यादा हुए खारिजकई उम्मीदवारों ने गलत हलफनामे तो कइयों ने बिना प्रस्तावक के ही भरे थे पर्चेपर्चा वापस लेने के समय पांच उम्मीदवारों ने अपने पर्चे वापस भी ले लिएअब वाराणशी में नरेंद्र मोदी के सामने सिर्फ 25 उम्मीदवार मैदान में हैंवाराणसी पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए देश के कई राज्यों से थोक में आए उम्मीदवारों की उम्मीदें थोक में पर्चा खारिज होने से ध्वस्त हो गईं। लोकसभा चुनाव 2019 में तेलंगाना की निजामाबाद लोकसभा सीट के बाद सबसे ज्यादा 102 उम्मीदवारों के पर्चा दाखिल करने के बाद 71 प्रत्याशियों का पर्चा किन कारणों से खारिज हुआ? यह जानने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह से एनबीटी ने बातचीत की तो कई चौंकाने वाले कारण सामने आए। एसपी के टिकट पर आखिरी दिन नामांकन करने वाले तेज बहादुर यादव का पर्चा किस कारण से खारिज हुआ सबको पता है कि अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दे सके लेकिन बाकी उम्मीदवारों का किस कारण हुआ, इसको जानकार आप भी चौंक जाएंगे। लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में 19 मई को होने वाले चुनाव के लिए वाराणसी संसदीय सीट पर 22 अप्रैल से 29 अप्रैल तक चली नामांकन प्रक्रिया के दौरान 102 उम्मीदवारों ने 119 नामांकन पत्र दाखिल किए थे। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान 71 उम्मीदवारों के 88 पर्चे खारिज हो गए। पीएम मोदी से मुकाबले के लिए मैदान में सिर्फ 30 प्रत्याशी बचे। नामांकनपत्रों की वापसी के दौरान पांच प्रत्याशियों ने पर्चे वापस ले लिए, इस तरह पीएम मोदी को सियासी पिच पर टक्कर देने वाले सिर्फ 25 लोग हैं। प्रस्तावक पूरे न मिलने से सबसे ज्यादा पर्चे खारिज जिला निर्वाचन अधिकारी सुरेंद्र सिंह से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि जिन 71 लोगों के पर्चे खारिज हुए, उसमें सबसे ज्यादा संख्या ऐसे लोगों की थी, जो 10 प्रस्तावक भी नहीं जुटा सके। निर्वाचन आयोग के नियमानुसार, निर्दलीय उम्मीदवारों को 10 प्रस्तावकों की आवश्यकता होती है, जो जिस संसदीय क्षेत्र में चुनाव लड़ने के लिए आवेदन किए हों, वहां के होने चाहिए। लगभग दो दर्जन पर्चे इसी कारण खारिज हुए। कुछ ऐसे पर्चे भी खारिज किए गए, जिन्होंने 10 प्रस्तावकों के नाम तो लिखे थे लेकिन उनकी वोटर आईडी कार्ड की फोटोकॉपी नहीं जमा की थी और ना ही प्रस्तावकों के हस्ताक्षर किए थे। तेलंगाना से आए किसानों की संख्या इसमें सबसे ज्यादा थी। 'धरतीपकड़' सहित आधा दर्जनों ने लगाए थे पुराने शपथपत्र काशी के धरतीपकड़ कहे जाने वाले नरेंद्रनाथ दूबे 'अडिग' सहित प्रदेश के दूसरे राज्यों से कई प्रत्याशियों ने तो पुराने हलफनामे और शपथपत्र दाखिल करके ही नामांकनपत्र दाखिल कर दिए थे। इसकी जांच कराने पर पता चला कि यह पुराना हलफनामा है, जिसके कारण पर्चा खारिज हो गया। आयोग के नियमानुसार, प्रत्याशी को नामांकन के समय नया हलफनामा और शपथपत्र दाखिल करना होता है। दो प्रत्याशियों ने बिना जमानत राशि के ही किया था नामांकन पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की चाहत रखने में वाराणसी आए दो उम्मीदवार तो बिना जमानत राशि बैंक में जमा किए ही अंतिम दिन नामांकन कर दिया था। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान इनके द्वारा पेश बैंक के चालान की जांच करवाई गई तो पता चला कि किसी दूसरे प्रत्याशी के चालान फॉर्म में हेराफेरी करके पर्चा भर दिए थे, इनका भी नामांकन खारिज कर दिया गया। कोई मांगेगा तोप पर वोट तो कोई हेलिकॉप्टर पर पीएम नरेंद्र मोदी के सामने नामांकनपत्रों की वापसी के बाद जो 25 प्रत्याशी बचे हैं, उसमें कांग्रेस के अजय राय को हाथ, एसपी की शालिनी यादव को साइकल के अलावा थोक में जो निर्दल उम्मीदवार मैदान में हैं। उनको तरह-तरह के चुनाव चिन्ह दिए गए हैं। वाराणसी के मतदाताओं को कमल का फूल, हाथ, साइकल के अलावा निर्दलीय प्रत्याशियों को ट्रैक्टर चलाता किसान, लूडो, फुटबाल, आदमी और पाल युक्त नौका, हरी मिर्च, फलों से युक्त टोकरी, ऑटो रिक्शा, बल्लेबाज, तोप, कप और प्लेट, एयरकंडिशनर, माचिस की डिब्बी, छड़ी, हेलिकॉप्टर, पेन स्टैंड, ट्रक, केतली, चिमटा, दूरबीन, हीरा, खाने से भरी थाली, बेबी वॉकर, चूड़ियां आदि चुनाव चिह्न बांटे गए।.
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